वाराणसी: पीएम का संसदीय कार्यालय OLX पर क्या सच में है बिकाऊ, जानिए क्या है इसकी असलियत

वाराणसी: पीएम का संसदीय कार्यालय OLX पर क्या सच में है बिकाऊ, जानिए क्या है इसकी असलियत

वाराणसी (रणभेरी): पीएम नरेंद्र मोदी के वाराणसी स्थित संसदीय कार्यालय इन दिनों काफ़ी चर्चा में है, हो सकता है आपने भी सुना होगा। चर्चा प्रधानमंत्री कार्यालय के बिकने को लेकर शुरू हुई जब उसकी पोस्ट OLX पर देखने मे आयी। इन्टरनेट पर सब मुमकिन हो सकता है ये सब जानते हैं पर कुछ शरारती तत्वों के चलते PMO OFFICE भी बिकने लगे तो अलग बात है। 

इस बार शरारती तत्वों ने जवाहरनगर एक्‍सटेंशन स्थित पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय कार्यालय को OLX पर बेचने डाल दिया है। OLX पर पीएम के संसदीय कार्यालय को बेचने का विज्ञापन आने के बाद से ही अफवाहें उड़ने लगी और ये चर्चा आग पकड़ने लगी तो इसकी पूरी जानकारी साझा की जा रही है। 

OLX पर बेचेे जा रहे जवाहरनगर एक्‍सटेंशन में पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय कार्यालय की कीमत करीब साढ़े सात करोड़ तय कर डाली गयी है। वहीं कार्यालय को बेचने की कीमत लगाने के साथ ही बेचने वाले का नाम लक्ष्‍मीकांत ओझा दिखाई पड़ रहा है। 

OLX पर विज्ञापन संख्‍या  ID 1612346492 में PMO OFFICE बिकने की जानकारी दी गई। विज्ञापन में हाउस का प्रकार HOUSES AND VILLAS, चार बेडरूम बाथरूम के साथ, Full furnished Ready to Move, Listed by dealer, बिल्‍ड अप एरिया 6500 वर्ग फुट, दो मंजिल भवन में दो कार पार्किंग के साथ ही नार्थ ईस्‍ट फेसिंग की जानकारी विज्ञापन के साथ दी गई है। वहीं प्रोजेक्‍ट का नाम PMO OFFICE VARANASI दिया गया है।

Advertisment को OLX से हटाकर मामले की हो रही जांच
OLX पर दिए गए विज्ञापन को तत्‍काल हटा लिया गया है और इस मामले की जांच कराई जा रही है - अमित कुमार पाठक, एसएसपी, वाराणसी।

आपको बता दें कि वर्तमान वर्ष के फरवरी माह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय जनसंपर्क कार्यालय का पता बदला था। वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय जनसंपर्क कार्यालय का पता इस साल मध्‍य फरवरी को बदल गया। पहले रवींद्रपुरी में पीएम का संसदीय कार्यालय था जो 18 फरवरी 2020 से जवाहरनगर एक्‍सटेंशन में हो गया है। दरअसल 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में अपने सांसद के संपर्क के लिए एक कार्यालय की आवश्‍यता हुई तो इसे रवींद्रपुरी में खोला गया था। दरअसल रवींद्रपुरी स्थित पुराने कार्यालय का एग्रीमेंट पांच साल की अवधि तक का ही था, अवधि समाप्त होने के कारण स्थान बदलना पड़ा। वर्षों तक यहीं पर पीएम के संपर्क के लिए लोग आवेदन लेकर आते रहे। साथ ही जनसुनवाई के लिए भी मंत्रियों का यहां आना जाना लगा रहता था।
प्रधानमंत्री संसदीय कार्यालय के प्रभारी शिव शरण पाठक ने बताया कि कार्यालय के भवन को बेचने की कोई बात नही है। OLX पर किया गया ये पोस्ट पूरी तरह से गलत है। लक्ष्मीकांत ओझा का इस भवन से कोई लेना देना नहीं है।