वाराणसी: गरम गोश्त का कारोबार, दामन है दागदार और लिखते हैं भारत सरकार

वाराणसी: गरम गोश्त का कारोबार, दामन है दागदार और लिखते हैं भारत सरकार

कुकर्मों की हुई जांच तो दर्जनों सफदपोश और वर्दीधारी होंगे बेनकाब, बनारस से लेकर बैंकाक तक फैला है कारोबार
देश के सभी बड़े शहरों में है चलता है इनका धंधा, खुद को बताते हैं रियलस्टेट कारोबारी, काले कारनामों को छुपाने के लिए ली भाजपा की शरण

वाराणसी(रणभेरी): फर्जी तरीके से खुद को भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय के उत्तर प्रदेश के डायरेक्टर कहने वाले भाजपा नेता राकेश त्रिपाठी का दामन पहले से दागदार है। सूत्रों की माने तो राकेश त्रिपाठी को गरम गोश्त के कारोबार का एक ऐसा सरगना माना जाता है जिसे सत्ता के गलिआरे से लेकर मायानगरी की रंगीन रातों के बीच का एक अहम किरदार माना जाता है। राकेश त्रिपाठी का यह काला कारोबार बनारस से लेकर बैंकॉक तक फैला हुआ बताया जा रहा है। देश के सभी बड़े शहरों में हाईप्रोफाइल लोगों से ताल्लुकात के बदौलत गरम गोश्त का यह धंधा धड़ल्ले से चलता है। खुद को समाजसेवी बताने वाला यह व्यक्ति आर्थिक साम्राज्य के सवाल पर डंके की चोट पर रियल स्टेट कारोबारी होने का दावा करता है।

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विदित हो कि पूर्व में सूबे की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाजपार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावाती ने इनके धन-बल की बदौलत वाराणसी दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र से इन्हें अपनी पार्टी का उम्मीदवार भी बनाया था। उस वक्त जनता के बीच घूम-घूम कर इस व्यक्ति ने खुद को समाजसेवी बताया लेकिन वाराणसी की समझदार जनता ने इसके चेहरे की पीछे असली चेहरे को पहचान कर विधानसभा के चुनाव में इसे धूल चटाने का काम किया। अत्यंत फितरती व धूर्त प्रवृति के इस व्यक्ति ने मौके की नजाकत को देखते हुए तत्काल पाला बदलकर सत्ता का चोला ओढने का फैसला कर लिया और फिर कुछ भाजपा नेताओं की गणेश परिक्रमा के साथ सत्ता सुख भोगने को आतुर हो गया।

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बताया तो यह भी जा रहा है कि भाजपा की सदस्यता हासिल करने के लिए इस व्यक्ति ने भाजपा के लगभग एक दर्जन दिग्गजों को मुंबई और गोवा से लेकर बैंकॉक तक सुखभोग कराया तब जाकर बड़ी मशक्कत के बाद अपवित्र राकेश त्रिपाठी के भाजपाई शुभचिंतकों ने इसे केसरिया दुपट्टा पहनाकर पवित्र किया। इस बात में कोई संदेह नहीं है कि अगर तथाकथित समाजसेवी व भाजपा नेता राकेश त्रिपाठी के काले कारनामों की जांच हुई तो इसके साथ कई बड़े सफेदपोश चेहरे बेनकाब होंगे। खबर तो यह भी आ रही है कि इस व्यक्ति ने न केवल सफेदपोश बल्कि दर्जनभर खाकी वर्दीधारी अपने खास शुभचिंतकों को भी हवाई यात्रा सहित स्वीमिंग पुल में स्नान कराकर पुण्य अर्जित किया है।

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सूत्र बताते हैं कि अपने काले कारनामों और गलत धंधे को छुपाने के लिए राकेश त्रिपाठी ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली है और खुद को हर जगर भारतीय जनता पार्टी का नेता बताता है। घर के बाहर लगे बोर्ड से लेकर मंहगी कारों पर भारतीय जनता पार्टी का नाम लिखवाया है और पार्टी के नाम पर ही धौंस और वर्चस्व बनाया हुआ है। इधर एमएसएमई का फर्जी डायरेक्टर बनने के बाद तो उसने अपने कार पर भारत सरकार ही लिखवा दिया। इतना ही नहीं खुद को फर्जी डायरेक्टर बताकर इसने पूरे शहर के चौराहे पर बड़े बड़े बैनर पोस्टर लगवाए।

इतना ही नहीं भारत सरकार के योजनाओं की प्रचार प्रसार के पोस्टर जिसपर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री का पोस्टर लगा है उसके नीचे इसने इडिट कर खुद को एमएसएमई का डायरेक्टर लिखते हुए अपना नाम और फोटो लगवाकर वायरल किया है। यह एक तरह से भारतीय जनता पार्टी और भारत सरकार को बदनाम करने की साजिश है पर शर्मनाक बात यह है कि इसके इस फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ होने के बाद भी शासन-प्रशासन और भाजपा मौन साधे हुए है। खैर बहुत जल्द ही इनके दर्जनों काले कारनामों और साम्राज्य का पर्दाफाश होगा और इसके गलत धंधे में सहयोग करने वाले कई सफेदपोश और वर्दीधारी भी बेनकाब होेंगे।

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आगरा के फर्जी डायरेक्टर ने बताया 10 लाख रुपये लेकर बांटे गए पद:

एमएसएमई के नाम से फर्जी संस्था बनाकर फर्जी तरीके से पूरे देश के प्रांतों में डायरेक्टर के पद बांटने वाले पूर्व सांसद हरिनारायण राजभर की पोल खोल चुकी है। इस मामले का पर्दाफाश करने वाले समाजिक कार्यकर्ता डॉ. अवधेश दीक्षित से बातचीत के दौरान आगरा के विनोद कुमार कुशवाहा ने अपनी पूरी आपबीती बताई और बताया कि मुझसे 10 लाख रुपये लेकर मुझे डायरेक्टर बनाया गया। बताया गया कि आपको कैबिनेट मंत्री के समान दर्जा मिलेगा और आपको गाड़ी, गनर और चैम्बर भी मिलेगा। इनकी बात से यह तो सिद्ध हो गया कि भारत सरकार के मंत्रालय के नाम पर करोड़ो रुपये हड़पे गए। इसकी जांच जरूर होनी चाहिए पर पूर्व सांसद भी भाजपा के हैं इसलिए शायद पार्टी आगे नहीं आ रही है।

एमएसएमई ने प्रेस नोट जारी कर इस संस्था को बताया फर्जी:

भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय ने आज ही 10 बजे के करीब एक प्रेस नोट जारी कर जनता को सचेत करते हुए लिखा कि एमएसएमई  एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल नाम की एमएसएमई से जुड़ी कोई संस्था नहीं है। प्रेस नोट में लिखा है ‘एमएसएमई मंत्रालय ने एमएसएमई निर्यात संवर्धन परिषद की अनधिकृत और द्वेषपूर्ण गतिविधियों के बारे में व्यापपक रूप से आम जनता को सतर्क किया है। एमएसएमई मंत्रालय के एक हिस्से के रूप में खुद को पेश करने वाले इस संगठन की दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों को मंत्रालय ने काफी गंभीरता से लिया है। मंत्रालय ने अपने नाम पर इस संगठन द्वारा नियुक्ति पत्र जारी करने में अपनी किसी भी भूमिका या अधिकार-पत्र देने से साफ इनकार किया है।

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भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय ने कहा है कि यह पाया गया है कि एमएसएमई निर्यात संवर्धन परिषद द्वारा ‘निदेशक’ के पद के लिए नियुक्ति पत्र जारी करने के संबंध में कुछ संदेश मीडिया और सोशल मीडिया में प्रसारित किए जा रहे हैं। यह भी पाया गया है कि यह संगठन एमएसएमई मंत्रालय के नाम का उपयोग कर रहा है। यह स्पष्ट किया जाता है कि भारत सरकार का एमएसएमई मंत्रालय किसी भी तरह से एमएसएमई निर्यात संवर्धन परिषद से संबद्ध नहीं है। इसके साथ ही एमएसएमई मंत्रालय ने इस परिषद से संबंधित किसी भी पद पर नियुक्ति या किसी भी पोस्टिंग को अधिकृत नहीं किया है। आम जनता को इस बारे में सूचित किया जाता है और इसके साथ ही इस तरह के संदेशों या ऐसे गलत तत्वों के बहकावे में न आने की सलाह दी जाती है।

वहीं एमएलसी लक्ष्मण आचार्य ने कहा है कि पार्टी और संगठन ने इस मामले को संज्ञान में ले लिया है। भाजपा काशी प्रांत के अध्यक्ष महेशचंद्र श्रीवास्तव ने भी इस संदर्भ में साफ-साफ कहा है कि इस प्रकरण की जांच की जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी। वैसे भारतीय जनता पार्टी पूरी पारदर्शिता के साथ चल रही है। इससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता है।