वाराणसी: कोरोना काल में अनिश्चय और अवसाद के जीवन की त्रासदी से गुजर रहे बनारसी

वाराणसी: कोरोना काल में अनिश्चय और अवसाद के जीवन की त्रासदी से गुजर रहे बनारसी

वाराणसी(रणभेरी): पंडित कमलापति त्रिपाठी फाउंडेशन के द्वारा आरम्भ वेब संवाद श्रृंखला की पहली कड़ी में शुक्रवार को पंडित कमलापति त्रिपाठी की जनसेवा को याद करने के साथ वाराणसी के वर्तमान हालात पर चिन्ता जताते हुये वक्ताओं ने कहा कि कोविड के वर्तमान संकट की चुनौती के दौर में लोग अनिश्चय एवं अवसाद के जीवन की त्रासदी से गुजर रहे हैं। काशी को प्रधानमंत्री जैसा शीर्ष सामर्थ्य का प्रतिनिधित्व प्राप्त है, लेकिन आम आदमी संरक्षक नेतृत्व के भरोसे के अभाव की अनुभूति जी रहा है। 

 

वक्ताओं ने कहा कि आज लोगों को समझ में ही नहीं आ रहा है कि इस संक्रमण कालीन समय में अपनी समस्याओं और पीड़ा को लेकर किस सर्व सुलभ नेतृत्व के पास जाय और उसका समाधान प्राप्त करे। कोरोना पीड़ितों के लिये सरकारी अस्पताल उपेक्षा और आशंका के केन्द्र बनते जा रहे हैं। खुद प्रशासन की मिजिस्ट्रेट स्तरीय जांच पड़ताल में इसकी पुष्टि की। समाचार लोगों को पढ़ने को मिलें, तो उनके भय की अनुभूति और घनी हो जाती है। चुनौती के बढ़ते दबाव में सरकारी स्वास्थ्य सेवायें जैसे चरमरा गई हैं। दूसरी ओर लोगों के समक्ष रोजी-रोटी का भयानक संकट खड़ा हुआ है।

स्थानीय शासन प्रशासन के नित  नये प्रयोग और तुगलकी फरमान  जनता के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। यह सब तब है  जब काशी के जनप्रतिनिधि के रूप में देश के प्रधानमंत्री स्वयं हैं और जहां का दौरा प्रदेश के मुख्यमंत्री महीने में एक बार जरूर करते हैं, बावजूद इसके  यहाँ समस्याओं का अंबार है और जनता परेशान  है। ऐसे में स्वर्गीय पंडित कमलापति त्रिपाठी जैसा नेतृत्व याद आता है, जिनसे आम आदमी भी सीधा मिलकर कभी समाधान पाता था।

कार्यक्रम विचार  मन्थन  की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश  कांग्रेस कमेटी के  के पूर्व  उपाध्यक्ष  विजय शंकर पाण्डेय ने की। वेब संगोष्ठी में उप्र कांग्रेस सूचना का अधिकार  प्रकोष्ठ के पूर्व चेयरमैन बैजनाथ सिंह, काशी  विद्यापीठ पत्रकारिता विभाग पूर्व प्रोफेसर अनिल उपाध्याय, पूर्व शहर अध्यक्ष विजय शंकर मेहता, छावनी परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह, भूपेन्द्र प्रताप सिंह, विनोद कुमार सिंह कल्लू, प्रमोद श्रीवास्तव, अनिल श्रीवास्तव अन्नू, पुनीत मिश्रा, विपिन मेहता, शुभम राय आदि  ने विचार रखे।