खौफजदा अफगानी नागरिक शरण के लिए बेकरार

खौफजदा अफगानी नागरिक शरण के लिए बेकरार

(रणभेरी): अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से स्थिति भयावह बनी हुई है। कल काबुल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अफगानिस्तान के लोगों की अफरातफरी को देखकर हर कोई सहम गया। ये सभी लोग मौत के खौफ से बचने के लिए बिना सामान लिए देश छोड़कर भाग रहे है। तालिबान ने अफगानिस्तान के राष्ट्रपति भवन पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया है। वहीं इस भगदड़ में हजारों अफगानी लोगों में से 600 से अधिक लोग अंतिम समय में अमेरिकी वायु सेना के परिवहन विमान में उड़ान भरने में सफल रहे।  

तालिबान के कब्जे से खौफजदा अफगानी नागरिक दिल्ली में नई जिंदगी की तलाश में हैं। अफगानिस्तान के बिगड़े हालात के बीच वह वापस अपने वतन लौटने को तैयार नहीं हैं।अफगानी नागरिक कि भारत में रहने के लिए वह जेल तक जाने को तैयार हैं। लेकिन अफगानिस्तान में वापस लौट कर नहीं जाएंगे, साथ उन लोगों को अफगानिस्तान में रह रहे अपने घर-परिवार और रिश्तेदारों की खैरियत की फिक्र भी उनको सता रही है।

अफगान नागरिकों ने भारत सरकार से गुहार लगाई है कि तालिबान के शिकंजे में फंसे अफगान नागरिकों (रिश्तेदारों) को महफूज जगह पहुंचाने का इंतजाम किया जाए। वही नई दिल्ली के लाजपत नगर स्थित कस्तूरबा कॉलोनी की गलियों में इन दिनों सुबह से अफगानिस्तान से पलायन करने वालों का तांता लगा है। खाने पीने और फलों की दुकानें पर अफगानिस्तान के मौजूदा हालात पर चर्चा के बीच रात बिताने के लिए कमरे की तलाश में जुटे रहे हैं। दवाई लेने के लिए केमिस्ट शॉप पर भी लोगों की भीड़ दिखी लेकिन तालिबान का जेहन में इतना खौफ था कि अधिकतर लोग कैमरे से दूरी बनाते नजर आए।

लोग इस कदर डर गए हैं कि जिस देश में महफूज जगह मिली, वहां से लौटना नहीं चाहते। बकौल इमरान, वतन नहीं लौटेंगे, चाहे पूरी उम्र भारतीय जेल में क्यों न रहना पड़े। अभी थोड़ी राहत यह है कि तीन महीने की वीजा अवधि का ढाई महीना बचा हुआ है। संभव है कि इस बीच हालात में सुधार आ जाए। देश से पलायन ही अफगानिस्तानी नागरिकों के लिए एकमात्र रास्ता है। अमराई और एहसानुल्लाह की वीजा अवधि अभी करीब दो महीने बची है। इनका कहना है कि अगर शांति कायम नहीं होती तो वह उसके बाद भी वापस नहीं लौटेंगे। कानूनी अड़चनों पर उनको उम्मीद है कि भारत सरकार मानवता के आधार पर उनको आगे भी रहने की इजाजत दे देगी।