पूर्व कैबिनेट मंत्री-सांसद प्रो रीता बहुगुणा जोशी अपने आवास पर स्वयं करती हैं पौधों की देखभाल

पूर्व कैबिनेट मंत्री-सांसद प्रो रीता बहुगुणा जोशी अपने आवास पर स्वयं करती हैं पौधों की देखभाल

पर्यावरण दिवस विशेष- संस्मरण उल्लेख

'रुको भैया कुछ लोग इंतज़ार कर रहे हैं'

प्रयागराज से सफर लखनऊ आवास की ओर सुबह 6 बजे तैयार होकर लखनऊ आवास पर 10 बजे पहुचते ही  जनता की भीड़ 'दीदी' से मिलने की। कही गुजारिश तो कही सिफारिश...ऊपर सीधी से चढ़ते ही सबसे अभिवादन, ...'सब लोग कैसे है?'...'अच्छे हैं!'...दीदी मेरा एक काम है....'रुको भैया 20 मिनट दो कुछ लोग हफ्ते भर से मेरा इंतज़ार कर रहे है।' सब इधर-उधर देखना शुरू कौन है जो इतने दिनों से इंतज़ार कर रहा..कोई न बोला ...

'दीदी' आगे बढ़कर बालकनी के पास गई..'कुछ दिन बाहर जाओ तो इस बेजुबानों का ध्यान ठीक से नही करते लोग'....(राजू को आवाज़ लगाई) 'सुनो पानी लाओ..और देखो जरा इस पौधे के तने से नीचे लग गयी मिट्टी, वहाँ से लेकर गमलों में डाल देते(थोड़ा गुस्से में)...। 'इतना नही ध्यान देते तुम लोग..जाओ पानी लाओ' ...। तभी खुद ही 'दीदी' बढ़ कर अंदर जाकर जो बर्तन हांथ में लगा पानी भर कर ले आयी, हांथ में छोटी चम्मच से ही गमले के पौधों से गुड़ाई करने लगी। एक गमले से दूसरे पौधे वाले गमले में मिट्टी लगाने लगी...। (राजू बोला डरते डरते) ..जी लाइये मैं कर दूंगा आप थक के आयी हैं। नाश्ता लगा दे रहा, आप पहले नाश्ता कर ले। 

दीदी- 'हटो करने दो मुझे, इतने दिन क्या कर रहे थे'...यह कहते हुए खुद से फिर गमलों को उठाना और सेट करना। कुछ पौधों के पीले पत्ते हुए थे उन्हें देख नाराज़ हुई, फिर जाकर जब 'दीदी' को लगा कि पौधों का बेहतर ख्याल खुद से कर लिया तब उनके चेहरे पर मुझे सुकून दिखा।

हांथ धोते हुए .. आयी, लोगो के बीच बैठी.. सभी लोग दीदी के इस कार्य को कब से निहार रहे थे, वहाँ बेसब्री से बैठे सबके चेहरे पर एक मद्धम खुशी। सभी एकसुर से जयकार लगाई ...'दीदी कि जय'। उन्होंने सबसे कहा-  'देखो मैं अपने पौधों का देखभाल आज से नही हमेशा से करती आ रही हूं। पौधों को कोई परेशानी मुझे अच्छा नही लगता, हरियाली मुझे पसंद है, बच्चो की तरह ही मानती हूं। 

'चुनाव के दौरान मैं महीनों तक नही आई थी, एक पौधा सुख गया था, मुझे बहुत तकलीफ हुई थी......आप सभी अपने यहाँ सिर्फ पौधे लगाकर भुला नही किया क,रो बल्कि उनकी देखभाल परिवार की सदस्यों जैसे किया करो..ठीक है' 

जी दीदी..जी दीदी( सबने हामी भरी)

दीदी राजू से- पानी तो पिलाओ सबको ..और मुझे भी दे देना, हां भाई अब बताओ सब लोग एक एक कर...' मैं गौर से देख रहा था..आदरणीय स्व हेमवती नंदन बहुगुणा जी की पौधों के बगल रखी मूर्ति...और उनकी प्रतिमूर्ति ..दोनों को।

धर्मेन्द्र त्रिपाठी की कलम से