यह कैसा खुमार, लोगों में चढ़ा घिबली का बुखार

लोग ओपनआई के चैट जीपीटी की मदद से अपनी तस्वीर को रीक्रिएट कर उसका घिबली फोटो खूब कर रहे शेयर
राहुल सावर्ण
वाराणसी (रणभेरी सं.)। सोशल मीडिया पर इन दिनों घिबली आर्ट एनिमेटेड फोटोज का जबर्दस्त ट्रेंड चल रहा है। आम लोग ही नहीं, बल्कि जानी-मानी हस्तियां भी फेसबुक पर ओपनआई के चैट जीपीटी की मदद से अपनी तस्वीर को रीक्रिएट कर उसका घिबली फोटो खूब शेयर कर रही हैं। अगर आपको लगता है कि एआई-जनरेटेड तस्वीरें सिर्फ मनोरंजन के लिए हैं, तो आप गलत हैं। जी हां, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी को हल्के में लेना घातक हो सकता है। 2022 व 2024 में एक कंपनी पर बिना अनुमति के सोशल मीडिया और न्यूज वेबसाइट्स से 3 अरब से अधिक तस्वीरें चुराने का आरोप लगा था। यह डेटा साइबर क्रिमिनल को बेचा गया था। बीएचयू के साइबर एक्सपर्ट मृत्युंजय सिंह ने घिबली की तस्वीरों से अलर्ट रहने की सलाह दी है। वह बताते हैं कि फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी का बाजार 2025 तक 5.73 बिलियन डॉलर और 2031 तक 14.55 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। किसी भी एआई प्लेटफॉर्म पर अपनी तस्वीरें अपलोड करने से पहले सतर्क रहना जरूरी है। कुछ साल पहले एक कंपनी पर बिना अनुमति के सोशल मीडिया और न्यूज वेबसाइट्स से 3 अरब से अधिक तस्वीरें चुराने का आरोप लगा था। इस घटना के कारण हजारों लोग पहचान चोरी और साइबर धोखाधड़ी के शिकार हुए थे.ज्यादातर फोटो एडिटर, गेम, यूटिलिटी एप्स के जरिए डाटा चोरी का मामला लगातार सामने आता है।
मेटा ने अपने यूजर्स की सेफ्टी को ध्यान में रखते हुए गूगल प्ले स्टोर और एपल स्टोर पर मौजूद इस तरह के 400 एप्स का पता लगाया। इन एप्स को यूज करने वाले यूजर के फेसबुक क्रेडेंशियल्स चोरी कर उनका इस्तेमाल गलत कामों में हो रहा था। घिबली एक पॉपुलर जापानी एनीमेशन स्टूडियो और एक खास एनीमेशन स्टाइल है। ये पूरी दुनिया में अपने यूनिक स्टाइल, अट्रैक्टिव कहानियों और डीप इमोशन के लिए जाना जाता है। घिबली शब्द का रियल मतलब है गर्म, तेज और शुष्क हवा, जो नॉर्मली सहारा रेगिस्तान में चलने वाली हवाओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है। घिबली स्टूडियो की शुरूआत 1985 में जापान के दो पॉपुलर फिल्म डायरेक्टर हयाओ मियाजाकी और इजरियो टाकहाता ने की थी। एथिकल हैंकर मृत्युंजय सिंह, एआई को हल्के में लेना घातक हो सकता है।
एआई से जुड़ा एक मामला सिगरा थाना क्षेत्र का था जहां एआई का यूज कर बनाई आपत्तिजनक तस्वीर सितंबर 2024 में एक युवती को अंजान नंबर से उनके मोबाइल पर आपत्तिजनक फोटो आती है। फोटो वायरल न करने के लिए ब्लैकमेल करने लगता है। वह तुरंत परिचित पुलिस आफिसर से संपर्क करती है तो पता चलता है कि साइबर क्रिमिनल हैं, जो सेल्फी स्पूफिंग के जरिए फोटो लेकर उसे एआई के इस्तेमाल से आपत्तिजनक तस्वीर में तब्दील कर देते हैं। युवती ने अंजान नंबर भी शेयर कर दिया। दूसरा मामला बड़ागांव क्षेत्र के खालीसपुर का था जहां अपराधियों ने फर्जी पुलिस इंस्पेक्टर बनकर कुसमुरा गांव निवासी एक व्यक्ति से बेटे को बचाने के नाम पर 1.65 लाख रुपए ठग लिए। एआई के सहारे बेटे की आवाज में पिता से बात भी की थी। पीड़ित ने एक दिन बाद मोबाइल नंबर के आधार पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था। ये दो केस एआई के दुरूपयोग से जुड़े हैं। मौजूदा समय में सबसे ज्यादा एआई का इस्तेमाल साइबर क्रिमिनल कर रहे हैं। पूर्व में ऐसी घटना सामने आ चुकी है। इसलिए अलर्ट रहने की जरूरत है।
एआई क्रिएशन लापरवाही पड़ सकती है भारी !
एथिकल हैकर मृत्युंजय सिंह के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टेक्नोलॉजी को हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है। किसी भी एआई प्लेटफॉर्म पर अपनी व्यक्तिगत तस्वीरें अपलोड करने से पहले सतर्क रहना बेहद जरूरी है। पिछले कुछ वर्षों में कई मामलों में देखा गया है कि कैसे एआई आधारित कंपनियां बिना अनुमति के यूजर्स के डेटा का गलत इस्तेमाल करती हैं।
डिजिटल पहचान सुरक्षित रखने के तरीके
- एआई ऐप्स पर अपनी व्यक्तिगत तस्वीरें अपलोड करने से बचें।
- सोशल मीडिया पर हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें साझा करने में सतर्कता बरतें।
- फेस अनलॉक की जगह मजबूत पासवर्ड या पिन का उपयोग करें।
- किसी भी अनजान ऐप को कैमरा और गैलरी का एक्सेस देने से पहले उसकी प्राइवेसी पॉलिसी जरूर पढ़ें।
- सरकार और टेक कंपनियों से एआई और फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी के दुरुपयोग पर सख्त कानून बनाने की मांग करें।
आपकी तस्वीरों से कोई और कमा रहा है मुनाफा !
अगर आपको लगता है कि एआई-जनरेटेड तस्वीरें सिर्फ मनोरंजन के लिए हैं, तो आपको दोबारा सोचने की जरूरत है। एआई कंपनियां इन इमेज को अपने फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम को प्रशिक्षित करने के लिए इस्तेमाल करती हैं। स्टाटिस्टा की रिपोर्ट के मुताबिक, फेशियल रिकॉग्निशन तक 5.73 बिलियन डॉलर और 2031 तक 14.55 बिलियन टेक्नोलॉजी का बाजार 2025 डॉलर तक पहुंच सकता है। बड़ी टेक कंपनियों, जैसे कि मेटा (फेसबुक) और गूगल, पर पहले भी आरोप लग चुके हैं कि वे यूजर्स की तस्वीरों को अपने एआई मॉडल्स को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल करती हैं। इसके अलावा, पिमआईज जैसी वेबसाइटें किसी भी तस्वीर को अपलोड कर उस व्यक्ति की पूरी डिजिटल पहचान ट्रैक कर सकती हैं। इससे स्टॉकिंग, ब्लैकमेलिंग और साइबर अपराध जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं। असल सवाल यह नहीं है कि एआई हमारे लिए कितना फायदेमंद है, बल्कि यह है कि हम इसका इस्तेमाल कितनी समझदारी से कर रहे हैं। अगली बार जब आप किसी एआई प्लेटफॉर्म पर अपनी तस्वीर अपलोड करने जा रहे हों, तो एक बार सोचें-कहीं यह आपके लिए सबसे बड़ा साइबर खतरा तो नहीं बन सकता?