काव्य-रचना

काव्य-रचना

   बिना बताये चले जाते हैं...   

कुछ अपने यूँ ही,
बिना बताये चले जाते हैं,
वो बाद मे,
बहुत याद आते हैं।

वो ऐसा क्यूँ,
कर जाते हैं,
खुद तो कभी नहीं,
पर अनजाने में,
बहुत सताते हैं।

कुछ अपने यूँ ही,
बिना बताये चले जाते हैं,
वो बाद मे,
बहुत याद आते हैं।

तुम्हारा मुस्कुराता चेहरा,
कैसे भूलेंगे हम,
तुम्हारी हर बात,
बेहतरीन है,
वो तो हार कर भी,
सबको जिताते हैं,
ऐसे लोग भला कैसे,
हार जाते हैं।

कुछ अपने यूँ ही,
बिना बताये चले जाते हैं,
वो बाद मे,
बहुत याद आते हैं।

अपना हो या कोई पराया,
सबके लिये ,
खड़े हो जाते हैं,
अनजानों के खुशी मे भी,
दिल खोल कर मुस्कुराते हैं,
ऐसे लोग आजकल,
कम ही मिल पाते हैं।

कुछ अपने यूँ ही,
बिना बताये चले जाते हैं,
वो बाद मे,
बहुत याद आते हैं।

तुम्हारे हर बात को,
जिंदा रखेंगें हम,
हो खुशी या गम,
दिन हो या रात,
रूकेंगे नहीं हम,
तुम्हारे जैसे लोग,
मोमबत्ती नही,
मशाल जलाते हैं।

कुछ अपने यूँ ही,
बिना बताये चले जाते हैं,
वो बाद मे,
बहुत याद आते हैं।

सत्येंद्र उर्मिला शर्मा