मूंदहुं आंखि कतहुं कछु नाहीं

 मूंदहुं आंखि कतहुं कछु नाहीं

बनारस में भी अंगद की तरह पैर जमा चुका है सट्टा माफिया आखिर बर्बादी के इस मंजर से क्यों अंजान है सूबे के मुखिया !

सट्टे की लत कर रही युवाओं की जिंदगियां बर्बाद, पुलिस की सांठगांठ से चलता है धंधा, आईडी-पासवर्ड से होता है पूरा खेल

वाराणसी (रणभेरी सं.)। शहर में क्रिकेट सट्टे का धंधा वर्षों से फल फूल रहा है। सट्टे की लत में कई युवाओं को जहां मौत को गले लगाना पड़ा तो कई लोगों को फुटपाथ पर लाकर खड़ा कर दिया। शानदार जिंदगी और शानौ शोकत से जीवन बसर करने वालों कुछ लोगों को सट्टे के शौक ने इस कदर बर्बाद कर दिया की सामाजिक अपमान से बचने के लिए कुछ ने तो दुनिया को ही अलविदा कह दिया। इस काले धंधे पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस की कार्रवाई भी मात्र औपचारिकता का हिस्सा बन कर रह जाती है। नतीजतन रोजाना एक परिवार इस काले धंधे का शिकार हो कर बर्बादी की राह धकेले जा रहे हैं। रसूखदारों की छत्रछाया में चल रहे सट्टे के काले कारोबार ने शहर के युवाओं को बर्बादी की कगार पर ला दिया है। इन लोगों ने ब्याज पर पैसे देकर युवाओं को अपने जाल में फंसा रखा है। अब उन्हें सट्टे की लत इस कदर लग गई है कि वे चाहकर भी इससे अलग नहीं हो पा रहे हैं। सट्टेबाजों ने पूरे शहर में इस तरह जाल बिछा रखा है कि उन्हें पल पल की जानकारी लग जाती है। इसके कर्ताधर्ता युवा वर्ग को पैसे देकर सट्टा खिलवाते हैं और समय से पैसे वापस न होने पर ब्याज की शुरूआत हो जाती है। इनके जाल में फंसे युवा समय पर पैसे न दे पाने पर इनकी जी हुजूरी में लग जाते हैं। कई युवाओं से ये लोग अपने घरों में काम लेते हैं।

आइपीएल मैच पर हाईटेक सट्टे का कारोबार चरम पर

शहर में इन दिनों आइपीएल मैच पर हाईटेक सट्टे का कारोबार चरम पर चल रहा है। चारों तरफ फैले बुकी अब वेबसाइट और एप के जरिए हर गेंद पर हार जीत के दांव लगवा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि सटोरियों के तार अन्य प्रदेशों एवं देशों में बैठे सट्टा माफियाओं से जुड़े हुए है। इन सट्टेबाजों को यूएई से सट्टा लिंक मिल रहा है। लिंक का पावर एडवांस रकम देकर बुकी ले लेते हैं। महज कुछ हजार रुपए में अपनी वेबसाइट बनाकर उसमें यूएई की लिंक शेयर कर देते हैं। अपना अलग प्लेटफॉर्म और एक्सचेंज बनाकर धड़ल्ले से क्रिकेट सट्टा चला रहे हैं। आॅनलाइन खेल के फेर में सटोरियों को दबोचना पुलिस के लिए भी मुश्किल हो रहा है। बीते महीने शुरू हुए आइपीएल क्रिकेट में सट्टा बाजार इन दिनों अपने चरम पर है। शहर में हर बाल पर लाखों रूपए के दांव लग रहे हैं। पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए शातिर बुकीज ने सट्टा खिलाने का तरीका बदल लिया है। पूरा खेल हाइटेक होकर आॅनलाइन हो गया है। वेबसाइट, एप और मोबाइल पर चल रहे आॅनलाइन सट्टा बुकी कारों में बैठकर और घूम-घूम कर यह खेल खिला रहे हैं। सूत्रों के अनुसार बड़े बुकियों ने तो अपने अलग-अलग नाम से आॅनलाइन एक्सचेंज बना लिए हैं। इसकी वेबसाइट और एप का पासवर्ड अपने नीचे छोटे बुुकी या प्लेयर (सट्टा खेलने वाले) को देते है। एडवांस रकम लेकर आॅनलाइन सट्टा खेलने की क्रेडिट देते है। अपना आनलाइन प्लेटफॉर्म बनाने के बाद बुुकी पूरा खेल मोबाइल फोन पर कर रहे हैं। मोबाइल पर आसानी से चल सकें इसलिए ये लोग कम जीबी का एप- वेबसाइट बनाते हैं।

शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं

सोनिया, सरैयां, भदैनी, सोनारपुरा, शिवाला, मंडुवाडीह समेत कई इलाकों में खुलेआम सट्ट चल रहा है। इससे स्थानीय लोगों को दिक्कतें होती है और इस संबंध में पुलिस से शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि पुलिस के संरक्षण में ही यह कारोबार चलता है। 

थाने जहां सट्टेबाजी ने पसार रखा है पैर

लोहता, मंडुवाडीह, भेलूपुर, शिवपुर, चितईपर, लंका सिगरा, चौक, दशाश्वमेध, चेतगंज, कोतवाली, आदमपुर, जैतपुरा, सारनाथ, बड़ागांव, लोहता, मंडुआडीह।

बेखबर हैं बनारस के सारे थानेदार !

सबसे बड़े आश्वर्य की बात यह है कि वाराणसी देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है जिसकी वजह से यहां देश की सभी खुफिया एजेंसियां हमेशा सक्रीय रहती है इसके बावजूद वाराणसी जैसे शहर में आज सट्टे का कारोबार अपने चरम पर है। सट्टे के इस खेल में शहर के नाबालिग बच्चों से लेकर बड़े-बड़े तक शामिल है। अब तो यह खेल पूरी तरह से प्रोफेशनल हो चला है। जहा विशेष आईडी पासवर्ड द्वारा इसे आॅपरेट किया जाता है और तो और बुकियों द्वारा सट्टेबाजों से एडवांस भी जमा कराए जाते हैं। सट्टेबाज पुलिस के पकड़ से दूर है। यह संभव नहीं कि इस बबार्दी के खेल की भनक स्थानीय थानेदारों को न ही। बावजूद इसके पुलिस और खुफिया विभाग आज तक किसी सट्टेबाजों तक नहीं पहुंच पाई है। सूत्रों की माने तो पुलिस के संरक्षण में ही इस बबार्दी के खेल की इबारत लिखी जा रही है।

अमीर बनने की चाहत में लुट रहे गरीब

शहर के सोनिया, लल्लापुरा व सुरजकुंड,नदेसर, सप्तसागर, सोनारपुरा, शिवाला, चितईपुर, लोहता, रोहनिया समेत कई क्षेत्रों में सुबह से ही खुलेआम सट्टा का कारोबार शुरू हो जाता है। पैसे देकर नंबर की बुकिंग कागजों पर होती है। नंबर खुलने पर पैसा भी आॅफलाइन मिलता है। बनारस में अवैध सट्टा से हर दिन दो करोड़ से अधिक का कारोबार होता है। इस संबंध में शिकायत भी होती है, लेकिन पुलिसिया कार्रवाई दिखती नहीं है। अमीर बनने की चाहत में लुट रहे गरीब सट्टा की कीमत कम होती है। लिहाजा अधिकांश गरीब लोग आसानी से धंधेबाजों के जाल में फंस जा रहे हैं और अमीर बनने की फिराक में लोग अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई को गंवा देते हैं। अब अवैध लॉटरी का धंधा इस तरह से फल-फूल रहा है कि मानो धंधेबाज कोई दुकान चला रहा हो। इस गोरखधंधे के जरिए कई धंधेबाज करोड़पति बन चुके हैं। जबकि सट्टा खरीदने वाले लोग अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई खो रहे हैं। छह रुपए देने पर 50 और 12 रुपए देने पर 100 रुपए मिलते हैं, लेकिन यह पैसे तभी मिलता है, जिस नंबर पर पैसा लगाया और वह नंबर खुल जाता है तब. इन जगहों पर चल रहा सट्टा बाजार एक दिन में अमीर बनने की चाहत खासकर स्ट्रीट वेंडर, आॅटो चालक, फुटपाथ दुकानदार समेत आदि ऐसे तबकों में होती है। सरैया पुलिस चौकी से चंद कदम दूर एक कटरे में हर दिन सट्टा का बाजार सजता है। सुबह होते ही लोगों की जमघट लगनी शुरू हो जाती है। इसी तरह सोनिया पोखरा के सामने और पीछे गली में, गुजराती गली के सामने, पानी टंकी के आसपास कई गलियों के कई घरों में धड़ल्ले से लॉटरी का धंधा चल रहा है।

 इसी तरह भदैनी, सोनारपुरा, शिवाला, पांडेयहवेली की गलियों में यह अवैध धंधा तेजी से फलफूल रहा है। बड़े लोग वाट्सएप से लगाते हैं। पैसा सट्टा का अवैध कारोबार कागज के साथ वाट्सएप पर भी चलता है। छोटे तबके और कम पढ़े लिखे लोग मौके पर जाकर पैसा लगाते हैं, लेकिन बड़े लोग लोकलाज के डर से वाट्सएप के जरिए नंबर लगाते हैं और पेमेंट आॅनलाइन कर स्क्रीन शॉट भेजते हैं। नंबर खुलने पर आनलाइन पेमेंट भी हो जाता है। मांगने पर सट्टा बेचने वाले आसानी से अपना वाट्सएप नंबर दे देते हैं। इस पूरे खेल के पीछे सफेदपोश लोग शामिल हैं। जिनके संरक्षण में यह गोरखधंधा चल रहा है, जो पर्दे के पीछे से पूंजी लगाते हैं, बिना रोक-टोक के धंधेबाजों का धंधा चले इसकी व्यवस्था करते हैं।