कार्तिक में दीपदान से होती है आरोग्य-सौभाग्य की प्राप्ति

कार्तिक में दीपदान से होती है आरोग्य-सौभाग्य की प्राप्ति
  • भगवान विष्णु एवं देवी लक्ष्मी को समर्पित है कार्तिक मास
  • आज से शुरू होकर 24 नवम्बर तक रहेगा कार्तिक मास
  • द्वादश मास में सबसे खास है कार्तिक मास, होगा तुलसी विवाह

राधेश्याम कमल

वाराणसी (रणभेरी): हिंदू सनातन धर्म में धार्मिक एवं पौराणिक मान्यता के अनुसार कार्तिक मास का द्वादश मास में सर्वश्रेष्ठ मास माना गया है। यह मास भगवान विष्णु एवं भगवती लक्ष्मीजी को समर्पित है। जिसमें इनकी पूजा-अर्चना की विशेष महिमा है। कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन देवता जागृत होते हैं। कार्तिक मास में स्नान-दान-देव अर्चना की विशेष महत्व है। कार्तिक मास को अत्यन्त पावन मास की उपाधि दी गई है। हिंदू धर्म में उत्सव की श्रृंखला इसी मास प्रारंभ होती है। इस बार कार्तिक मास के धार्मिक-यम-नियम-व्रत-संयम आदि 27 अक्टूबर मंगलवार से शुरू होकर कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा 24 नवंबर तक रहेंगे।

प्रख्यात ज्योतिषविद् पं. विमल जैन ने बताया कि शरद पूर्णिमा से ही भगवती श्रीलक्ष्मी जी की महिमा में उनकी आराधना के साथ दीपदान एवं धार्मिक अनुष्ठान प्रारंभ हो जाते हैं। शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि कार्तिक मास के समान कोई दूसरा मास नहीं है। सतयुग के समान कोई युग नहीं है। वेद के समान कोई शास्त्र नहीं है और गंगा के समान कोई तीर्थ नहीं है। स्कंद पुराण के अनुसार यह मास लक्ष्मी प्रदाता, सद्बुद्धिदायक एवं आरोग्य प्रदायक माना गया है। वर्ष के द्वादश मास में कार्तिक मास को ही धर्म-काम और मोक्ष को देने वाला माना गया है।

कार्तिक में दीपदान से होती है आरोग्य-सौभाग्य की प्राप्ति

कार्तिक मास में तुलसीजी एवं पीपल वृक्ष की पूजा की जाती है। इस मास में यमदेव को प्रसन्न करने के लिए आकाशदीप प्रज्जवलित किये जाते हैं। कार्तिक मास में एक माह तक आंवले के वृक्ष का सिंचन एवं पूजन करना फलदायी माना गया है। मास पर्यन्त भगवान विष्णु को आंवला अर्पित करके उनका पूजन करने पर लक्ष्मीजी की प्राप्ति होती है। ज्योतिषविद् पं. विमल जैन बताते हैं कि काला तिल एवं आंवले का चूर्ण लगा कर स्नान करने से समस्त पापों का शमन होता है।

इस मास में नियम पूर्वक संकल्प के साथ व्रत रख कर गंगा स्नान के पश्चात दान करने से तीर्थयात्रा के समान फल की प्राप्ति होती है। कार्तिक मास में स्नान-दान एवं पुण्य करने की काफी महिमा है। इस मास में सूर्य दक्षिणायन होने से असुरिकाल माना जाता हैै। धर्मशास्त्रों के अनुसार इस मास में स्नान-ध्यान करके व्रत रख कर भगवान विष्णु की पूजा करना विशेष पुण्य फलदायी रहता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक श्रीकृष्ण-राधा का पूजन-अर्चन करने से प्रभु की असीम कृपा मिलती है। साथ ही जीवन में सुख समृद्धि व खुशहाली का मार्ग प्रशस्त होता है।

कार्तिक मास में क्या करेें

ज्योतिषविद् पं. विमल जैन ने बताया कि कार्तिक मास में ब्रह्मचर्य नियम का पालन करना चाहिए। इस मास में जमीन पर शयन करना चाहिए। ब्रह्म मुहुर्त में (सूर्योदय से पूर्व) उठ कर स्नान एवं ध्यान करना चाहिए। गंगा में कमर तक जल में खड़े होकर पूर्ण स्नान करना चाहिए। सात्विक भोजन करना चाहिए। भगवान विष्णु की आराधना करनी चाहिए। पीपल वृक्ष एवं तुलसीजी की धूप-दीप से पूजा करनी चाहिए।

Share this news

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *