वाराणसी (रणभेरी): राष्ट्रीय पोषण माह-2026 के शुभारंभ के लिए बुधवार को रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम के दौरान शहर में अचानक हुई तेज बारिश ने नगर निगम की जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम समाप्त होने के बाद जैसे ही उनका काफिला रुद्राक्ष से रवाना हुआ और सर्किट हाउस की ओर बढ़ा, कुछ देर बाद बारिश थम गई। बारिश रुकने के बावजूद कन्वेंशन सेंटर के मुख्य द्वार के बाहर पानी जमा रहा।
कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पहुंची थीं। मुख्यमंत्री के रवाना होने के बाद जब करीब 1100 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता परिसर से बाहर निकलीं तो उन्हें मुख्य गेट के सामने जमा पानी से होकर गुजरना पड़ा। कार्यक्रम स्थल के ठीक बगल में नगर निगम का प्रधान कार्यालय होने के बावजूद जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए मौके पर निगम के अधिकारी या कर्मचारी नजर नहीं आए।
मुख्य द्वार पर जमा पानी से होकर निकलीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता
दोपहर बाद हुई तेज बारिश ने रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर के बाहर की तस्वीर बदल दी। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के बाहर निकलने का सिलसिला शुरू हुआ तो मुख्य द्वार के पास पानी जमा मिला। महिलाओं को इसी पानी के बीच से निकलकर अपने वाहनों और निर्धारित गंतव्य की ओर जाना पड़ा।

स्थानीय लोगों का कहना था कि वीआईपी कार्यक्रम के बावजूद जलनिकासी की व्यवस्था समय रहते दुरुस्त नहीं की गई। जब कार्यक्रम में शामिल लोगों को ही जलभराव का सामना करना पड़ा तो शहर के दूसरे हिस्सों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
पिपलानी कटरा में करीब तीन फीट तक पानी
तेज बारिश का असर शहर के कई प्रमुख इलाकों में देखने को मिला। पिपलानी कटरा क्षेत्र में पानी करीब तीन फीट तक भर गया। सड़क पर इतना पानी जमा होने के कारण राहगीरों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। मंदिर से लौट रहे श्रद्धालु भी पानी के बीच से होकर गुजरते दिखाई दिए। जलभराव वाले रास्ते पर लोगों को सुरक्षित तरीके से निकालने के लिए पुलिसकर्मी भी मौके पर मौजूद रहे। चौकी प्रभारी पानी के बीच खड़े होकर राहगीरों को उचित दिशा से निकलने की सलाह देते नजर आए।

रेवड़ी तालाब में दुकानों तक पहुंचा पानी
बारिश के कारण रेवड़ी तालाब क्षेत्र में भी जलभराव की स्थिति बन गई। सड़क पर जमा पानी धीरे-धीरे दुकानों की ओर बढ़ने लगा। दुकानदारों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि बारिश से पहले नालों की सफाई और जलनिकासी की व्यवस्था को लेकर दावे तो किए जाते हैं, लेकिन तेज बारिश होते ही हकीकत सामने आ जाती है। स्थानीय लोगों के मुताबिक हर वर्ष बारिश के दौरान इन इलाकों में पानी भरता है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

कई इलाकों में सड़कें बनीं जलमग्न
भारी बारिश का असर केवल रुद्राक्ष और पिपलानी कटरा तक सीमित नहीं रहा। आजाद पार्क, औसानगंज चौमुहानी, जैतपुरा मार्ग, नाटी इमली, लंका और सुंदरपुर समेत शहर के कई हिस्सों में जलभराव की शिकायत सामने आई। कई स्थानों पर सड़कें पानी में डूब गईं और लोगों को आवागमन में परेशानी हुई। कुछ जगह पुलिसकर्मी जलभराव वाले रास्तों पर लोगों को संभलकर निकलने की सलाह देते दिखाई दिए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जलनिकासी की समस्या सामने आने के बावजूद कई स्थानों पर नगर निगम की टीम मौके पर नजर नहीं आई।
बारिश ने फिर खड़े किए जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल
वाराणसी में मानसून के दौरान जलभराव कोई नई समस्या नहीं है। हर वर्ष तेज बारिश के बाद शहर के अलग-अलग हिस्सों में पानी जमा होने से यातायात प्रभावित होता है और दुकानदारों तथा राहगीरों को परेशानी झेलनी पड़ती है। इस बार भी भारी बारिश के बाद ऐसी ही तस्वीर सामने आई।
खास बात यह रही कि नगर निगम के प्रधान कार्यालय के समीप स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर के मुख्य द्वार पर भी जलभराव हो गया। इससे नगर निगम की तैयारियों और जलनिकासी व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रमुख स्थानों पर ही बारिश के बाद पानी की निकासी नहीं हो पा रही है तो शहर के दूसरे इलाकों में व्यवस्था की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। फिलहाल बारिश थमने के बाद कई इलाकों में पानी धीरे-धीरे कम हुआ, लेकिन जलभराव ने एक बार फिर शहर की ड्रेनेज व्यवस्था और बारिश से पहले की तैयारियों पर बहस छेड़ दी है।
