- किस्मत चमकाने के फेर में कंगाल हो रहा मध्यमवर्ग, 12 रुपये लगाकर 100 रुपये जीतने का लालच
- हर 15 मिनट में खुलता नंबर, छोटी रकम के खेल में बड़ी कमाई का दावा
- कोतवाली से कैंट, सिगरा, भेलूपुर, रोहनिया और पांडेयपुर तक चर्चा में ऑनलाइन जुए का नेटवर्क
- पुलिस की कार्रवाई स्थानीय स्तर तक सीमित रहने से नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की चुनौती
वाराणसी (रणभेरी)। मेहनत की कमाई से घर चलाने का सपना देखने वाले मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के लिए चंद मिनटों में पैसा दोगुना करने का लालच भारी पड़ता जा रहा है। मोबाइल पर नंबर लगाने और किस्मत आजमाने के नाम पर चर्चित हो रही ‘भाग्यलक्ष्मी लॉटरी’ को लेकर शहर में सवाल उठने लगे हैं। दावा है कि महज 12 रुपये लगाकर 100 रुपये तक जीतने का मौका मिलता है और हर 15 मिनट में नया नंबर खुलता है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर इस खेल का असली संचालक कौन है और इससे कमाई किसकी हो रही है? छोटी रकम से शुरू होने वाला यह खेल कहीं लोगों को आर्थिक बर्बादी की ओर तो नहीं धकेल रहा?
भाग्यलक्ष्मी के नाम पर चल रहे इस खेल में कम पैसे लगाकर बड़ा इनाम जीतने का सपना दिखाया जाता है। शुरुआत में मामूली रकम लगाने वाले लोग धीरे-धीरे बार-बार दांव लगाने लगते हैं। एक बार हारने के बाद नुकसान की भरपाई करने की उम्मीद उन्हें फिर पैसा लगाने के लिए प्रेरित करती है। यही सिलसिला कई लोगों की रोजाना की कमाई को निगल जाता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए इसका असर और गंभीर हो सकता है। घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और जरूरी जरूरतों के लिए रखी रकम भी इस चक्कर में गंवाने का खतरा रहता है। हालांकि, कितने लोग इससे प्रभावित हुए हैं, इसका आधिकारिक आंकड़ा सामने आना जरूरी है।
शहर के कोतवाली, कैंट, सिगरा, भेलूपुर, लल्लापुरा, रोहनिया और पांडेयपुर समेत विभिन्न इलाकों में इस तरह के खेल की चर्चा है। आरोप है कि कहीं चाय की दुकानों की आड़ में तो कहीं घरों और खुले स्थानों पर मोबाइल के जरिए नंबर लगाने का खेल संचालित किया जाता है। स्थानीय स्तर पर कुछ लोग खिलाड़ियों से रकम जुटाने और ऑनलाइन माध्यम से भुगतान कराने में भूमिका निभाते हैं। पुलिस की छापेमारी में जुआ खेलने के आरोप में लोगों की गिरफ्तारी और मोबाइल व नकदी की बरामदगी के मामले सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि, अलग-अलग मामलों में बरामदगी और आरोपों की पुष्टि संबंधित पुलिस रिकॉर्ड से होना जरूरी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि कार्रवाई के बाद भी इस तरह के खेल पर प्रभावी अंकुश क्यों नहीं लग पा रहा है?
स्थानीय खिलाड़ी गिरफ्त में, असली संचालक कौन?
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल ऑनलाइन मंच के वास्तविक संचालकों की पहचान का है। व्हाट्सएप समूहों के जरिए लिंक साझा करने, नकदी लेने और डिजिटल भुगतान कराने वाले स्थानीय लोगों तक कार्रवाई सीमित रह जाने पर बड़े नेटवर्क की जांच अधूरी रह सकती है। संबंधित वेबसाइट या ऐप किसके नियंत्रण में है, पैसा किन खातों में पहुंचता है और नंबरों के परिणाम किस आधार पर तय होते हैं, इसकी पड़ताल जरूरी है। साथ ही यह भी जांचना होगा कि संबंधित मंच किसी वैध अनुमति के तहत संचालित है या नहीं। बिना पर्याप्त प्रमाण के किसी वेबसाइट को फर्जी या किसी व्यक्ति को ठग घोषित करना उचित नहीं होगा। पुलिस और साइबर जांच एजेंसियों को डिजिटल साक्ष्य, बैंक खातों, भुगतान के माध्यमों और धन के लेन-देन की कड़ियों की जांच करनी चाहिए। लोगों को भी अनधिकृत ऑनलाइन लॉटरी और जुए के लालच से बचना होगा। किस्मत चमकाने के नाम पर कमाई गंवाने से बेहतर है मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखना। सवाल सिर्फ खिलाड़ियों की गिरफ्तारी का नहीं, बल्कि उस पूरे तंत्र तक पहुंचने का है, जो लोगों की उम्मीदों को कमाई का जरिया बना रहा है।
फड़ से 96,500 और तलाशी में 48,900 रुपये बरामद, ताश की नौ नई गड्डियां भी मिलीं
कैंट थाना पुलिस और एसओजी-2 की संयुक्त टीम ने सोमवार को ऑपरेशन चक्रव्यूह के तहत नदेसर स्थित कम्फर्ट इन होटल के पास एक खाली प्लॉट में छापेमारी कर जुआ खेल रहे 15 लोगों को गिरफ्तार किया। मौके से कुल 1,45,400 रुपये नकद बरामद किए गए। पुलिस ने ताश के 52 खुले पत्तों के साथ नौ नई गड्डियां भी कब्जे में ली हैं।
पुलिस के अनुसार, 26 अक्टूबर को मुखबिर से सूचना मिली कि होटल के पास खाली प्लॉट में कुछ लोग हार-जीत की बाजी लगाकर जुआ खेल रहे हैं। सूचना के आधार पर संयुक्त टीम ने दोपहर करीब तीन बजे मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और 15 लोगों को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान जुए की फड़ से 96,500 रुपये और पकड़े गए लोगों के पास से 48,900 रुपये बरामद हुए। इस तरह कुल बरामदगी 1,45,400 रुपये की रही। गिरफ्तार किए गए लोग वाराणसी के कैंट, कोतवाली, लालपुर-पांडेयपुर, चेतगंज और मिर्जामुराद थाना क्षेत्रों के अलावा गाजीपुर जिले के निवासी बताए गए हैं। पुलिस ने कैंट थाने में जुआ अधिनियम की धारा 13 के तहत मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
