वाराणसी में मायावती का दुर्गा अवतार! सिंह पर सवार अष्टभुजाधारी रूप में लगा पोस्टर, सपा MLC के बैनर के ऊपर दिखा होर्डिंग

वाराणसी में मायावती का दुर्गा अवतार! सिंह पर सवार अष्टभुजाधारी रूप में लगा पोस्टर, सपा MLC के बैनर के ऊपर दिखा होर्डिंग

वाराणसी (रणभेरी): जिला मुख्यालय पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को मां दुर्गा के स्वरूप में दर्शाने वाला पोस्टर चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय नेता आशुतोष पाठक की ओर से लगवाए गए इस पोस्टर में मायावती को सिंह पर सवार अष्टभुजाधारी देवी के रूप में दिखाया गया है। इसके माध्यम से उन्हें एक बार फिर उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने की इच्छा जाहिर की गई है।

आठ हाथों में अलग-अलग प्रतीक

जिला मुख्यालय परिसर में एक खंभे पर लगे बड़े होर्डिंग में मायावती को सिंह पर सवार दिखाया गया है। उनके आठ हाथों में अलग-अलग प्रतीक दर्शाए गए हैं। इनमें भारतीय संविधान, न्याय का तराजू, शिक्षा की पुस्तकें और मीडिया का माइक प्रमुख हैं। पोस्टर में संविधान, न्याय, मीडिया, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग जैसे छह प्रमुख क्षेत्रों को भी रेखांकित किया गया है। इनके जरिए प्रदेश को साफ, सुरक्षित और शिक्षित बनाने का संदेश देने का प्रयास किया गया है।

मायावती को मुख्यमंत्री बनाने की जताई इच्छा

होर्डिंग के निचले हिस्से में पोस्टर लगवाने वाले आशुतोष पाठक की तस्वीर हाथ जोड़कर दिखाई गई है। पोस्टर पर लिखा है, ‘मैया मायावती जी को उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनाने की इच्छा, उत्तर प्रदेश को साफ, सुरक्षित और शिक्षित बनाने की इच्छा।’ इस संदेश के जरिए मायावती के प्रति समर्थन जताने के साथ ही उन्हें दोबारा प्रदेश की सत्ता में लाने की आकांक्षा जाहिर की गई है।

सपा एमएलसी के बैनर के ऊपर लगा पोस्टर

जिला मुख्यालय पर इस पोस्टर के ठीक ऊपर समाजवादी पार्टी (सपा) के विधान परिषद सदस्य आशुतोष सिन्हा का बैनर भी लगा हुआ है। ऐसे में अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं के बैनर और पोस्टर एक ही स्थान पर दिखाई दे रहे हैं।

मायावती को देवी के स्वरूप में प्रस्तुत करने वाले इस पोस्टर ने राजनीतिक हलकों में चर्चा को जन्म दिया है। इसे बसपा समर्थक की ओर से मायावती के समर्थन में संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, राजनीतिक प्रचार में धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल को लेकर भी बहस की गुंजाइश बन गई है।

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