काव्य रचना

काव्य रचना

      या ऐसे ही बोल दूँ        

अपने दिल की बात किससे कहूँ? 
कोई सुनने वाला है क्या??
या ऐसे ही बोल दूँ।
या ऐसे ही बोल दूँ। 

दिल में बहुत दर्द  हैं, 
हाँ,मन का शब्द मिलता नहीं,
अनजाने से इस बागवानी में,
मन का फूल खिलता नहीं।

अपने पराए के द्वंद में ,
हर पल लड़ रहा सत्य है, 
अपने पराए के द्वंद में,
हर पल लड़ रहा सत्य  है।

किस-किस से युद्ध करूँ, 
किस-किस से युद्ध करूँ,  
किस-किस का संघार करूँ,
सब तो अपने जैसे दिख रहे हैं,
हांँ! कट्टर दुश्मन कोई मिलता नहीं।

शूल पथ सा जीवन डगर है,
निर्जीव पत्थरों की भरमार है,
खुलकर स्वांस ले सकता नहीं,
अंगारों की भरमार है,
माथे चढ़ाऊं नमन कर लूँ,
ऐसा कोई अनमोल पत्थर हाँ, 
शिवलिंग कोई मिलता नहीं।

रिश्ते नाते खोखले से है,
गृहस्थ जीवन बेमानी लगे,
अवतार लेने वाला वो प्रभु,
हर जन्म में इंसानी लगे,
संदेश जो वो देना चाहते थे,
शायद,वो दे पाए नहीं,
जिसके राह पर चलकर निरंतर,
भवसागर प्राप्त कर ले तू सत्य, 
ऐसा कोई अवतार मिलता नहीं।

सत्येंद्र उर्मिला शर्मा