वाराणसी (रणभेरी): संत शिरोमणि गुरु रविदास की 650वीं जयंती को भारतीय जनता पार्टी इस बार देशव्यापी अभियान के रूप में मनाने जा रही है। पार्टी ने निर्णय लिया है कि आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) से लेकर माघी पूर्णिमा (1 फरवरी) तक पूरे देश में संत रविदास के जीवन, उनके विचारों और सामाजिक समरसता के संदेश को केंद्र में रखकर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस अभियान की शुरुआत उनकी जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर (वाराणसी) से होगी।
कार्यक्रम की सबसे प्रमुख विशेषता संत रविदास की जन्मस्थली की पवित्र मिट्टी को 131 कलशों में भरकर उत्तर प्रदेश सहित देश के 27 राज्यों और भाजपा के विभिन्न संगठनात्मक क्षेत्रों तक पहुंचाना है। इन कलशों का संबंधित स्थानों पर विधिवत पूजन होगा और संत रविदास के समानता, मानवता और सामाजिक सौहार्द के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

28 और 29 जुलाई को वाराणसी में रहेगा मुख्य आयोजन
जयंती वर्ष का औपचारिक शुभारंभ 28 और 29 जुलाई को वाराणसी में होगा। 28 जुलाई को देश के अलग-अलग राज्यों से संत समाज और भाजपा कार्यकर्ताओं की 131 टोलियां सीर गोवर्धनपुर स्थित संत रविदास जन्मस्थली पहुंचेंगी। यहां जन्मभूमि की पवित्र मिट्टी को कलशों में भरा जाएगा।
इसके अगले दिन 29 जुलाई (गुरु पूर्णिमा) को विशेष धार्मिक एवं सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित होगा। इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व, प्रदेश सरकार के वरिष्ठ प्रतिनिधि, संत समाज और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल होंगे। जन्मस्थली पर 131 कलशों का पूजन एवं आरती की जाएगी, जिसके बाद विशाल जनसभा का आयोजन प्रस्तावित है।

30 जुलाई से देशभर के लिए रवाना होंगे कलश
30 जुलाई को सभी 131 कलश विशेष वाहनों के माध्यम से अपने-अपने गंतव्य के लिए रवाना किए जाएंगे। इनमें उत्तर प्रदेश के संगठनात्मक जिलों के अलावा देश के विभिन्न राज्यों और भाजपा के संगठनात्मक क्षेत्रों तक मिट्टी पहुंचाई जाएगी। वहां स्थानीय स्तर पर धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम आयोजित कर संत रविदास के विचारों का प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
गांव-बस्तियों तक पहुंचेगा सामाजिक समरसता का संदेश
भाजपा का कहना है कि यह अभियान केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे सामाजिक जागरूकता और समरसता के व्यापक अभियान के रूप में चलाया जाएगा। जन्मस्थली की मिट्टी गांवों, कस्बों, मंडलों और बस्तियों तक पहुंचाई जाएगी। स्थानीय स्तर पर कलश पूजन, संत रविदास के जीवन पर गोष्ठियां, सामाजिक संवाद और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
राष्ट्रीय स्तर पर बनाई गई कार्ययोजना
भाजपा अनुसूचित मोर्चा की ओर से इस अभियान के लिए विस्तृत कार्यक्रम तैयार किया गया है। इसके तहत 23 जुलाई को लखनऊ में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित होगी। इसके बाद 25 से 27 जुलाई तक प्रदेश के सभी जिलों में कार्यशालाएं आयोजित कर स्थानीय इकाइयों को जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी और कार्यक्रमों की अंतिम रूपरेखा तय की जाएगी।
वाराणसी में हुई तैयारियों की समीक्षा
कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री एवं सांसद तरुण चुग ने वाराणसी में जनप्रतिनिधियों और पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में आयोजन की रूपरेखा, कलश यात्रा, संत समाज की भागीदारी और विभिन्न राज्यों से आने वाले प्रतिनिधिमंडलों की व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई।
उन्होंने कहा कि संत रविदास का जीवन सामाजिक समरसता, समानता और मानवता का प्रतीक रहा है। उनके विचार किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत हैं। जन्मस्थली की मिट्टी को देशभर तक पहुंचाने का उद्देश्य लोगों को उनके जीवन-दर्शन और सामाजिक संदेश से जोड़ना है।
छह माह तक चलेंगे विविध कार्यक्रम
भाजपा के अनुसार जयंती वर्ष के दौरान देशभर में संत रविदास के विचारों पर आधारित संगोष्ठियां, विचार गोष्ठियां, सामाजिक समरसता संवाद, सांस्कृतिक कार्यक्रम, संत सम्मेलन और जनजागरण अभियान आयोजित किए जाएंगे। पार्टी का लक्ष्य संत रविदास के संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना है।
सर्किट हाउस में हुई रणनीतिक बैठक
वाराणसी के सर्किट हाउस सभागार में भी आयोजन की तैयारियों को लेकर वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों की बैठक हुई। इसमें संगठन और सरकार से जुड़े कई वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में कार्यक्रमों के सफल संचालन, विभिन्न समितियों के गठन, संत समाज के स्वागत, सुरक्षा व्यवस्था और कलश यात्रा के संचालन पर विस्तार से चर्चा की गई।
पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि संत रविदास की 650वीं जयंती वर्ष का यह आयोजन केवल स्मृति कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि सामाजिक समरसता, समानता और मानवता के उनके संदेश को देश के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का एक व्यापक जनअभियान बनेगा।
