वाराणसी (रणभेरी): UGC की गाइडलाइन वापस लेने और आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर वाराणसी के शास्त्रीघाट पर 29 अगस्त से चल रहा अनिश्चितकालीन धरना रविवार को आठवें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों ने अब आंदोलन को और व्यापक करने के संकेत दिए हैं। धरना स्थल पर रविवार को महापंचायत बुलाई गई, जिसमें विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। आंदोलनकारियों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार की ओर से सकारात्मक पहल नहीं होती, तब तक धरना जारी रहेगा। उन्होंने सरकार से बातचीत के लिए प्रतिनिधि भेजने की अपील भी की।
‘UGC गाइडलाइन पूरी तरह वापस हो’
आंदोलनकारी गौतम मिश्रा ने बताया कि 29 अगस्त से शास्त्रीघाट पर अनिश्चितकालीन धरना चल रहा है। उन्होंने दावा किया कि पूर्वांचल और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से लोग आंदोलन से जुड़ रहे हैं। गौतम मिश्रा के मुताबिक आंदोलन की प्रमुख मांग UGC की गाइडलाइन को वापस लेना और आरक्षण व्यवस्था में सुधार करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि गाइडलाइन में सवर्ण वर्ग को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिससे समाज में भेदभाव बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि नए बिल में सवर्णों को लेकर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। उनका कहना था कि किसी भी वर्ग को जन्म के आधार पर किसी विशेष पहचान से जोड़ना उचित नहीं है।
जाति नहीं, आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग
आंदोलनकारियों ने आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग भी उठाई। गौतम मिश्रा ने कहा कि आरक्षण का लाभ आर्थिक आधार पर दिया जाना चाहिए। उनके अनुसार किसी भी जाति और धर्म के आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति को इसका लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में आर्थिक असमानता बढ़ रही है। ऐसे में आरक्षण व्यवस्था का लाभ उन लोगों तक पहुंचना चाहिए, जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है।

‘यह सिर्फ सवर्णों का नहीं, 36 बिरादरी का आंदोलन’
करणी सेना के पूर्वांचल प्रभारी अविनाश मिश्रा राय ने कहा कि यह आंदोलन केवल सवर्ण समाज का नहीं, बल्कि 36 बिरादरी का आंदोलन है। उन्होंने बताया कि आंदोलनकारियों की तीन प्रमुख मांगें हैं—UGC गाइडलाइन को वापस लेना, आरक्षण व्यवस्था में सुधार और SC-ST कानून में संशोधन। अविनाश मिश्रा राय ने कहा कि विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की पहचान उनकी जाति से नहीं, बल्कि विद्यार्थी के रूप में होनी चाहिए। उनका आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था से विद्यार्थियों के बीच दूरी बढ़ सकती है। उन्होंने आरक्षण के लाभ को जरूरतमंद लोगों तक सीमित करने की मांग करते हुए कहा कि सक्षम लोगों को आरक्षण का लाभ मिलने की व्यवस्था पर भी पुनर्विचार होना चाहिए।
SC-ST कानून खत्म करने की मांग नहीं, बदलाव की बात: वकील
जिला एवं सत्र न्यायालय वाराणसी से जुड़े अधिवक्ता विवेक सिंह ने SC-ST कानून में बदलाव की मांग रखी। उन्होंने कहा कि कानून खत्म करने की मांग नहीं है, लेकिन गलत मुकदमे दर्ज होने की स्थिति में सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की व्यवस्था होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अदालत में काम करने के दौरान ऐसे मामले सामने आते हैं, जिनमें कानून के दुरुपयोग के आरोप लगाए जाते हैं। इसलिए शिकायतों की जांच की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने की जरूरत है।
‘सरकार से संवाद चाहते हैं, टकराव नहीं’
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि वे सरकार के खिलाफ टकराव नहीं चाहते। उनका कहना है कि सरकार की ओर से कोई प्रतिनिधि आंदोलन स्थल पर आए और उनकी मांगों को सुने। उन्होंने कहा कि बातचीत से समाधान निकलता है तो आंदोलन समाप्त करने पर विचार किया जा सकता है। लेकिन अगर मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और बड़े स्तर पर ले जाने की रणनीति बनाई जाएगी।
प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र का दिया हवाला
आंदोलनकारियों ने वाराणसी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र बताते हुए प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार किसी जनप्रतिनिधि को भेजकर आंदोलनकारियों से बातचीत कराए। आंदोलनकारियों के मुताबिक उनका उद्देश्य सरकार से संघर्ष करना नहीं, बल्कि अपनी मांगों को केंद्र सरकार तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को आगे भी जारी रखा जाएगा।
8 दिन बाद भी धरना जारी
शास्त्रीघाट पर 29 अगस्त से शुरू हुआ अनिश्चितकालीन धरना आठवें दिन महापंचायत में बदल गया। आंदोलनकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई पहल नहीं होती है तो आने वाले दिनों में आंदोलन का दायरा और बढ़ाया जा सकता है।
