मराठी बोलने की अपील पर संजय दत्त का मजाकिया जवाब, महाराष्ट्र की सियासत में छिड़ी नई बहस

मराठी बोलने की अपील पर संजय दत्त का मजाकिया जवाब, महाराष्ट्र की सियासत में छिड़ी नई बहस

(रणभेरी): महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर जारी राजनीतिक और सामाजिक बहस के बीच अभिनेता संजय दत्त का एक बयान चर्चा का विषय बन गया है। रविवार को ठाणे में आयोजित दही हांडी कार्यक्रम के दौरान जब उनसे मराठी में संबोधित करने का आग्रह किया गया, तो अभिनेता ने अपने पुराने जेल के अनुभव का जिक्र करते हुए मजाकिया अंदाज में जवाब दिया। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनके बयान को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

कार्यक्रम का आयोजन शिवसेना के शिंदे गुट से जुड़े नेता और महाराष्ट्र सरकार में परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक की ओर से किया गया था। कार्यक्रम में संजय दत्त भी मौजूद थे और मंच से हिंदी में लोगों को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान मंत्री ने उनसे मराठी में बोलने का अनुरोध किया।

मंत्री ने कहा- संजय दत्त से भी मराठी में बात करवाते हैं

कार्यक्रम के दौरान प्रताप सरनाईक ने मंच पर मौजूद लोगों से कहा कि वह इन दिनों लोगों को मराठी सीखने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने संजय दत्त को भी मराठी में बोलने के लिए कहा।

मंत्री के इस आग्रह के बाद मंच पर माहौल कुछ हल्का-फुल्का हो गया। वहां मौजूद लोगों के बीच मुस्कुराहट दिखाई दी। इसके बाद संजय दत्त ने माइक संभाला और ‘हर हर महादेव’ का नारा लगाया। फिर उन्होंने अपने अंदाज में कहा कि वह करीब छह साल तक येरवडा जेल में रहे, लेकिन वहां रहने के बावजूद मराठी भाषा पूरी तरह नहीं सीख सके। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कुछ मराठी जरूर सीखी थी। अभिनेता का जवाब सुनकर मंच पर मौजूद लोगों ने प्रतिक्रिया दी और पूरा माहौल कुछ देर के लिए मजाकिया हो गया।

मराठी बोलने की अपील पर संजय दत्त का मजाकिया जवाब, महाराष्ट्र की सियासत में छिड़ी नई बहस

बयान के बाद भाजपा विधायक ने मंत्री पर साधा निशाना

संजय दत्त के इस बयान को लेकर भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने प्रताप सरनाईक पर सवाल उठाए। मेहता ने कहा कि भाषा के मुद्दे पर अलग-अलग लोगों के लिए अलग रवैया नहीं होना चाहिए।

उन्होंने तर्क दिया कि यदि किसी कलाकार के मराठी न बोल पाने पर मंच से हंसी-मजाक किया जा सकता है, तो फिर आम लोगों, खासकर ऑटो और टैक्सी चालकों पर मराठी भाषा को लेकर दबाव क्यों बनाया जाता है।

भाजपा विधायक ने आरोप लगाया कि भाषा के मामले में आम लोगों और प्रभावशाली लोगों के लिए अलग-अलग मानदंड दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने मंत्री की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए राजनीतिक टिप्पणी की।

मंच से उतरते वक्त संजय दत्त के साथ हुई धक्का-मुक्की

दही हांडी कार्यक्रम के दौरान संजय दत्त से जुड़ा एक और घटनाक्रम भी सामने आया। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद अभिनेता अपनी टीम के साथ वहां से निकल रहे थे। इसी दौरान भीड़ के बीच से गुजरते हुए एक व्यक्ति ने उन्हें धक्का दे दिया।

अभिनेता ने इस घटना को अनदेखा नहीं किया। उन्होंने उस व्यक्ति का हाथ पकड़कर अपनी ओर खींचा। बताया गया कि जब उस व्यक्ति को एहसास हुआ कि सामने संजय दत्त हैं, तो उसने तुरंत उनसे माफी मांग ली। इसके बाद मामला आगे नहीं बढ़ा।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

मराठी में बोलने के अनुरोध पर संजय दत्त के जवाब का वीडियो और इससे जुड़ी चर्चा सोशल मीडिया पर भी पहुंच गई। कुछ लोगों ने अभिनेता के जवाब को मजाक के तौर पर लिया, जबकि कई यूजर्स ने महाराष्ट्र में भाषा से जुड़े नियमों और उनके पालन को लेकर सवाल खड़े किए।

कुछ सोशल मीडिया यूजर्स का कहना था कि अगर मराठी भाषा को लेकर आम ऑटो और टैक्सी चालकों से अपेक्षा की जाती है, तो फिर सार्वजनिक मंच पर मशहूर हस्तियों के लिए भी वही मानक लागू होना चाहिए।

वहीं, कुछ लोगों ने संजय दत्त का बचाव करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की भाषा क्षमता को लेकर सार्वजनिक रूप से विवाद खड़ा करना उचित नहीं है। उनके मुताबिक अभिनेता ने पूरी बात को मजाकिया अंदाज में कहा था और इसे भाषा के अपमान के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

महाराष्ट्र में भाषा का मुद्दा फिर चर्चा में

महाराष्ट्र में मराठी भाषा लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का अहम मुद्दा रही है। सार्वजनिक जीवन, रोजगार, परिवहन और कारोबार से जुड़े मामलों में मराठी के इस्तेमाल को लेकर समय-समय पर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं।

ऐसे माहौल में संजय दत्त जैसे लोकप्रिय अभिनेता का मंच से मराठी को लेकर दिया गया हल्का-फुल्का जवाब राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बन गया है। एक ओर जहां उनके बयान को लेकर सोशल मीडिया पर आलोचना हो रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा विधायक द्वारा मंत्री पर सवाल उठाए जाने से यह मामला राजनीतिक रंग भी ले चुका है।

फिलहाल विवाद का केंद्र संजय दत्त का वह मजाकिया जवाब और उसके बाद भाषा के मुद्दे पर शुरू हुई बहस है। सोशल मीडिया पर इस घटनाक्रम को लेकर समर्थन और विरोध, दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

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