बीएचयू अस्पताल में आज भी पसरा है दलालों का जाल

बीएचयू अस्पताल में आज भी पसरा है दलालों का जाल

दवा और जांच के नाम पर दूर दराज से आए मरीजों को बनाते हैं अपना शिकार

मरीज को नामी डॉक्टर से आसानी से दिखाने और दवा दिलाने का देते हैं झांसा, बंधा होता है सबका हिस्सा

(रणभेरी) वाराणसी। एम्स का दर्ज हासिल बीएचयू का सर सुंदरलाल हॉस्पिटल दलालों के सिंडिकेट में फंसा हुआ है। बिहार यूपी सहित नेपाल और मध्य प्रदेश से आने वाले मरीजों को दवा और जांच के नाम पर शिकार बना रहे हैं। इस सिंडिकेट की कमाई का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि दबंग इनसे ही हर महीनें लाखों की रंगदारी वसूलते हैं। हॉस्पिटल में दलालों के खिलाफ छापेमारी करके डैमेज कंट्रोल किया जाता है हकीकत ये है कि अस्पताल में दलालों का जाल आज भी पसरा है। बीएचयू अस्पताल दूर-दराज के मरीजों के लिए एक प्रमुख चिकित्सा केंद्र है, लेकिन इसके भीतर मौजूद दलालों की गतिविधियाँ अस्पताल की प्रतिष्ठा पर सवाल खड़े करती हैं। इन दलालों का मुख्य काम मरीजों को दवा और जांच के नाम पर शिकार बनाना है। अस्पताल में आने वाले मरीजों को नामी डॉक्टर से जल्दी दिखाने, दवा दिलवाने और जांच कराने का झांसा देकर उनसे मोटी रकम वसूल की जाती है। इस सिंडिकेट के लोग न सिर्फ मरीजों से पैसे वसूलते हैं, बल्कि अस्पताल के भीतर अपनी पकड़ बनाए रखते हुए दबंगों से हर महीने लाखों रुपये की रंगदारी भी वसूलते हैं। इस जालसाजी का मुख्य उद्देश्य मरीजों को ऐसी स्थिति में फंसाना होता है, जहां उन्हें बिना दलाल की मदद के इलाज की प्रक्रिया आगे बढ़ाना मुश्किल हो जाए। दलाल उन्हें यह बताकर भ्रमित करते हैं कि अगर वे उनके माध्यम से इलाज कराएंगे तो उन्हें अस्पताल के नामी डॉक्टरों से मिलवाया जाएगा और जांच या दवाइयाँ जल्दी मिलेंगी।

इन दलालों का नेटवर्क इतना मजबूत है कि अस्पताल प्रशासन भी इनकी गतिविधियों से पूरी तरह अवगत होते हुए भी कोई ठोस कदम उठाने में नाकाम रहता है। समय-समय पर छापेमारी की जाती है और कुछ दलालों को गिरफ्तार भी किया जाता है, लेकिन इसका असर ज्यादा समय तक नहीं रहता। अस्पताल के भीतर यह दलाल एक प्रकार के अंडरवर्ल्ड की तरह काम करते हैं, जहां उनका हिस्सा तय होता है और उनकी गतिविधियाँ चुपचाप चलती रहती हैं। इसमें सबसे बड़ी समस्या यह है कि दूर-दराज से आए मरीज अक्सर अपने इलाज के लिए सही जानकारी नहीं रखते और इन दलालों के झांसे में फंस जाते हैं। यह दलाल उन मरीजों को विशेष रूप से निशाना बनाते हैं, जो अपने घर से बाहर पहली बार किसी बड़े अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे होते हैं। इनका लक्ष्य केवल पैसे वसूलना होता है, और वे मरीज की मेडिकल स्थिति का कोई ध्यान नहीं रखते।

बीएचयू के ईएनटी विभाग पर भ्रष्टाचार का आरोप

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के सर सुंदरलाल अस्पताल के नाक, कान और गला विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के संबंध में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विरोध दर्ज कराते हुए डायरेक्टर को ज्ञापन दिया। कार्यकर्ताओं ने कहा नाक,कान और गला विभाग के ओपीडी के बाहर कुछ बाहरी व्यक्तियों और मेडिकल स्टोर्स से जुड़े दलाल सक्रिय हैं, जो मरीजों से पैसे लेकर उनके पर्चे जल्दी लगवाने का कार्य करते हैं। ज्ञापन देने पहुंचे समाजवादी बाबा साहब अंबेडकर वाहिनी महानगर अध्यक्ष अमन यादव ने कहा सर सुंदरलाल चिकित्सालय मालवीय की धरती पर स्थापित है और जिसे भारत सरकार ने एम्स का दर्जा दिया है जिसका उद्देश्य किफायती और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं प्रदान करना है। लेकिन नाक, कान और गला विभाग में मरीजों के साथ आर्थिक शोषण और चिकित्सा सेवाओं में लापरवाही की गंभीर शिकायतें प्राप्त हो रही हैं।

अमन ने कहा कि ओपीडी में दलालों की सक्रियता है। मरीजों को चिकित्सालय की बजाय बाहरी मेडिकल स्टोर्स से दवा खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है। अमन ने डायरेक्टर को शिकायत करते हुए कहा कान के पर्दे का ऑपरेशन कराने वाले मरीजों को 7-8 हजार रुपये के महंगे पर्दे बाहरी मेडिकल स्टोर्स से खरीदने को कहा जाता है। यदि मरीज इसे निर्धारित स्टोर से नहीं लाते, तो उनका ऑपरेशन करने से मना कर दिया जाता है। अमन ने आरोप लगाते हुए कहा कि वास्तव में मरीजों के कान के पिछले भाग में चिरा लगाकर वहां के चमड़े से कान का पर्दा बनाकर मरीज को लगा दिया जाता है और आर्टिफिशियल पर्दे को वापस मेडिकल स्टोर्स भेज दिया जाता है, जिससे डॉक्टर कमीशन प्राप्त करते हैं। इस पूरे मामले में उन्होंने जांच कराकर कारवाई की मांग की है।