फूलों से सजा महाश्मशाननाथ का दरबार

वाराणसी (रणभेरी सं.)। चैत्र नवरात्र की पंचमी से आरंभ होने वाला बाबा महाश्मशान नाथ का त्रिदिवशीय शृंगार महोत्सव मध्यरात्रि से आरंभ हो गया। पूरे मंदिर परिसर को बेला, गुलाब, गेंदा के फूलों से सजाया गया तथा मंत्रोच्चार के बीच बाबा का विधिवत रुद्राभिषेक किया गया। बाबा को जया , विजया , विविध मिष्ठान , खीर आदि के साथ विशेष विजया की बर्फी का भोग लगाया गया। रुद्राभिषेक में मंदिर समिति के अध्यक्ष चैनू प्रसाद गुप्ता यजमान रहे , आचार्य बचाऊ महाराज ने शास्त्रोक्त विधि से पूजन संपन्न कराया मंदिर व्यवस्थापक गुलशन कपूर ने सभी आगत अतिथियों का अभिनंदन किया। इसके बाद मंदिर में 11 बार सुंदरकांड का पाठ किया गया। देर रात तक भजन कीर्तन चलता रहा। बाबा की भव्य आरती के पश्चात विश्व शांति के लिए विशेष प्रार्थना कर बाबा का नरमुंड खप्पर मंदिरा से भरा गया। आयोजन में मंदिर व्यवस्थापक गुलशन कपूर , बिहारी लाल गुप्ता , संजय प्रसाद गुप्ता , दिलीप यादव , विजय शंकर पांडेय , दीपक तिवारी , मनोज शर्मा , गजानन पांडेय , विजय गुप्ता , सदन तिवारी , पुजारी लल्लू बाबा आदि की विशेष भूमिका रही।
कल नगर वधुएं फिर करेंगी नृत्य
हर बार की तरफ इस बार चैत्र नवरात्र की सप्तमी 4 अप्रैल को पड़ रही है। जिसमें दूर-दूर से आई नगरवधुएं अपने मोक्ष के लिए मणिकर्णिका घाट पर नृत्य करेंगी। इन्हें ना तो यहां जबरन लाया जाता है ना ही इन्हें इन्हे पैसों के दम पर बुलाया जाता है। ये खुद यहां डांस के लिए आती हैं। ताकि अगले जन्म में इन्हें नगरवधू का कलंक नहीं झेलना पड़ेगा।
राजा मान सिंह से जुड़ा है इतिहास
कहते हैं महा शमशान मे सजने वाली नगरवधुओं के इस कार्यक्रम का इतिहास राजा मानसिंह से जुड़ा हुआ है। शहंशाह अकबर के समय में राजा मान सिंह ने 16वीं शताब्दी में इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। निर्माण के बाद वहां भजन-कीर्तन होना था पर श्मशान होने की वजह से यहां कोई भी ख्यातिबद्ध कलाकर आने को राजी नहीं हुआ। सभी ने आने से इनकार कर दिया। बाद में नगर वधुओं ने यहां अपनी कार्यक्रम करने की इच्छा जाहिर की और राजा ने उनके इस आमंत्रण को स्वीकार कर लिया। तब से नगर वधुओं के नृत्य की परम्परा शुरू हुई। शिव को समर्पित गणिकाओं की यह भाव पूर्ण नृत्यांजली मोक्ष की कामना से युक्त होती है।