भ्रष्टाचारियों के राज पर भी कुछ बोलिए जनाब

भ्रष्टाचारियों के राज पर भी कुछ बोलिए जनाब
  • ....तो परिवहन मंत्री की सरपरस्ती में चल रहा है ओवरलोडिंग का खेल ! 
  • भ्रष्टाचारी अधिकारियों को बचाने में आखिर क्यों लगी है सरकार ?
  • कब होगी सरकारी राजस्व हानि की वसूली, कब रुकेगा काला कारोबार ?
  • सिपाही विपिन चौधरी सहित 3 को किया मुख्यालय से संबद्ध 

वाराणसी (रणभेरी):  बड़ा दमदार रहा मुख्यमंत्री जी आपका यह बयान कि उत्तर प्रदेश में अब कोई पेशेवर अपराधी या माफिया किसी को धमका नहीं सकता। इसी बयान के साथ एक सवाल यह भी जुड़ता है कि भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ भी इस तरह का एक्शन आखिर कब होगा ? और कब चलेगा आपका डंडा उन भ्रष्ट अफसरों पर जो मंत्रियों की गोद में बैठकर धड़ल्ले से करोड़ों की काली कमाई कर रहे हैं। लगता है आपके मंत्री आपकी चेतावनियों को नजरंदाज कर रहे हैं या उन्हें आपकी खुशहाल उत्तर प्रदेश की मंशा की कोई परवाह नहीं है। मिसाल के तौर पर संज्ञान लिजिए प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के परिवहन विभाग का। जहां सरकार की मंशा को ठेंगा दिखाकर उप परिवहन आयुक्त वाराणसी द्वारा पूर्वांचल के दर्जन भर जिलों में ओवरलोड ट्रकों का संचालन धड़ल्ले से कराया जा रहा है। इस कुकृत्य के दम पर उप परिवहन आयुक्त ए.के.सिंह द्वारा सरकार को प्रतिमाह करोंड़ों रूपये के राजस्व की क्षति पहुंचाई जा रही है। 

इस मामले में गूंज उठी रणभेरी ने परिवहन विभाग के एक बड़े भ्रष्टाचार का स्टिंग ऑपरेशन के जरिए सनसनी खेज खुलासा कर 27 फरवरी के अंक में सबूतों के साथ खबर प्रकाशित किया था। जिसमे चंदौली जिले में प्रति माह एक हजार ओवरलोड ट्रकों का संचालन कराने की योजना के पुख्ता सबूत पाए गये थें। यही नहीं अखबार ने 23 मार्च के अंक में मिर्जापुर जनपद में पिछले तीन माह में अवैध रूप से चलने वाले लगभग 18 हजार ओवरलोड ट्रकों की सूची भी प्रकाशित किया था। प्रमुखता से प्रकाशित इस खबर में यह बताया गया था कि वाराणसी मंडल के उप परिवहन आयुक्त ए के सिंह के की देख-रेख में पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी और सीएम के गृह जनपद गोरखपुर सहित पूर्वांचल के 14 जिलों में ओवरलोड ट्रकों का काला धंधा बदद्दस्तुर जारी है। इस मामले का साक्ष्य भी " गूंज उठी रणभेरी" समाचारपत्र के पास है। इस घपलेबाजी को लेकर" रणभेरी " ने लगातार ठोस तथ्यों और साक्ष्यों के साथ खबरें भी प्रमुखता से प्रकाशित की लेकिन शासन -प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंगा । 

इस संबंध में हमारे संवाददाता ने परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह का पक्ष जानने के लिए विगत एक माह से लगातार प्रयास किया परन्तु जब भी फोन एवं व्हाट्सअप संदेश के जरिये उनके पीआरओ (जन संपर्क अधिकारी) सुमित राजभर से संपर्क स्थापित हुआ हर बार केवल यह बताया गया कि ‘मंत्री जी अभी व्यस्त है आपकी बात करा दी जायेगी’। लेकिन मंत्री जी की व्यस्तता का हवाला देने वाले मंत्री जी के पीए ने भी विगत एक सप्ताह से फोन उठाया बंद कर दिया है ताकि मंत्री जी से इस गंभीर मामले में कोइ सवाल न किया जा सके। इस पूरे प्रकरण में यह भी हो सकता है कि कुछ खास वजहों से परिवहन मंत्री ने बात करने की जरूरत नहीं समझी। हालांकि सूत्रों के हवाले परिवहन विभाग के वाराणसी कार्यालय से यह जानकारी मिल रही है कि इस पूरे प्रकरण में उप परिवहन आयुक्त ए.के.सिंह को बचाने के एवज में परिवहन मंत्री तक 25 लाख की रकम भी पहुचायी गयी है। यही वजह है कि योगी सरकार के जीरो टालरेंस वाले दावे को दरकिनार करते हुए परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के मंत्रालय में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है ऐसे अब यही प्रतीत होता है कि परिवहन मंत्री की सरपरस्ती में ही पूरे पूर्वांचल में ओवरलोडिंग का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। 

परिवहन विभाग में पनप रहे भ्रष्टाचार की खबर प्रकाशित होने के बाद से ही न जाने क्यों सरकार का परिवहन मंत्रालय विभागीय लुटेरों को बचाने में लगा हुआ है। विगत डेढ़ माह से इस विषय पर लगातार साक्ष्यों के आधार पर हम खबर प्रकाशित करते जा रहे हैं इसके बावजूद जीरो टालरेंस का दावा करने वाली सरकार मौन है। रणभेरी में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए पूर्व आई.पी.एस. अमिताभ ठाकुर ने लोकायुक्त के यहाँ परिवाद दाखिल किया है। वहीं लीपा-पोती की नियत रखने वाले परिवहन मंत्रालय द्वारा मिर्जापुर पीटीओ राजकुमार ,बनारस पीटीओ कौशलेंदर और मिर्जापुर का कुख्यात सिपाही विपिन चौधरी को अचानक मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया। इस मामले में बड़ा सवाल यह है कि भ्रष्टाचार का बोलता-चीखता साक्ष्य होने के बाद भी मंत्री जी क्यों खामोश है।

परिवहन मंत्रालय की चुप्पी का ही यह नतीजा है कि हौसला बुलंद भ्रष्टाचारी अधिकारियों के द्वारा दिन-रात सड़को पर अवैध वसूली की जा रही है। आलम यह है कि चंदौली एआरटीओ एस पी देव का ड्राइवर अनिल मौर्य जो की पूर्व में 52000 हजार रुपए अवैध वसूली का दोषी था और उसके ऊपर मुकदमा के आदेश थे। उसी अनिल मौर्य की बोलेरो गाड़ी सरकारी काम के लिए लगा कर उससे ड्राइवर का कार्य लिया जा रहा है। शायद यह ईमानदारी के जीरो टॉलरेंस का उदाहरण है। एक सवाल यह भी उठाने लगा है 30 लाख रूपये वसूली के आडियो के आरोपी सिपाही विपिन चौधरी को बिना कार्यवाही अचानक मुख्यालय से संबद्ध क्यूँ किया गया? इस कृत्य से यह साफ है कि मामले को ठंडा करने के लिए मंत्री जी दोषी अधिकारियों को बचाने में जी जान से लगे हुए हैं।