वाराणसी (रणभेरी): शहर को गंगा पार क्षेत्रों से जोड़ने वाले ऐतिहासिक राजघाट स्थित मालवीय पुल पर लंबे समय से लंबित मरम्मत कार्य एक बार फिर शुरू होने जा रहा है। रेलवे और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के बीच कई दौर की बातचीत के बाद पुल पर रात के समय काम करने की अनुमति मिल गई है। इसके तहत 14 जून से 13 अगस्त तक प्रतिदिन रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक विशेष ब्लॉक लागू रहेगा। इस अवधि में किसी भी प्रकार के वाहन को पुल से गुजरने की अनुमति नहीं होगी।
71 ज्वाइंट बदलने का लक्ष्य
पीडब्ल्यूडी द्वारा पुल पर लगे कुल 71 ड्रेनेज स्पाउट एक्सपेंशन ज्वाइंट को बदलने का कार्य किया जाना है। ये ज्वाइंट पुल की संरचनात्मक मजबूती और वर्षा के दौरान जल निकासी व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। विभाग का कहना है कि लंबे समय से इनकी मरम्मत की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
रात में होगा कार्य, पैदल यात्री जा सकेंगे
ट्रैफिक विभाग के अनुसार मरम्मत कार्य केवल रात में किया जाएगा ताकि दिन के समय यातायात पर कम से कम असर पड़े। रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक पुल पर सभी प्रकार के वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। हालांकि पैदल आने-जाने वाले लोगों को अनुमति दी जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि मरम्मत के दौरान भारी या हल्के वाहनों से उत्पन्न कंपन कार्य की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। इसी कारण दोपहिया वाहनों को भी पुल पर चलने की अनुमति नहीं होगी। नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए पुल के दोनों ओर अवरोधक लगाए जाएंगे।
ट्रैफिक डायवर्जन की तैयारी
रात के समय पुल बंद रहने के कारण यातायात को वैकल्पिक मार्गों से गुजारा जाएगा। पड़ाव और राजघाट की दिशा से आने-जाने वाले वाहनों को रामनगर-सामनेघाट पुल की ओर मोड़ा जाएगा। वहीं बिहार की तरफ से आने वाले भारी वाहनों को हाईवे और रिंग रोड के जरिए शहर की ओर भेजा जाएगा।
ट्रैफिक पुलिस ने बताया कि आगामी बैठक में डायवर्जन योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा ताकि ब्लॉक अवधि के दौरान लोगों को कम से कम परेशानी हो।
बारिश को देखते हुए होगी विशेष रणनीति
अधिकारियों के मुताबिक मानसून के दौरान मरम्मत कार्य की तकनीकी आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखा जा रहा है। यदि निर्माण सामग्री को मजबूती हासिल करने के लिए अतिरिक्त समय की जरूरत पड़ी तो दिन के समय चार पहिया वाहनों के संचालन को लेकर भी अलग निर्णय लिया जा सकता है। इस विषय पर विभागीय बैठक में चर्चा की जाएगी।
पहले भी शुरू हुआ था काम, बीच में रुक गया
गौरतलब है कि पुल की मरम्मत के लिए दिसंबर 2025 में भी विशेष ब्लॉक लिया गया था। उस समय 24 दिसंबर से 13 जनवरी तक कार्य प्रस्तावित था। लेकिन रेलवे की आपत्ति के बाद दूसरे ही दिन काम रोकना पड़ा था। उस दौरान कुल 71 में से केवल चार ड्रेनेज स्पाउट एक्सपेंशन ज्वाइंट ही बदले जा सके थे।
रेलवे की आपत्ति बनी थी बाधा
मालवीय पुल के नीचे देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में से एक रेल लाइन गुजरती है, जो दिल्ली और हावड़ा रेलखंड को जोड़ती है। मरम्मत के दौरान जब एक अन्य ज्वाइंट को हटाने का प्रयास किया जा रहा था, तब उसका कुछ हिस्सा नीचे रेलवे ट्रैक की ओर गिर गया था।
रेलवे अधिकारियों ने इसे सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर माना था। पुल के नीचे से हाईटेंशन विद्युत लाइनें और लगातार रेल संचालन होने के कारण किसी भी प्रकार का मलबा या धातु का टुकड़ा गिरना जोखिमपूर्ण माना गया। इसी वजह से तत्काल प्रभाव से मरम्मत कार्य रोक दिया गया था।
137 वर्ष पुराने पुल की सुरक्षा पर फोकस
राजघाट स्थित मालवीय पुल, जिसे डफरिन ब्रिज के नाम से भी जाना जाता है, शहर की ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल है। करीब 137 वर्ष पुराने इस पुल से सड़क और रेल दोनों यातायात संचालित होते हैं। बढ़ती उम्र और लगातार उपयोग को देखते हुए इसकी समय-समय पर मरम्मत और रखरखाव जरूरी माना जाता है। अब रेलवे और पीडब्ल्यूडी के बीच समन्वय बनने के बाद उम्मीद की जा रही है कि निर्धारित 60 दिनों में सभी 71 ज्वाइंट बदले जा सकेंगे और पुल की संरचनात्मक सुरक्षा को और मजबूत किया जा सकेगा।
