(रणभेरी): संसद के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षाओं से जुड़े संशोधन विधेयक पर प्रस्तावित चर्चा विपक्ष के तीव्र विरोध के कारण शुरू नहीं हो सकी। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने छात्रों से जुड़े एक कथित पिटाई प्रकरण पर चर्चा की मांग करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी और वेल में पहुंच गए। लगातार शोर-शराबे के चलते सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी सदस्यों से शांत होकर सदन की कार्यवाही चलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि सभी पक्ष चर्चा चाहते हैं तो सहमति बनाकर आएं, ताकि विधेयक पर सार्थक विचार-विमर्श कराया जा सके। अध्यक्ष ने सरकार और विपक्ष को शाम तक आपसी सहमति बनाने का समय भी दिया, लेकिन हंगामा जारी रहने के कारण कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी।
दिनभर कई बार स्थगित करनी पड़ी कार्यवाही
संसद की कार्यवाही दिनभर व्यवधानों से घिरी रही। पहले सदन को दोपहर 12 बजे तक स्थगित किया गया। इसके बाद दोपहर 2 बजे दोबारा बैठक शुरू हुई, लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण चर्चा आगे नहीं बढ़ सकी। अंततः कार्यवाही को फिर शाम 5 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
उधर, राज्यसभा में भी लगभग यही स्थिति देखने को मिली। वहां भी विपक्षी हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी।
केंद्रीय मंत्री ने पेश किया संशोधन विधेयक
इससे पहले सुबह लगभग 11 बजे केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षाओं से संबंधित संशोधन विधेयक पेश किया। सरकार का कहना है कि इस संशोधन का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है, ताकि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
धर्मेंद्र प्रधान का संसद में स्वागत
पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा देने के बाद पहली बार संसद पहुंचे। संसद परिसर में एनडीए के सांसदों ने उनका स्वागत किया। उन्हें शॉल और मिथिला पाग पहनाकर सम्मानित किया गया तथा संसद भवन तक साथ लेकर गए। इस दौरान कई सांसदों ने उनके समर्थन में नारे भी लगाए।
धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दिया था। उनका इस्तीफा देशभर में चर्चा का विषय बने NEET पेपर लीक विवाद के बाद आया था।
संशोधन विधेयक में क्या होंगे प्रमुख बदलाव
सरकार वर्ष 2024 में लागू किए गए सार्वजनिक परीक्षा कानून में संशोधन का प्रस्ताव लेकर आई है। नए प्रावधानों के तहत परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक जैसे अपराधों पर पहले से अधिक कठोर कार्रवाई की जाएगी।
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार—
- पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े संगठित अपराधों में शामिल आरोपियों के लिए सजा और आर्थिक दंड दोनों को और अधिक कड़ा किया जाएगा।
- राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ऐसे मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें गठित करने का अधिकार मिलेगा।
- इन अदालतों में मामलों की रोजाना सुनवाई सुनिश्चित करने का प्रावधान रखा गया है ताकि दोषियों को शीघ्र सजा मिल सके।
- कानून केंद्र सरकार और उसकी एजेंसियों द्वारा आयोजित सभी प्रमुख सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू रहेगा।
- किन परीक्षाओं पर लागू होगा कानून
संशोधित कानून लागू होने के बाद निम्न प्रमुख परीक्षाएं इसके दायरे में रहेंगी—
- संघ लोक सेवा आयोग (UPSC)
- कर्मचारी चयन आयोग (SSC)
- रेलवे भर्ती परीक्षाएं
- बैंकिंग भर्ती परीक्षाएं
- राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित प्रवेश परीक्षाएं
- केंद्र सरकार की अन्य भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाएं
- सरकार ने क्यों लाया संशोधन
पिछले कुछ समय में विभिन्न राज्यों में पेपर लीक की घटनाओं और विशेष रूप से NEET परीक्षा विवाद के बाद छात्रों ने बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए थे। इन्हीं घटनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने परीक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने का निर्णय लिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जुलाई को सार्वजनिक रूप से संकेत दिया था कि परीक्षा संबंधी कानून को और अधिक कठोर बनाया जाएगा। इसके बाद सरकार ने परीक्षा सुधारों के लिए नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स गठित करने की घोषणा भी की, जिसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और तकनीकी सुधारों के सुझाव देना है।
