वाराणसी (रणभेरी): उदय प्रताप (यूपी) कॉलेज परिसर में दिनदहाड़े हुए छात्र सूर्यप्रताप सिंह हत्याकांड से जुड़े मामले में शनिवार को वाराणसी जिला एवं सत्र न्यायालय में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अदालत में सह-अभियुक्त अनुज सिंह की ओर से दायर जमानत अर्जी पर पक्ष-विपक्ष की विस्तृत बहस हुई, जिसके बाद न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी।
सत्र न्यायाधीश संध्या श्रीवास्तव ने मामले की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्यों, चश्मदीद गवाहों के बयानों तथा पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की गंभीर प्रकृति को ध्यान में रखते हुए आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया। अपने आदेश में अदालत ने इस घटना को अत्यंत दुस्साहसपूर्ण और गंभीर प्रकृति का अपराध बताया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष और पीड़ित पक्ष की ओर से अदालत में जमानत का कड़ा विरोध किया गया। जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) मुनीर सिंह चौहान ने राज्य की ओर से दलील देते हुए कहा कि शैक्षणिक परिसर जैसे सुरक्षित स्थान पर इस प्रकार की हिंसक वारदात कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती है और ऐसे मामलों में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं दी जानी चाहिए।
इसी क्रम में पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता विवेक शंकर तिवारी ने भी अदालत के समक्ष चश्मदीद गवाहों के बयान और चिकित्सकीय साक्ष्यों को प्रस्तुत करते हुए यह तर्क रखा कि घटना सुनियोजित योजना के तहत अंजाम दी गई थी, जिसमें अभियुक्त की भूमिका सक्रिय और महत्वपूर्ण रही है।
मामले के अनुसार, 20 मार्च 2026 को कॉलेज परिसर में हुए आपसी विवाद के दौरान दो छात्रों—मंजीत चौहान और अनुज सिंह पर आरोप है कि उन्होंने अन्य विद्यार्थियों की मौजूदगी में छात्र सूर्यप्रताप सिंह पर गोली चला दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना की सूचना मृतक के परिजन उत्कर्ष सिंह द्वारा थाना शिवपुर, वाराणसी में दी गई थी, जिसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई।
पुलिस जांच पूरी होने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया जा चुका है और मामले का ट्रायल प्रारंभ हो गया है। अदालत में आगे की सुनवाई में अब अभियोजन पक्ष के साक्ष्य और गवाहों की परीक्षा की प्रक्रिया जारी रहेगी।
