तीन प्रमुख मांगें उठाईं: ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR रद्द करने और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग
वाराणसी (रणभेरी): वाराणसी कचहरी में शुक्रवार को अधिवक्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में शवयात्रा निकालकर अपना आक्रोश व्यक्त किया। डॉ. राहुल राज एडवोकेट के नेतृत्व में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने न्यायालय परिसर में प्रतीकात्मक शवयात्रा निकाली और अगरबत्ती जलाकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए अपनी तीन प्रमुख मांगें सामने रखीं।

अधिवक्ताओं की प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR प्रक्रिया को तत्काल रद्द करना और देश में बैलेट पेपर के माध्यम से चुनाव कराना शामिल रहा। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने लोकतंत्र और चुनाव की निष्पक्षता से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए विरोध दर्ज कराया।

‘जनता के सामने आकर दें जवाब’: डॉ. राहुल राज
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे डॉ. राहुल राज एडवोकेट ने कहा कि देश में वोट चोरी के आरोपों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त की ओर से इन मुद्दों पर स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि यदि ज्ञानेश कुमार स्वयं को जिम्मेदार पद पर सक्रिय मानते हैं, तो उन्हें देश की जनता के सामने आकर अपनी बात रखनी चाहिए।
राहुल राज ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया का दुरुपयोग कर लाखों लोगों के मताधिकार को प्रभावित किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि कथित तौर पर वोटों को प्रभावित करने की कार्रवाई किसके कहने पर हुई। उन्होंने कहा कि जब तक इन सवालों का जवाब नहीं मिलता, तब तक अधिवक्ताओं का विरोध जारी रहेगा।

इस्तीफे तक जारी रहेगा विरोध
अधिवक्ता राहुल राज ने कहा कि प्रतीकात्मक शवयात्रा के माध्यम से मुख्य चुनाव आयुक्त के प्रति अपना विरोध जताया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन को लेकर आगे की रणनीति बनाई जाती रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के बाद अधिवक्ता समाज की ओर से प्रतीकात्मक रूप से तेरहवीं का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

कई अधिवक्ता रहे मौजूद
विरोध प्रदर्शन में विकास चौहान, हर्ष सोनकर, रामलखन साहनी, सचिन कुमार, पंकज कन्नौजिया, करन गुप्ता, अखिलेश कन्नौजिया, ऋषभ चतुर्वेदी, सोनू अहमद, राहुल कनौजिया, राजेश यादव, सूर्य कनौजिया, दानिश अंसारी, राजन मिश्रा और मुकेश गिरी समेत कई अधिवक्ता शामिल रहे। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा मताधिकार की सुरक्षा का मुद्दा उठाया।
