- काशी में दर्शन के नाम पर ‘बाइक कारोबार’, किराया सुनकर श्रद्धालु भी हैरान
- विश्वनाथ कॉरिडोर के आसपास बेलगाम बाइक सेवा, नियमों को खुली चुनौती
- चार सवारी, एक बाइक और मनमाना किराया, मंदिर मार्गों पर कौन लगाएगा लगाम ?
- मंदिर मार्गों पर बाइक चालकों का कब्जा, प्रशासनिक निगरानी पर उठे सवाल
वाराणसी (रणभेरी): धर्म और आस्था की नगरी काशी में प्रतिदिन देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ और काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव के दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। लेकिन मंदिर मार्गों पर संचालित कुछ दोपहिया वाहन चालकों की मनमानी अब श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों का आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर बाइक और स्कूटी पर क्षमता से अधिक सवारियां बैठाई जा रही हैं, जबकि श्रद्धालुओं से मनमाना किराया भी वसूला जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, मंदिर क्षेत्र के आसपास कई बाइक और स्कूटी चालक एक ही वाहन पर तीन से चार श्रद्धालुओं को बैठाकर विभिन्न मंदिरों तक पहुंचा रहे हैं। चालक स्वयं हेलमेट लगाए रहते हैं, लेकिन पीछे बैठे यात्रियों की सुरक्षा को लेकर कोई व्यवस्था नहीं दिखाई देती। ऐसे में किसी दुर्घटना की स्थिति में श्रद्धालुओं की जान जोखिम में पड़ सकती है। व्यापार मंडल के मंडल उपाध्यक्ष विनय यादव ने बताया कि मंदिर क्षेत्र के आसपास बड़ी संख्या में दोपहिया वाहन खड़े कर दिए जाते हैं, जिससे अतिक्रमण और जाम की समस्या बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ चालक श्रद्धालुओं को काशी विश्वनाथ मंदिर के चार नंबर गेट या बाबा काल भैरव मंदिर तक छोड़ने के नाम पर प्रति व्यक्ति 100 से 300 रुपये तक वसूल रहे हैं। कई मामलों में मात्र 800 मीटर से एक किलोमीटर की दूरी के लिए भी अत्यधिक किराया लिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इस कार्य में कई वाहन बाहरी जनपदों, जैसे चंदौली, गाजीपुर और मिर्जापुर से आकर लगाए जा रहे हैं। ऐसे में प्रशासन को वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस, पहचान पत्र, वाहन पंजीकरण और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की नियमित जांच करानी चाहिए। इससे अवैध रूप से संचालित सेवाओं पर अंकुश लगाया जा सकेगा। व्यापार मंडल अध्यक्ष ने भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मंदिर क्षेत्र में कुछ बाइक चालक बिना हेलमेट और क्षमता से अधिक सवारी बैठाकर यात्रियों को ले जा रहे हैं। उन्होंने आशंका जताई कि यदि भविष्य में किसी महिला श्रद्धालु या पर्यटक के साथ कोई अप्रिय घटना होती है, तो जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए समय रहते प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बाइक सेवा संचालित की जा रही है तो उसके लिए निर्धारित किराया, अधिकृत पार्किंग स्थल और स्पष्ट संचालन नियम तय किए जाने चाहिए। साथ ही नो-व्हीकल जोन में वाहनों की आवाजाही पर भी सख्ती से नियंत्रण किया जाना चाहिए। क्षेत्रीय लोगों ने प्रशासन, नगर निगम और यातायात विभाग से संयुक्त अभियान चलाकर अवैध रूप से संचालित बाइक सेवाओं की जांच करने, मनमानी वसूली पर रोक लगाने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि काशी आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित, व्यवस्थित और सम्मानजनक यात्रा अनुभव उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
