महाकुंभ में उठी गूंज, काशी हो मांस-मदिरा मुक्त

महाकुंभ में उठी गूंज, काशी हो मांस-मदिरा मुक्त

वाराणसी (रणभेरी सं.)। मथुरा के बाद धार्मिक नगरी काशी को भी मांस - मदिरा से मुक्त करने की आवाज अब जोर शोर से गूंजने लगी है। महाकुंभ में भी काशी से गई टीम साधु संतों के बीच काशी को मांस मदिरा से मुक्त करने के लिए अनुष्ठान से लेकर प्रचार प्रसार किया जा रहा है। विभिन्न धार्मिक संगठनों के साथ ही शहर के तमाम होटल, रेस्टोरेंट संचालकों ने भी अपने को शुद्ध शाकाहारी रेस्टोरेंट में बदलने का अभियान शुरू कर दिया है। काशी को मांस मदिरा मुक्त नगरी घोषित करने के लिए प्रयागराज में शनिवार को श्री आदिमहादेव काशी धर्मालय मुक्ति न्यास की तरफ से शिवशक्ति पंचकुंडीय महायज्ञ का आयोजन किया गया। इस यज्ञ में यज्ञाचार्य "चाणक्य पीठाधीश्वर परशुराम आचार्य ब्रह्मर्शी सुदर्शन शरण जी महाराज एवं न्यास के धमार्चार्य प्रमुख आचार्य पंडित अजय महाराज समेत संत समाज था। न्यास के प्रबंध ट्रस्टी डॉ. राम प्रसाद सिंह ने कहा कि महाकुंभ में काशी को मांस मदिरा मुक्त करने के लिए जागरूकता अभियान का सही समय है। संत समाज ने एक स्वर में काशी को मांस मदिरा मुक्त करने की आवाज उठाई तो सरकार को मथुरा की तरह काशी को भी मांस मदिरा मुक्त नगरी घोषित करना होगा। 

न्यास लंबे समय से काशी को मांस मदिरा मुक्त नगरी की मांग उठा रहा है। महाकुंभ में आए साधु संतों ने हुंकार भर दी तो काशी को मांस मदिरा से मुक्त होने में समय नहीं लगेगा। महाकुंभ क्षेत्र में न्यास से जुड़े लोग जन जागरण करने एवं धर्म क्षेत्र में आए श्रद्धालुओं को जानकारी देने हेतु बड़ी संख्या मे एक पत्रक ( पैंफलेट) भी वितरित किया जा रहा है जिसमें ज्ञानवापी मंदिर एवं भगवान शंकर का अविमुक्त क्षेत्र (पंचक्रोश क्षेत्र) में मांस, मछली, बूचड़खाना, कत्लखाना तथा अवैध कब्रों, मजारों, मस्जिदों आदि को हटाने के साथ ही साथ काशी को धर्म नगरी घोषित करने की मांग भी की गई है।

पार्षद भी उठा चुके मांग

नगर निगम के पार्षद बलिराम कन्नौजिया, इंद्रेश सिंह, सुशील समेत कई अन्य पार्षद सदन की बैठक में काशी को मांस मदिरा मुक्त नगरी के लिए अपनी आवाज उठा चुके हैं। नगर निगम के सदन में फिलहाल मंदिर क्षेत्र के दो किलोमीटर दायरे को मांस, मछली से मुक्त कराने का प्रस्ताव पास है। सदन की अगली बैठक में पूरे काशी क्षेत्र को मांस की बिक्री से मुक्त करने के लिए प्रस्ताव लाने की तैयारी चल रही है।

रेलवे स्टेशन पर भी प्रतिबंध

महाकुम्भ में तीर्थयात्रियों के उमड़े सैलाब को देखते हुए वाराणसी के सभी रेलवे स्टेशन पर मौजूद रेस्तरां, शॉप में नॉनवेज की बिक्री पर रोक लगा दी है। जब तक महाकुंभ चलेगा, किसी भी स्टेशन पर नॉनवेज या उससे बने अन्य उत्पाद की बिक्री नहीं होगी।

काशी का वैभव लौट रहा, घाटा भी मंजूर

काशी की गरिमा के अनुरूप शहर के कई रेस्टोरेंट, ढाबा, भोजनालय ने अपने को शाकाहारी घोषित करना शुरू कर दिया है। वाराणसी बाबतपुर मार्ग पर शहर के प्रसिद्ध सांझा चूल्हा ने भी अपने यहां मांस परोसने पर रोक लगाते हुए खुद को शाकाहारी घोषित कर दिया। रेस्तरां के मालिक संजीव जायसवाल ने कहा कि काशी की गरिमा के अनुरूप यह शुरूआत की गई है। कुछ लोग कह रहे कारोबार में घाटा होगा, घाटा मंजूर है लेकिन काशी का पुराना वैभव जिस तरह लौट रहा, करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु काशी आ रहे है, उनकी आस्था का सम्मान करना प्रत्येक काशीवासी का कर्तव्य है। शहर के कई अन्य रेस्तरां, ढाबा ने भी अपने यहां मांस परोसने पर रोक लगा दी है। उधर, शहर के कई ऐसे ढाबा, रेस्तरां भी हैं जिन्होंने महाकुंभ स्नान के बाद काशी आने वाले श्रद्धालुओं की को शुद्ध भोजन उपलब्ध कराने के लिए अपने यहां नॉनवेज बंद कर दिया है।