पुत्र के लिए माताओं ने रखा जीवित्पुत्रिका व्रत, सुनी भगवान जिउतवाहन की कथा

पुत्र के लिए माताओं ने रखा जीवित्पुत्रिका व्रत, सुनी भगवान जिउतवाहन की कथा

वाराणसी (रणभेरी): शिव की नगरी काशी में रविवार को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर संतान की लंबी उम्र के लिए महिलाओं ने कठिन निर्जला जीवितपुत्रिका (जीउतिया) व्रत पूरे आस्था और विश्वास से रखा है। 24 घंटे के इस निर्जला व्रत का पारण सोमवार को होगा। पर्व पर व्रत रहने वाली महिलाएं दोपहर से ही अपने सुविधाजनक स्थान गंगाघाट, वरुणानदी के किनारे, ईश्वरगंगी तालाब, लक्ष्मी कुंड, बीएलडब्ल्यू कुंड, कंदवा पोखरा सहित जिले के तालाबों, मंदिर परिसर में पहुंचने लगीं। व्रती महिलाओं ने समूह में भगवान जिउतवाहन की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर उनकी कथा सुनी। इसके बाद अपनी संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना की।

जिउतिया पर्व पर ही लक्ष्मी कुंड पर आयोजित 16 दिवसीय सोरहिया मेले का भी समापन गया। अंतिम दिन व्रती महिलाओं ने लक्ष्मी कुंड स्थित मां महालक्ष्मी के विग्रह का दर्शन पूजन किया। लक्ष्मी मंदिर परिसर में पूरे दिन श्रद्धालु महिलाओं और उनके परिजनों की भारी भीड़ जुटी रही। मेले के आखिरी दिन मंदिर परिसर और आस-पास स्थित विष्णु एवं शनिदेव मंदिर सहित प्राचीन काली मां मंदिरों में भी श्रद्धालुओं ने दर्शन पूजन किया। इसके पहले सोरहिया व्रत का संकल्प रखने वाली महिलाओं ने अंतिम दिन जिउतिया का निर्जला व्रत पूरे उत्साह से रखा। भोर में स्नान ध्यान के बाद महिलाओं ने तोरई या सतपुतिया निगल कर व्रत की शुरुआत की।

जिउतिया व्रत को लेकर जिले के ग्रामीण अंचल में भी महिलाओं में उत्साह दिखा। संतान की लंबी उम्र के लिए माताओं ने व्रत रहकर विधिवत पूजा अर्चन की। चौबेपुर, चोलापुर, दानगंज , नियार, हाजीपुर, अजगरा, लोहता, सुरही, बनकट, कोरौताबाजार, राजातालाब, जक्खिनी, मातल देई, दीपापुर, भीम चंडी, जयापुर, चंदापुर, रानी बाजार, कचनार बीरभानपुर आदि गांव में महिलाओं ने समूह में भगवान जिउतवाहन की पूजा की। इसी तरह रोहनिया प्राचीन शिव धाम मंदिर दरेखू, बाणासुर मंदिर नरउर, शूलटंकेश्वर महादेव मंदिर माधोपुर में पूजन-अर्चन किया गया। व्रती महिलाओं ने सुबह जिउतिया भी गुथवाई। संतान की दीर्घायु एवं सुखी जीवन के लिए महिलाओं ने जिउतिया की लाल या पीले रंग की धागा अपने गले में धारण किया।