बिजली विभाग का झोल, शिकायत के बाद भी नहीं हटा पोल

बिजली विभाग का झोल, शिकायत के बाद भी नहीं हटा पोल
  • पोर्टल पर निस्तारण के बाद भी घर पर गिरा बिजली का खम्भा खोल रहा बिजली विभाग की पोल
  • पोल गिरने से लोहे की रेलिंग में होती है स्पार्किंग, महमूरगंज क्षेत्र के जक्खा तुलसीपुर का मामला

वाराणसी (रणभेरी): एक तरफ जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सभी विभागों को ईमानदारी से अपने दायित्वों को निर्वहन करने तथा संबंधित विभाग के समस्याओं व शिकायतों का त्वरित निस्तारण करने के निर्देश दे रहे हैं वहीं कुछ विभाग सिर्फ कागजों और पोर्टलों पर आमजन की समस्या का निस्तारण कर अपनी जिम्मेदारी को पूरा करने में व्यस्त है। पोर्टलों पर समस्या का त्वरित  निस्तारण करने में बिजली विभाग सबसे आगे है परंतु जमीनी हकीकत यह है कि शिकायतकर्ता द्वारा पोर्टल पर बिजली विभाग को बार बार शिकायत करने के बाद भी समस्या का तो निस्तारण नहीं होता लेकिन पोर्टल पर सब दुरुस्त हो जाता है।

कोई भी जिम्मेदार मौके पर जाकर समस्या का निस्तारण करना उचित नहीं समझते। बिजली विभाग के लापरवाही का एक ऐसा ही मामला महमूरगंज क्षेत्र के जक्खा तुलसीपुर का है जहां जर्जर बिजली का खंभा पिछले 15 दिनों से एक अपार्टमेंट पर गिरा हुआ है पर कोई सुध लेने वाला नहीं है। शिकायतकर्ता किशोर कुंडू ने बिजली विभाग के पोर्टल पर शिकायत दर्ज किया कि मेरे मकान के सामने स्थित एक बिजली का खंबा लगभग 15 दिन पूर्व जर्जर होकर मेरे मकान पर आ गिरा है। शिकायत में बताया गया कि मेरे मकान के बरामदे में लोहे की रेलिंग लगी हुई है, और इस भीषण गर्मी में कभी भी बिजली का तार पिघल सकता है। ऐसी स्थिति में कभी भी रेलिंग में करेंट उतरने का खतरा बना रहता है। 15 दिन बीत जाने के बाद भी ऐसी गंभीर समस्या का जमीनी निस्तारण नहीं हो सका लेकिन पोर्टल पर जिम्मेदारों ने समस्या का निस्तारण कर दिया।

 किशोर कुंडू ने बताया कि मेरे मकान के बरामदे में लोहे की रेलिंग लगी हुई है, जिसपर बिजली का जर्जर पोल आकर गिर गया है। पोल गिरने से रेलिंग पर करेंट उतरने का खतरा बना रहता है, क्योंकि उस खंबे पर हमेशा स्पार्किंग होती रहती है। किशोर कुंडू ने बताया कि इसकी शिकायत मैंने मोबाइल द्वारा क्षेत्र के एक्सईएन, एसडीओ व जेई से दस दिन पूर्व से ही कर रहा हूँ लेकिन संबंधित सभी अधिकारी केवल आश्वासन दे रहे है। अभी तक कोई अधिकारी मौके पर नहीं आएं। इसे विडंबना कहिए या लापरवाही लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जिम्मेदार सिर्फ कागजों और पोर्टलों पर ही आमजन की समस्या का त्वरित निस्तारण करते है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि अगर किन्हीं कारणों से मकान के रेलिंग पर करेंट उतरता है और कोई हादसा होता है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा !