शास्त्री घाट से जुलूस निकालकर पहुंचे प्रदर्शनकारी, सामान्य वर्ग के हितों की सुरक्षा और सवर्ण आयोग के गठन की उठाई मांग
वाराणसी (रणभेरी): विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए इक्विटी नियमों को लेकर वाराणसी में सोमवार को करणी सेना और विभिन्न सवर्ण संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। शास्त्री घाट से जुलूस निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने मुख्य द्वार पर रोक दिया। इस दौरान पुलिस और करणी सेना के पदाधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई। स्थिति के बीच पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।

प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से UGC के नए नियमों को वापस लेने के साथ देश और प्रदेश में सवर्ण आयोग के गठन की मांग की। उनका कहना था कि नए प्रावधानों में सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के हितों और शिकायतों के निस्तारण के दौरान उनके बचाव को लेकर पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई है।
शास्त्री घाट से कलेक्ट्रेट तक निकाला मार्च
सोमवार को विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता शास्त्री घाट पर एकत्र हुए। यहां से नारेबाजी करते हुए जुलूस के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से अपनी मांगों पर कार्रवाई करने की अपील की। हालांकि, कलेक्ट्रेट के प्रवेश द्वार पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया।
इस दौरान करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष और पुलिस के बीच बहस हुई। इसके बाद प्रदर्शनकारी सरकार के खिलाफ नारे लगाने लगे। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने का हवाला देते हुए कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। मौके पर सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे।
UGC के प्रावधानों पर जताई आपत्ति
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने जनवरी 2026 में जारी UGC के इक्विटी नियमों पर सवाल उठाए। उन्होंने इन नियमों को अन्यायपूर्ण बताते हुए आरोप लगाया कि जातिगत भेदभाव से संबंधित शिकायतों की प्रक्रिया में सामान्य वर्ग के छात्रों के हितों की रक्षा के लिए स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने आशंका जताई कि यदि किसी विद्यार्थी के खिलाफ झूठी शिकायत की जाती है, तो उसे जांच के दौरान अपना पक्ष रखने और निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित कराने में कठिनाई हो सकती है। हालांकि, ये आरोप प्रदर्शन कर रहे संगठनों की ओर से लगाए गए हैं।

सवर्ण आयोग के गठन की मांग
कार्यकर्ताओं ने कहा कि सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों और अन्य लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर सवर्ण आयोग का गठन किया जाना चाहिए। उन्होंने UGC के नए नियमों को वापस लेने की मांग दोहराई। प्रदर्शनकारियों ने इन प्रावधानों की तुलना ब्रिटिश शासन के रॉलेट एक्ट से करते हुए इसे अनुचित बताया। उनका कहना था कि किसी भी व्यवस्था में सभी वर्गों के अधिकारों और शिकायतों के निष्पक्ष निस्तारण का ध्यान रखा जाना चाहिए।
प्रदेश अध्यक्ष ने EWS के मुद्दे पर भी उठाए सवाल
करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष ने EWS यानी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के आरक्षण से संबंधित शर्तों में बदलाव की मांग भी उठाई। उन्होंने दावा किया कि 19 दिसंबर 2025 को इस मुद्दे पर कार्यक्रम प्रस्तावित था। उनका कहना था कि जमीन, प्लॉट और मकान से जुड़ी शर्तों को सरल करने तथा शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग की गई थी।
प्रदेश अध्यक्ष के मुताबिक, 17 दिसंबर को पुलिस कमिश्नर और जिलाधिकारी के कार्यालय में इस विषय पर बातचीत हुई थी। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री से वार्ता के बाद मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन उनके अनुसार अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि वह इसी मुद्दे पर अपनी बात रखने और पहले दिए गए आश्वासन की स्थिति जानने के लिए वाराणसी पहुंचे थे। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने का विरोध किया।
करणी सेना की ओर से EWS से संबंधित पुरानी व्यवस्था बहाल करने और 13 जनवरी को जारी अधिसूचना वापस लेने की मांग भी की गई। हालांकि, संबंधित अधिसूचना के वर्ष और प्रावधानों को लेकर प्रदर्शन के दौरान दिए गए बयान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अनुमति नहीं मिलने पर रोका गया प्रदर्शन: पुलिस
एडीसीपी वरुणा लिपि नगायच ने बताया कि करणी सेना के कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन के लिए पहुंच रहे थे, जबकि इसके लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी। इसी कारण उन्हें प्रवेश द्वार पर रोका गया। पुलिस अधिकारी के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर दो प्रिजन वैन से संबंधित थाने भेजा गया है। मामले में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
