(रणभेरी): उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए अपनी खेल नीति में महत्वपूर्ण बदलाव करने जा रहा है। प्रस्तावित नई व्यवस्था के तहत राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को बोर्ड परीक्षाओं में अतिरिक्त अंक प्रदान किए जाएंगे। परिषद ने इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन के पास मंजूरी के लिए भेज दिया है।
यदि इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिल जाती है, तो हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के हजारों खिलाड़ियों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा। नई व्यवस्था का उद्देश्य पढ़ाई और खेल दोनों क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहन देना है।
खेल उपलब्धियों के आधार पर मिलेगा लाभ
प्रस्ताव के अनुसार खिलाड़ियों को उनके खेल स्तर और प्रतियोगिताओं में प्राप्त उपलब्धियों के आधार पर अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे। राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय अथवा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को पांच अंक तक का लाभ मिल सकेगा। इसी प्रकार राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को सात अंक प्रदान किए जाएंगे। यदि कोई छात्र राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीतता है, तो उसे दस अतिरिक्त अंक मिलेंगे।
अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले छात्रों को और अधिक लाभ देने की योजना बनाई गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर केवल प्रतिभाग करने पर 15 अंक तथा पदक हासिल करने पर अधिकतम 20 अंक तक दिए जाने का प्रस्ताव रखा गया है।
फेल होने से बच सकेंगे खिलाड़ी
नई नीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इन अतिरिक्त अंकों का उपयोग ग्रेस मार्क्स के रूप में भी किया जा सकेगा। ऐसे छात्र जो किसी एक या दो विषयों में कुछ अंकों की कमी के कारण असफल हो जाते हैं, उन्हें इन अंकों का लाभ मिल सकेगा। बोर्ड के प्रस्ताव के अनुसार अधिकतम दो विषयों में ग्रेस मार्क्स का उपयोग किया जा सकेगा। इससे खेल गतिविधियों में सक्रिय विद्यार्थियों का शैक्षणिक वर्ष खराब होने से बच सकेगा और उन्हें दोबारा परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
मार्कशीट में अलग दिखाई देंगे अतिरिक्त अंक
बोर्ड ने अंक प्रदर्शित करने के लिए भी अलग व्यवस्था प्रस्तावित की है। हाईस्कूल के विद्यार्थियों की अंकतालिका में खेल उपलब्धियों से प्राप्त अतिरिक्त अंक अलग से दर्ज किए जाएंगे, ताकि उनकी खेल प्रतिभा का स्पष्ट उल्लेख हो सके। वहीं इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों के लिए ये अंक कुल प्राप्तांकों में शामिल कर दिए जाएंगे। इससे उनके समग्र परिणाम पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
एक से अधिक प्रमाणपत्र होने पर क्या होगा?
कई खिलाड़ियों के पास अलग-अलग प्रतियोगिताओं के अनेक प्रमाणपत्र होते हैं। ऐसे मामलों में छात्र को सभी प्रमाणपत्रों का संयुक्त लाभ नहीं मिलेगा। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि विद्यार्थी को केवल उसी प्रमाणपत्र के आधार पर अंक दिए जाएंगे, जिससे उसे सबसे अधिक लाभ प्राप्त हो सके।
केवल मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र ही होंगे स्वीकार
अतिरिक्त अंकों का लाभ लेने के लिए केवल निर्धारित संस्थाओं द्वारा जारी प्रमाणपत्र ही मान्य होंगे। इनमें स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजीएफआई), राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) तथा स्काउट एवं गाइड से संबंधित प्रतियोगिताओं के प्रमाणपत्र शामिल हैं। इसके अलावा विद्यार्थियों के पास परीक्षा वर्ष की 31 जनवरी तक जारी वैध प्रमाणपत्र होना अनिवार्य होगा। निर्धारित तिथि के बाद प्राप्त प्रमाणपत्रों पर विचार नहीं किया जाएगा।
खेल और शिक्षा को मिलेगा नया प्रोत्साहन
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल छात्रों को खेलों में अधिक सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करेगी। साथ ही पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाने में भी मदद मिलेगी। यदि प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलती है, तो आने वाले वर्षों में यूपी बोर्ड के खिलाड़ियों को अपनी खेल प्रतिभा का सीधा शैक्षणिक लाभ प्राप्त हो सकेगा।
