वाराणसी (रणभेरी संवाददाता)। मार्च की शुरुआत में काशी ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सांसद आदर्श गांव डोमरी और सूजाबाद की लगभग 350 एकड़ भूमि पर एक घंटे के भीतर 2,51,446 पौधे रोपकर चीन का विश्व रिकॉर्ड तोड़ने का दावा किया गया। ड्रोन कैमरों, डिजिटल एप और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की टीम की निगरानी में हुई गणना के बाद गिनीज के निर्णायक ऋषि नाथ ने महापौर अशोक कुमार तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल को विश्व रिकॉर्ड का प्रमाण पत्र भी सौंपा।
लेकिन अब यही डोमरी की जमीन एक अलग कारण से सुर्खियों में है। जिन खेतों पर विश्व रिकॉर्ड का दावा किया गया, उन्हीं भूमि के स्वामित्व और राजस्व अभिलेखों को लेकर किसान इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण में हैं। इस मामले में न्यायालय के दो लगातार आदेशों ने पूरे घटनाक्रम को गंभीर कानूनी मोड़ पर ला खड़ा किया है।

राम दुलार एवं 47 अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2 जून 2026 को किसानों को उत्तर प्रदेश भूमि राजस्व अधिनियम, 1901 की धारा-219 के तहत पुनरीक्षण दाखिल करने की अनुमति दी। अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता तीन सप्ताह के भीतर पुनरीक्षण एवं स्थगन प्रार्थना पत्र दाखिल करें। साथ ही यह भी आदेश दिया कि स्टे आवेदन पर निर्णय होने अथवा आठ सप्ताह की अवधि तक किसानों के विरुद्ध कोई दमनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
इसके बाद किसानों ने पुनरीक्षण और स्थगन प्रार्थना पत्र दाखिल कर दिया। बावजूद इसके, किसानों का आरोप है कि विवादित भूमि पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई जारी रही। इस शिकायत पर दायर अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक अन्य पीठ ने प्रथम दृष्टया माना कि न्यायालय के आदेश की अवहेलना होती प्रतीत होती है और संबंधित विपक्षी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
डोमरी की यह जमीन अब केवल विश्व रिकॉर्ड का प्रतीक नहीं रह गई है, बल्कि न्यायिक परीक्षण का विषय भी बन चुकी है। एक ओर इसी भूमि पर लाखों पौधे लगाकर काशी ने अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल की, वहीं दूसरी ओर इसी भूमि को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच चल रहा कानूनी विवाद अब इलाहाबाद हाईकोर्ट की निगरानी में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में इस प्रकरण का अंतिम न्यायिक परिणाम न केवल संबंधित पक्षों के लिए, बल्कि पूरे मामले की प्रशासनिक वैधानिकता के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाएगा।
हाईकोर्ट के संरक्षण आदेश के बाद भी ध्वस्तीकरण का आरोप
- अवमानना में अधिकारियों को नोटिस
- जिन 350 एकड़ जमीन पर 2.51 लाख पौधे लगाकर चीन का रिकॉर्ड टूटा, उसी भूमि विवाद में हाईकोर्ट ने पहले किसानों को संरक्षण दिया, फिर अवमानना मामले में अधिकारियों को नोटिस जारी किया
- प्रधानमंत्री के सांसद आदर्श गांव डोमरी और सूजाबाद में बना था विश्व रिकॉर्ड, अब वही जमीन न्यायिक विवाद के केंद्र में
- हाईकोर्ट ने किसानों को धारा-219 के तहत पुनरीक्षण का दिया अवसर, आठ सप्ताह तक दमनात्मक कार्रवाई पर लगाई रोक
- संरक्षण आदेश के बावजूद कार्रवाई के आरोप पर अवमानना याचिका में कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना- मामला गंभीर
- अंतिम फैसला अभी बाकी, लेकिन डोमरी की जमीन अब प्रशासनिक कार्रवाई और न्यायिक कसौटी-दोनों की परीक्षा बन चुकी है
