सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और दिल्ली सरकार से मांगा जवाब

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और दिल्ली सरकार से मांगा जवाब

(रणभेरी): एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को गंभीर चिंता जताई। अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार से गुरुवार सुबह तक जवाब दाखिल करने को कहा है। यह सुनवाई उस जनहित याचिका पर हुई, जिसमें वांगचुक को तत्काल चिकित्सा सहायता, जरूरी इलाज और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।

याचिका में कहा गया है कि वांगचुक लंबे समय से भूख हड़ताल पर हैं और उनकी तबीयत लगातार कमजोर होती जा रही है। ऐसे में सरकार को तुरंत हस्तक्षेप कर उन्हें आवश्यक मेडिकल सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और दिल्ली सरकार से मांगा जवाब

18 दिनों से जारी है अनशन

सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 18 दिनों से भूख हड़ताल कर रहे हैं। उनका यह आंदोलन परीक्षाओं में अनियमितताओं और NEET पेपर लीक जैसे मुद्दों के विरोध में बताया जा रहा है। अनशन के कारण उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ा है। याचिका में दावा किया गया है कि भूख हड़ताल शुरू करने के बाद उनका वजन करीब 8 किलो से ज्यादा कम हो चुका है। उन्हें लो ब्लड शुगर, चक्कर आना, अत्यधिक कमजोरी और मांसपेशियों में कमजोरी जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

याचिका में सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग

जनहित याचिका में अदालत से अपील की गई है कि सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह वांगचुक को तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सुविधा, जीवनरक्षक उपचार और आवश्यक पोषण उपलब्ध कराए।

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और दिल्ली सरकार से मांगा जवाब

याचिका में यह भी कहा गया है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन किसी व्यक्ति का जीवन खतरे में पड़ने की स्थिति में सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह उसकी सुरक्षा और इलाज सुनिश्चित करे। इसके साथ ही केंद्र सरकार से आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर बातचीत शुरू करने की मांग भी की गई है, ताकि समाधान की दिशा में कदम बढ़ाए जा सकें।

लद्दाख के मुद्दे को लेकर पहले भी आंदोलन कर चुके हैं वांगचुक

सोनम वांगचुक इससे पहले लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और क्षेत्र के लिए संवैधानिक सुरक्षा की मांग को लेकर आंदोलन कर चुके हैं। इस दौरान उन्हें लंबे समय तक हिरासत में भी रखा गया था।

उनके आंदोलन के बीच सितंबर 2025 में लेह में हिंसक घटनाएं हुई थीं, जिसमें कई लोगों की मौत और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। सरकार ने इन घटनाओं के बाद वांगचुक पर हिंसा भड़काने के आरोप लगाए थे। इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लेकर जोधपुर जेल भेजा गया था। वांगचुक करीब 170 दिनों तक जेल में रहे।

अब नजर हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर

दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब केंद्र और दिल्ली सरकार के जवाब का इंतजार है। अदालत के सामने मुख्य सवाल यह है कि लंबे समय से अनशन कर रहे वांगचुक की सेहत को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

Share this news

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *