वाराणसी (रणभेरी): केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने के बाद वाराणसी में आंदोलनरत छात्रों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला। प्रदर्शन में शामिल छात्र-छात्राओं ने इसे अपने संघर्ष की पहली बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि लंबे समय से उठाई जा रही आवाज का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। उनका कहना है कि लगातार आंदोलन और लोकतांत्रिक तरीके से किए गए विरोध के कारण सरकार को आखिरकार बड़ा फैसला लेना पड़ा।
आंदोलनकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल एक मंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाना है। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक जैसे मामलों ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। ऐसे में दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई, परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाने और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है।
छात्रों ने कहा कि उनकी कई अन्य मांगें अभी भी लंबित हैं, जिन पर सरकार को गंभीरता के साथ निर्णय लेना चाहिए। उनका कहना है कि जब तक शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय नहीं होती और परीक्षाओं को निष्पक्ष एवं विश्वसनीय बनाने के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू नहीं की जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को लगातार उठाते रहेंगे। उनका कहना है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। छात्रों ने उम्मीद जताई कि सरकार शेष मांगों पर भी जल्द सकारात्मक निर्णय लेकर शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधार सुनिश्चित करेगी।
