51 क्विंटल फूलों से सजा बाबा काल भैरव का दरबार, 112 साल पुरानी परंपरा में समृद्धि भैरव के रूप में हुए दर्शन

51 क्विंटल फूलों से सजा बाबा काल भैरव का दरबार, 112 साल पुरानी परंपरा में समृद्धि भैरव के रूप में हुए दर्शन

वाराणसी (रणभेरी): काशी में मंगलवार का दिन बाबा काल भैरव के भक्तों के लिए बेहद खास रहा। प्रसिद्ध बाबा काल भैरव मंदिर में विशेष श्रृंगार और पूजन के दौरान श्रद्धा का अनूठा दृश्य देखने को मिला। बाबा के दरबार को करीब 51 क्विंटल रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया। फूलों की मालाओं, झालरों और आकर्षक सजावटी स्वरूप ने मंदिर परिसर की भव्यता को और बढ़ा दिया।

सुबह से ही बाबा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। समय बीतने के साथ मंदिर में भक्तों की संख्या बढ़ती गई और दर्शन के लिए लंबी कतारें लग गईं। श्रद्धालु अपनी बारी का इंतजार करते हुए बाबा काल भैरव के जयकारे लगाते नजर आए। पूरे मंदिर परिसर में धार्मिक वातावरण बना रहा।

112 साल पुरानी श्रृंगार परंपरा का हुआ पालन

मंगलवार को आयोजित विशेष कार्यक्रम की सबसे खास बात बाबा काल भैरव की 112 वर्ष पुरानी श्रृंगार परंपरा का निर्वहन रहा। इस परंपरा के तहत बाबा को इस बार एक विशेष स्वरूप में सजाया गया।

मंदिर के मुख्य पुजारी बबलू मिश्रा के अनुसार, बाबा काल भैरव का श्रृंगार समय-समय पर अलग-अलग स्वरूपों में किया जाता है। इस बार बाबा को शंकर जी के स्वरूप में सजाया गया और उन्हें समृद्धि भैरव के रूप में भक्तों के सामने प्रस्तुत किया गया।

51 क्विंटल फूलों से सजा बाबा काल भैरव का दरबार, 112 साल पुरानी परंपरा में समृद्धि भैरव के रूप में हुए दर्शन

विशेष श्रृंगार के दौरान बाबा के विग्रह को आकर्षक वस्त्रों और फूलों से सजाया गया। मंदिर में मौजूद श्रद्धालु बाबा के इस अलौकिक स्वरूप को देखकर भाव-विभोर नजर आए।

समृद्धि भैरव के दर्शन की धार्मिक मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बाबा काल भैरव के इस विशेष स्वरूप के दर्शन को शुभ माना जाता है। मान्यता है कि समृद्धि भैरव के दर्शन करने वाले भक्तों पर बाबा की कृपा बनी रहती है और उनके जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का आगमन होता है।

51 क्विंटल फूलों से सजा बाबा काल भैरव का दरबार, 112 साल पुरानी परंपरा में समृद्धि भैरव के रूप में हुए दर्शन

इसी आस्था के चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंगलवार को बाबा के विशेष श्रृंगार के दर्शन करने पहुंचे। कई भक्तों ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली के लिए प्रार्थना की।

56 प्रकार के व्यंजनों का लगाया गया भोग

विशेष श्रृंगार के साथ बाबा काल भैरव को विधि-विधान से भोग भी अर्पित किया गया। मंदिर की परंपरा के अनुसार बाबा को विभिन्न प्रकार के पकवानों के साथ कुल 56 प्रकार के भोग लगाए गए।

51 क्विंटल फूलों से सजा बाबा काल भैरव का दरबार, 112 साल पुरानी परंपरा में समृद्धि भैरव के रूप में हुए दर्शन

भोग में पंचमेवा समेत कई तरह के पारंपरिक व्यंजन शामिल रहे। पूजा-अर्चना और भोग की प्रक्रिया धार्मिक विधि के अनुसार संपन्न कराई गई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर बाबा का आशीर्वाद लिया।

दर्शन के लिए उमड़ा भक्तों का सैलाब

बाबा काल भैरव के विशेष श्रृंगार की जानकारी मिलने के बाद मंगलवार को मंदिर में सामान्य दिनों की अपेक्षा श्रद्धालुओं की अच्छी-खासी भीड़ दिखाई दी। सुबह से लेकर दिनभर भक्तों का मंदिर पहुंचने का सिलसिला जारी रहा।

मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना रहा। कतार में खड़े श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए उत्साहित नजर आए। दर्शन के बाद भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया और बाबा काल भैरव से अपने परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।

काशी की धार्मिक परंपराओं में बाबा काल भैरव का विशेष स्थान माना जाता है। ऐसे में 112 साल पुरानी श्रृंगार परंपरा के तहत हुए इस आयोजन ने मंगलवार को बाबा के दरबार की आध्यात्मिक और धार्मिक छटा को और खास बना दिया।

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