(रणभेरी): तमिलनाडु विधानसभा में सोमवार को मुख्यमंत्री विजय ने महिला और बाल सुरक्षा को लेकर अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि महिलाओं के प्रति अपमानजनक या आपत्तिजनक भाषा को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन की अभिनेत्री त्रिशा से जुड़ी कथित डबल मीनिंग टिप्पणी को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विवाद चल रहा है।
विधानसभा में मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि किसी भी राज्य के विकास के लिए मजबूत कानून-व्यवस्था बेहद जरूरी है। उन्होंने पुलिस की भूमिका को केवल अपराधियों की गिरफ्तारी तक सीमित मानने के बजाय इसे राज्य के समग्र विकास से जोड़कर देखा।
‘पुलिस सिर्फ गिरफ्तारी करने वाली संस्था नहीं’
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस की जिम्मेदारी कानून तोड़ने वालों पर कार्रवाई करने के साथ-साथ प्रदेश में ऐसा माहौल तैयार करना भी है, जिसमें आम नागरिक सुरक्षित महसूस करें और विकास की गतिविधियां बिना बाधा आगे बढ़ सकें।
विजय के मुताबिक, कानून का पालन करने वाले नागरिकों के लिए पुलिस एक सहयोगी और मित्र की भूमिका निभाती है। वहीं, कानून की अनदेखी करने वालों के खिलाफ पुलिस को सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर भी स्पष्ट संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस को अपना काम स्वतंत्र रूप से करने दिया जाना चाहिए और राजनीतिक नेताओं तथा अधिकारियों को पुलिस की कार्यप्रणाली में अनावश्यक दखल नहीं देना चाहिए।
उदयनिधि की कथित टिप्पणी को लेकर विवाद
मुख्यमंत्री का यह बयान नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन से जुड़े हालिया विवाद की पृष्ठभूमि में आया है। मामला 3 अगस्त को तंजावुर में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। यह प्रदर्शन कावेरी जल विवाद के मुद्दे पर किया गया था।
प्रदर्शन के दौरान भीड़ में अभिनेत्री त्रिशा के नाम के नारे लगाए जाने का दावा किया गया। इसी दौरान उदयनिधि की ओर से एक ऐसी टिप्पणी किए जाने का आरोप लगा, जिसे बाद में डबल मीनिंग और महिला के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी के रूप में देखा गया।
विवाद बढ़ने के बाद उदयनिधि ने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि उनकी बात का संदर्भ कावेरी के पानी से था और उनका उद्देश्य किसी महिला का अपमान करना नहीं था।
4 अगस्त को पुलिस ने की पूछताछ
मामले में पुलिस ने 4 अगस्त को उदयनिधि स्टालिन से पूछताछ की। रिपोर्ट के मुताबिक, उनसे करीब आठ घंटे तक सवाल-जवाब किया गया। पूछताछ पूरी होने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। यह कार्रवाई मद्रास हाईकोर्ट से जुड़े आदेश के बाद हुई।
पुलिस कार्रवाई के बाद बाहर आए उदयनिधि ने सरकार और पुलिस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विजय सरकार की पुलिस ने उनके साथ ऐसा व्यवहार किया, जैसे वह किसी गंभीर अपराध में शामिल व्यक्ति हों।
उदयनिधि ने यह भी कहा कि उनका किसी महिला का अपमान करने का इरादा नहीं था और उनकी टिप्पणी को जिस तरह पेश किया जा रहा है, वह सही नहीं है।
विधानसभा में कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार का रुख
विधानसभा में विजय ने कानून-व्यवस्था को राज्य की विकास प्रक्रिया का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि निवेश, रोजगार, उद्योग और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सुरक्षित और स्थिर माहौल जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सरकार किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने संकेत दिया कि सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को भी अपनी भाषा और व्यवहार को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए।
विजय के बयान को मौजूदा राजनीतिक विवाद के बीच एक व्यापक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने एक तरफ महिला सुरक्षा और सम्मान को सरकार की प्राथमिकता बताया, वहीं दूसरी तरफ पुलिस को राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर कानून के अनुसार काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
विवाद का राजनीतिक असर
उदयनिधि स्टालिन से जुड़ा यह मामला अब केवल एक कथित टिप्पणी तक सीमित नहीं रहा है। इसके साथ महिला सम्मान, सार्वजनिक जीवन में नेताओं की भाषा, पुलिस की कार्रवाई और राजनीतिक हस्तक्षेप जैसे मुद्दे भी जुड़ गए हैं।
विधानसभा में मुख्यमंत्री विजय द्वारा महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर दिए गए बयान ने इस विवाद को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
