वाराणसी (रणभेरी) : सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज ने सोमवार को काशी पहुंचकर बाबा विश्वनाथ के दरबार में विधि-विधान से दर्शन-पूजन किया। उन्होंने भगवान शिव से देश में शांति, समृद्धि और खुशहाली बनाए रखने की कामना की। पूजा-अर्चना के बाद उन्होंने काशी की आध्यात्मिक महत्ता का उल्लेख करते हुए इसे भगवान शिव की नगरी बताया।
बाबा विश्वनाथ के दर्शन के दौरान उन्होंने देशवासियों के सुखी जीवन और राष्ट्र में आपसी भाईचारे की कामना की। मंदिर परिसर से बाहर निकलने के बाद उन्होंने काशी की धार्मिक परंपरा और सनातन संस्कृति का जिक्र किया। इस दौरान उन्होंने ‘हर हर महादेव’ और ‘शंभू काशी विश्वनाथ गंगे’ का उद्घोष भी किया।
देश में शांति और समृद्धि के लिए मांगा आशीर्वाद
ऋतेश्वर महाराज ने कहा कि काशी विश्वनाथ के दरबार में आने का उनका प्रमुख उद्देश्य राष्ट्र की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करना है। उन्होंने कामना की कि देश में किसी भी प्रकार की अशांति, हिंसा या दंगे की स्थिति उत्पन्न न हो और समाज के सभी वर्ग मिल-जुलकर रहें।
उन्होंने कहा कि भारत की उन्नति केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द और आपसी सहयोग से भी जुड़ी है। बाबा विश्वनाथ से उन्होंने देश में सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की प्रार्थना की।
राहुल गांधी के मांसाहार संबंधी बयान पर भी दी प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा भारत की बड़ी आबादी के मांस-मछली खाने को लेकर दिए गए बयान पर भी ऋतेश्वर महाराज ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यदि राहुल गांधी ने यह आंकड़ा बताया है तो संभव है कि उनके पास इसके पीछे कोई आंकड़ा या स्रोत रहा हो।
हालांकि, अपने व्यक्तिगत अनुभव का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भारत में आज भी बड़ी संख्या में लोग शाकाहारी भोजन को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने भारतीय परंपरा में अहिंसा और जीवों के प्रति दया को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सनातन संस्कृति में प्राणियों के प्रति करुणा की भावना को लंबे समय से महत्व दिया जाता रहा है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में खान-पान की परंपराएं एक जैसी नहीं हैं। विशेष रूप से जनजातीय और कुछ अन्य क्षेत्रों में स्थानीय परिस्थितियों तथा परंपराओं के अनुसार भोजन की अलग आदतें देखने को मिलती हैं। इसलिए पूरे देश के खान-पान को एक ही नजरिए से देखना उचित नहीं होगा।
काशी, अयोध्या और मथुरा का किया उल्लेख
सनातन धर्म से जुड़े प्रमुख धार्मिक केंद्रों की चर्चा करते हुए ऋतेश्वर महाराज ने काशी के साथ अयोध्या और मथुरा-वृंदावन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन धार्मिक स्थलों के साथ करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है।
उन्होंने कहा कि इन स्थानों का महत्व सिर्फ वहां मौजूद मंदिरों तक सीमित नहीं है। इनके साथ भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और सनातन जीवन पद्धति की गहरी भावनाएं जुड़ी हैं। यही कारण है कि इन स्थानों को लेकर लोगों की धार्मिक संवेदनाएं भी काफी प्रबल हैं।
ज्ञानवापी को लेकर बोले ऋतेश्वर महाराज
ज्ञानवापी परिसर से जुड़े विवाद पर पूछे गए सवाल पर ऋतेश्वर महाराज ने कहा कि इसके पीछे इतिहास की कई परिस्थितियां और घटनाएं रही हैं। उनके अनुसार, इन्हीं ऐतिहासिक परिस्थितियों के कारण वर्तमान समय में इस विषय को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के संवेदनशील विषयों का समाधान आपसी संवाद और सौहार्द के वातावरण में तलाशा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि संबंधित पक्ष मिलकर किसी समाधान तक पहुंचते हैं तो इससे समाज में आपसी विश्वास और सद्भाव को मजबूती मिल सकती है।
‘भगवा ज्ञान और वैराग्य का प्रतीक’
काशी की पहचान और भगवा ध्वज के सवाल पर ऋतेश्वर महाराज ने कहा कि काशी का आध्यात्मिक स्वरूप सदियों पुराना है। उन्होंने भगवा रंग को सूर्य, ज्ञान और वैराग्य से जोड़ते हुए कहा कि काशी लंबे समय से ज्ञान और साधना की भूमि रही है। उन्होंने कहा कि भारत का संवैधानिक राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा है, लेकिन भगवा रंग का भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में अलग स्थान है। उनके अनुसार, यह रंग त्याग, ज्ञान और सनातन परंपरा से जुड़ी भावनाओं का प्रतीक माना जाता है।
उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर और देश के अन्य तीर्थस्थलों के संदर्भ में कहा कि धार्मिक परंपराओं से जुड़े प्रतीकों का अपना आध्यात्मिक महत्व है। काशी को उन्होंने केवल एक मंदिर या धार्मिक स्थल के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, दर्शन और आध्यात्मिक चेतना के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में बताया।
सौहार्द और एकता बनाए रखने की अपील
ऋतेश्वर महाराज ने देशवासियों से आपसी एकता और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत में विभिन्न समुदाय और परंपराएं लंबे समय से साथ-साथ रही हैं। ऐसे में धार्मिक और सामाजिक मुद्दों का समाधान टकराव के बजाय संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए।
उन्होंने बाबा विश्वनाथ से प्रार्थना करते हुए कहा कि देश में खुशहाली बनी रहे, लोगों के बीच प्रेम और सद्भाव कायम हो तथा किसी भी हिस्से में अशांति या हिंसा की स्थिति पैदा न हो। उन्होंने कहा कि सभी लोग मिलकर देश की शांति, एकता और समृद्धि के लिए काम करें। काशी विश्वनाथ के दर्शन के दौरान उनके वक्तव्य में धर्म, संस्कृति, सामाजिक सौहार्द और राष्ट्र की खुशहाली जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से सामने आए।
