काशी के गंगा घाटों पर बढ़ी सुरक्षा: डूबने की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए बड़े इंतजाम

काशी के गंगा घाटों पर बढ़ी सुरक्षा: डूबने की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए बड़े इंतजाम

वाराणसी (रणभेरी): गंगा घाटों पर हर साल होने वाली डूबने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा योजना लागू करनी शुरू कर दी है। जल पुलिस की निगरानी में शहर के चिन्हित 19 संवेदनशील घाटों पर फ्लोटिंग बैरिकेडिंग और सुरक्षा जाल लगाए जा रहे हैं। इनमें से 11 घाटों पर यह व्यवस्था पहले ही स्थापित की जा चुकी है, जबकि बाकी स्थानों पर काम अंतिम चरण में है।

इसके अलावा, सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए 9 घाटों पर वॉच टावर और 8 घाटों पर फ्लोटिंग जेटी लगाने की तैयारी जारी है। खासतौर पर मई से जुलाई के बीच गंगा में नहाने के दौरान हादसों की संख्या बढ़ जाती है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाए गए हैं।

पिछले चार वर्षों के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। इस दौरान 152 लोगों की जान डूबने से जा चुकी है, जिनमें कई नाबालिग भी शामिल हैं। देशभर से काशी आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक अक्सर स्नान के दौरान दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं।

प्रशासन ने नमो घाट से रविदास घाट तक करीब 9 किलोमीटर के दायरे को संवेदनशील मानते हुए विशेष निगरानी शुरू की है। वहीं डोमरी गांव के सामने का क्षेत्र नया खतरे वाला स्थान बनकर उभरा है, जहां बीते दो महीनों में चार लोगों की मौत हो चुकी है।

इन घाटों पर लगेंगे वॉच टावर

तुलसी घाट-अस्सी घाट के बीच, शीतला घाट-अहिल्याबाई घाट के बीच, हनुमान घाट-शिवाला घाट के बीच, जानकी घाट, केदार घाट, मीर घाट, ललिता घाट, सिंधिया घाट और गाय घाट को इसमें शामिल किया गया है।

फ्लोटिंग बैरिकेडिंग और सुरक्षा जाल वाले घाट

अस्सी, तुलसी, जानकी, केदार, हनुमान, प्रह्लाद, चौसट्ठी, अहिल्याबाई, शीतला, प्रयाग, दशाश्वमेध, मीर, सिंधिया, पंचगंगा, गाय, त्रिलोचन, रानी, राजघाट और रामनगर बलुआ घाट पर यह व्यवस्था की जा रही है।

जहां लगेंगी फ्लोटिंग जेटी

तुलसी, जानकी, शिवाला-हनुमान, चौसट्ठी, मीर, अहिल्याबाई, प्रयाग और राजघाट पर जेटी स्थापित की जाएंगी।

वर्षवार डूबने की घटनाएं

2022: 37 मौतें
2023: 46 मौतें
2024: 37 मौतें
2025: 32 मौतें

प्रशासन का कहना है कि इन उपायों से न केवल दुर्घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। गंगा घाटों पर अब सुरक्षा व्यवस्था पहले से कहीं अधिक सख्त और व्यवस्थित नजर आएगी।

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