वाराणसी (रणभेरी): चुनाव संपन्न होने के बाद कमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में अचानक हुई भारी बढ़ोतरी ने छोटे और मध्यम कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। करीब ₹993 तक की बढ़ोतरी के बाद होटल, ढाबा और कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है।
कारोबारियों पर सीधा असर
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत ने उनके व्यवसाय को गंभीर संकट में डाल दिया है। कैटरिंग और फूड सर्विस से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि एक तरफ गैस के दाम बढ़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ समय पर आपूर्ति न मिलने से स्थिति और खराब हो रही है। कई व्यापारियों को मजबूरी में कम मुनाफे पर सेवाएं देनी पड़ रही हैं।

वैकल्पिक ईंधन का सहारा
गैस की कमी और महंगे दामों के चलते अब कई कारोबारी कोयला और इंडक्शन चूल्हे का सहारा लेने को मजबूर हैं। हालांकि, कोयले की कीमतों में भी बढ़ोतरी होने से उनकी लागत और बढ़ गई है। इससे छोटे व्यवसायों के लिए संचालन लगातार कठिन होता जा रहा है।

रेलवे कैटरिंग भी प्रभावित
रेलवे से जुड़े कैटरिंग कारोबार पर भी इस बढ़ोतरी का असर पड़ा है। अधिकारियों के अनुसार गैस की कीमत बढ़ने से लागत में इजाफा तो हुआ है, लेकिन रेलवे की तय दरों के चलते खाने के दाम बढ़ाना संभव नहीं है। ऐसे में पुराने रेट पर ही सेवाएं देने से नुकसान बढ़ रहा है। साथ ही, गैस आपूर्ति में देरी के कारण कई बार इंडक्शन पर खाना तैयार करना पड़ता है, जिससे समय पर सेवा देना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। देरी के चलते यात्रियों को भी असुविधा का सामना करना पड़ता है।

राहत की मांग
कारोबारियों का कहना है कि बढ़ती कीमतों और अनियमित आपूर्ति ने उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है। उन्होंने सरकार से जल्द हस्तक्षेप कर राहत देने की मांग की है, ताकि छोटे और मध्यम व्यवसायों को बचाया जा सके। कुल मिलाकर, कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी और आपूर्ति की समस्याओं ने कारोबार जगत में असंतोष पैदा कर दिया है और इसका असर रोजमर्रा के व्यवसाय पर साफ दिखाई दे रहा है।
