वाराणसी (रणभेरी): काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आईएमएस) में रैगिंग रोकने के लिए बनाई गई सख्त व्यवस्था का कुछ लोगों द्वारा गलत इस्तेमाल करने का मामला सामने आया है। रैगिंग की झूठी शिकायत दर्ज कराने का डर दिखाकर मेडिकल छात्रों से पैसे मांगने के दो मामले सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और एंटी रैगिंग कमेटी ने जांच तेज कर दी है।
प्रारंभिक जांच में एक कथित शिकायतकर्ता की पहचान संदिग्ध पाई गई है। जांच में सामने आया कि जिस युवती ने खुद को आईएमएस की रेजिडेंट डॉक्टर बताया था, वह उस विभाग में कार्यरत ही नहीं है। इसके बाद पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए संस्थान प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी है।
एक सप्ताह में सामने आए दो ब्लैकमेलिंग के मामले
आईएमएस की एंटी रैगिंग कमेटी के चेयरमैन प्रो. ललित मोहन अग्रवाल ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में कमेटी के पास ऐसे दो मामले पहुंचे हैं, जिनमें छात्रों को रैगिंग के झूठे आरोप में फंसाने की धमकी देकर आर्थिक दबाव बनाया गया।
उन्होंने बताया कि जांच के दौरान यह बात सामने आई कि शिकायत करने वाली युवती ने अपनी पहचान को लेकर गलत जानकारी दी थी। मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है और छात्रों से अपील की गई है कि वे इस तरह की किसी भी धमकी से डरें नहीं और तुरंत संस्थान को जानकारी दें।
खुद को स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की डॉक्टर बताया
मामला तब सामने आया जब शनिवार रात एंटी रैगिंग कमेटी के चेयरमैन को एक युवती का फोन आया। फोन करने वाली ने खुद को आईएमएस के गायनेकॉलोजी विभाग की रेजिडेंट डॉक्टर बताते हुए आरोप लगाया कि मेडिसिन विभाग के एक छात्र और उसके साथियों ने उसके साथ रैगिंग के दौरान दुर्व्यवहार किया है।
शिकायत को गंभीर मानते हुए प्रो. अग्रवाल ने तुरंत संबंधित विभागाध्यक्ष से संपर्क किया और युवती की जानकारी का सत्यापन कराया। जांच में पता चला कि विभाग में उस नाम की कोई रेजिडेंट डॉक्टर मौजूद नहीं है। इसके बाद मामले में संदेह बढ़ गया।
छात्र से पहले लिए थे दो हजार रुपये
जांच के दौरान संबंधित छात्र से बातचीत की गई तो उसने बताया कि उसे पहले भी इसी युवती का फोन आया था। छात्र के अनुसार, युवती ने रैगिंग की शिकायत दर्ज कराने की बात कहकर उसे डराया और दो हजार रुपये ले लिए थे।
छात्र ने बताया कि इसके बाद युवती ने दोबारा अधिक रकम की मांग शुरू कर दी। जब उसने पैसे देने से मना किया तो उसके खिलाफ एंटी रैगिंग कमेटी में शिकायत करने की बात कही गई।
एक और छात्र से भी पैसे लेने का आरोप
जांच में यह भी जानकारी मिली कि इसी तरह एक अन्य छात्र को भी कथित रूप से निशाना बनाया गया था। उससे भी शिकायत वापस लेने या कार्रवाई से बचने के नाम पर पैसे लिए जाने की बात सामने आई है। हालांकि दूसरा छात्र अभी तक डर और सामाजिक बदनामी की चिंता के कारण पुलिस या प्रशासन के सामने औपचारिक शिकायत दर्ज कराने के लिए आगे नहीं आया है।
लंका थाने में छात्र ने दी शिकायत
मामले में मेडिसिन विभाग के एक छात्र ने वाराणसी के लंका थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है। वहीं, आईएमएस के निदेशक प्रो. एसएन संखवार को भी पूरे घटनाक्रम की जानकारी दे दी गई है।
एंटी रैगिंग कमेटी ने छात्रों को किया सतर्क
एंटी रैगिंग कमेटी के चेयरमैन प्रो. ललित मोहन अग्रवाल ने छात्रों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति रैगिंग की शिकायत करने की धमकी देकर पैसे मांगता है या मानसिक दबाव बनाता है तो इसकी सूचना तुरंत संस्थान प्रशासन, एंटी रैगिंग कमेटी या पुलिस को दें।
उन्होंने कहा कि रैगिंग जैसी गंभीर व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, लेकिन किसी भी व्यक्ति को इसका दुरुपयोग कर ब्लैकमेल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। छात्रों को सलाह दी गई है कि वे किसी अनजान व्यक्ति की धमकी में आकर पैसे न दें और हर संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाएं।
