वाराणसी (रणभेरी): वाराणसी के लहरतारा–बौलिया इलाके में गुरुवार सुबह लोक निर्माण विभाग (PWD) ने अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कई अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर दिया। इस अभियान से पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, संबंधित भूमि सरकारी और वन विभाग की है, जिस पर बने मकान सड़क चौड़ीकरण परियोजना में बाधा बन रहे थे। विभाग ने वर्ष 2025 में ही करीब 100 मकानों को नोटिस जारी कर दिया था। लंबे समय तक मामला लंबित रहने के बाद गुरुवार सुबह करीब 8 बजे भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई शुरू की गई।

अभियान के दौरान तीन जेसीबी और एक पोकलेन मशीन की मदद से कुल 41 मकानों को गिराया गया। अधिकारियों का कहना है कि सभी प्रभावित लोगों को पहले ही नोटिस देकर चिन्हांकन किया जा चुका था और उसी के आधार पर कार्रवाई की गई।
वहीं, स्थानीय निवासियों ने प्रशासन की इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि उन्हें अपना सामान हटाने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया और अचानक सुबह बुलडोजर चला दिया गया। कई लोग अपने घर और दुकानों को बचाने के लिए गुहार लगाते रहे, लेकिन मशीनें बिना रुके चलती रहीं।
एक स्टेशनरी दुकानदार ने बताया कि उन्हें केवल आंशिक तोड़फोड़ की जानकारी दी गई थी, लेकिन पूरी दुकान ही ढहा दी गई, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि समय की मांग के बावजूद उनकी अपील पर ध्यान नहीं दिया गया।

कार्राई के दौरान कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया और स्थानीय लोगों तथा अधिकारियों के बीच तीखी बहस के साथ हल्की झड़प भी हुई। हालांकि, मौके पर तैनात पुलिस बल ने स्थिति को नियंत्रित रखा और अभियान जारी रहा। प्रशासन का कहना है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और सड़क परियोजना में बाधा बनने वाले सभी अवैध निर्माणों को हटाया जाएगा।
सड़क परियोजना का विवरण
शहर में यातायात व्यवस्था को सुधारने के उद्देश्य से सड़कों का चौड़ीकरण किया जा रहा है। इसी क्रम में मोहनसराय बाईपास से मुगलसराय तक 31 किलोमीटर लंबी छह लेन सड़क बनाई जा रही है। इस परियोजना के लिए राज्य सरकार ने लगभग 197.40 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं।
मोहनसराय बाईपास से बौलिया तिराहा तक का कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन इसके आगे का निर्माण कार्य जनवरी 2025 से रुका हुआ था। कारण यह है कि सड़क का अगला हिस्सा घनी आबादी वाले क्षेत्र से होकर गुजरता है। सर्वे के बाद विभाग ने करीब 100 घरों को चिन्हित कर नोटिस जारी किए थे।
इस मामले में जुलाई 2025 से लगातार मुनादी भी कराई जा रही थी। वहीं, इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी हलचल रही, जब एक सांसद ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी।
फिलहाल, प्रभावित लोग अपने पुनर्वास और हुए नुकसान को लेकर चिंता में हैं, जबकि प्रशासन परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए कार्रवाई जारी रखने की बात कह रहा है।
