- सड़कों पर खड़ी बसों से रोज लग रहा जाम, कार्रवाई के दावों के बीच प्रशासन की भूमिका पर सवाल
- प्रशासन मौन, नो-टॉलरेंस नीति के बावजूद सड़कों पर खड़ी हो रहीं दर्जनों निजी बसें
- पुलिस की भूमिका और अवैध वसूली और यात्रियों की सुरक्षा पर उठ रहे सवाल
- कार्रवाई के दावों के बीच बस संचालकों के हौसले बुलंद
वाराणसी (रणभेरी): मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों और अवैध बस अड्डों के खिलाफ चलाए गए अभियानों के बावजूद मंडुवाडीह क्षेत्र में नियम-कानूनों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। लहरतारा और चांदपुर इलाके में अवैध बस स्टैंड न केवल फल-फूल रहे हैं बल्कि यातायात व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती बन चुके हैं। सड़क किनारे खड़ी निजी बसें, यात्रियों की भीड़ और मनमानी ढंग से होने वाला संचालन प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। लहरतारा चौराहे से लेकर मंडुवाडीह और चांदपुर तक कई स्थानों पर निजी बसों का अस्थायी अड्डा बना हुआ है। यहां पूर्वांचल के विभिन्न जिलों के लिए चलने वाली बसें खुलेआम यात्रियों को बैठाती और उतारती देखी जा सकती हैं। बसों के सड़क पर खड़े होने से अक्सर लंबा जाम लग जाता है, जिससे आम नागरिकों, स्कूली बच्चों और मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध बस अड्डों के खिलाफ समय-समय पर अभियान चलाने की घोषणाएं तो होती हैं, लेकिन कार्रवाई कुछ दिनों तक सीमित रह जाती है। इसके बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन वास्तव में गंभीर होता तो प्रमुख मार्गों पर इस तरह बसों की कतारें दिखाई नहीं देतीं।
यातायात जानकारों का मानना है कि सड़क को बस स्टैंड के रूप में इस्तेमाल करना न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ाता है। बस चालक यात्रियों को बैठाने के लिए अचानक वाहन रोक देते हैं, जिससे पीछे चल रहे वाहनों को ब्रेक लगाना पड़ता है और हादसों का खतरा बना रहता है। कई बार यात्री भीड़भाड़ वाले मार्ग पर ही चढ़ते-उतरते हैं, जिससे उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है।

चांदपुर क्षेत्र में स्थिति और भी चिंताजनक बताई जा रही है। यहां सड़क किनारे खड़ी बसों के कारण स्थानीय व्यापारियों और दुकानदारों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दुकानों के सामने बसें खड़ी होने से ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होती है और क्षेत्र में अव्यवस्था का माहौल बना रहता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि मुख्यमंत्री द्वारा अवैध अतिक्रमण, अवैध पार्किंग और अवैध बस अड्डों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद इन स्थानों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो पा रही है।
परिवहन विभाग, यातायात पुलिस और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त जिम्मेदारी होने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। शहरवासियों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले दिनों में यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध बस अड्डों को तत्काल बंद कराया जाए, बसों के लिए निर्धारित स्थान सुनिश्चित किए जाएं और नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। फिलहाल लहरतारा और चांदपुर के अवैध बस स्टैंड प्रशासनिक दावों की पोल खोलते नजर आ रहे है।
