BHU में शुरू हुई ‘की-होल’ हार्ट बाईपास सर्जरी: छाती खोले बिना 8 सेंटीमीटर के चीरे से ऑपरेशन, 5वें दिन मरीज डिस्चार्ज

BHU में शुरू हुई ‘की-होल’ हार्ट बाईपास सर्जरी: छाती खोले बिना 8 सेंटीमीटर के चीरे से ऑपरेशन, 5वें दिन मरीज डिस्चार्ज

वाराणसी (रणभेरी): काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के सर सुंदरलाल चिकित्सालय में हार्ट सर्जरी के क्षेत्र में नई सुविधा शुरू हुई है। अस्पताल के कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी (CTVS) विभाग में पहली बार मिनिमली इनवेसिव कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी (MICS CABG) सफलतापूर्वक की गई। आम भाषा में इसे की-होल हार्ट सर्जरी कहा जाता है। खास बात यह रही कि पारंपरिक तरीके से छाती खोले बिना महज करीब 8 सेंटीमीटर के छोटे चीरे से मरीज की बाईपास सर्जरी की गई। ऑपरेशन के बाद मरीज की रिकवरी अच्छी रही और पांचवें दिन उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

वाराणसी निवासी 52 वर्षीय मरीज की हृदय की धमनियों में गंभीर ब्लॉकेज था। धमनियों में कैल्शियम जमा होने के कारण समस्या और जटिल थी। मरीज को बार-बार सीने में दर्द हो रहा था और हार्ट अटैक की समस्या भी हो चुकी थी। जांच के बाद डॉक्टरों ने MICS CABG के जरिए बाईपास सर्जरी करने का निर्णय लिया।

BHU में शुरू हुई ‘की-होल’ हार्ट बाईपास सर्जरी: छाती खोले बिना 8 सेंटीमीटर के चीरे से ऑपरेशन, 5वें दिन मरीज डिस्चार्ज

स्टर्नम काटे बिना पसलियों के बीच से सर्जरी

आमतौर पर कोरोनरी बाईपास सर्जरी के दौरान छाती के बीच की हड्डी (स्टर्नम) को काटकर छाती खोली जाती है। इसके बाद हृदय की धमनियों में बाईपास किया जाता है। MICS तकनीक में छाती के बाईं ओर पसलियों के बीच छोटा चीरा लगाकर सर्जरी की जाती है। इससे बड़ा घाव नहीं बनता और शरीर पर सर्जरी का निशान भी अपेक्षाकृत छोटा रहता है।

डॉक्टरों के अनुसार, इस तकनीक में बड़ा चीरा नहीं लगाने के कारण मरीज को दर्द अपेक्षाकृत कम होता है और रिकवरी भी तेजी से होती है। सामान्य स्थिति में मरीज 7 से 10 दिन में अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट सकता है। सर्जरी के बाद मरीज के तीन से चार फॉलोअप किए गए, जिसमें उसकी स्थिति सामान्य पाई गई। अब मरीज सामान्य जीवन जी रहा है।

पूर्वांचल में BHU की टीम ने पहली बार की MICS CABG

सर सुंदरलाल चिकित्सालय के अनुसार, पूर्वांचल में अस्पताल की अपनी CTVS टीम ने पहली बार इस तकनीक से कोरोनरी बाईपास सर्जरी की है। MICS तकनीक से अस्पताल में पहले से हार्ट वाल्व और जन्मजात हृदय रोगों की सर्जरी की जा रही है। अब कोरोनरी बाईपास सर्जरी भी इस तकनीक से शुरू हो गई है। इससे पूर्वांचल के मरीजों को आधुनिक हार्ट सर्जरी के लिए बड़े महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।

सर्जरी डॉ. अरविंद पांडेय के नेतृत्व में की गई। CTVS टीम में डॉ. नरेंद्र नाथ दास और डॉ. किनीशों शामिल रहे। एनेस्थीसियोलॉजी टीम से डॉ. संजीव, डॉ. सोनल और डॉ. सोरिंग ने सहयोग किया। विभागाध्यक्ष प्रो. सिद्धार्थ लखोटिया, एनेस्थीसियोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. एपी सिंह और अस्पताल प्रशासन के मार्गदर्शन व सहयोग से सर्जरी सफल हुई।

Share this news

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *