वाराणसी में बड़े जुआ अड्डे पर छापा, 47 जुआरी गिरफ्तार; कोर्ट से 20-20 हजार के बंधपत्र पर रिहाई

वाराणसी में बड़े जुआ अड्डे पर छापा, 47 जुआरी गिरफ्तार; कोर्ट से 20-20 हजार के बंधपत्र पर रिहाई

वाराणसी (रणभेरी): सिगरा थाना क्षेत्र के रथयात्रा इलाके में एक बंद मकान के भीतर संचालित कथित जुआ अड्डे का पुलिस ने भंडाफोड़ किया। एसओजी-2 और सिगरा पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में मौके से 47 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी, मोबाइल फोन और वाहन भी बरामद किए गए।

गिरफ्तार किए गए लोगों में वाराणसी के अलावा चंदौली, भदोही, आजमगढ़, सोनभद्र, प्रयागराज और मिर्जापुर के लोग शामिल बताए गए हैं। पुलिस का कहना है कि इस स्थान पर दूसरे जिलों से भी लोग जुआ खेलने पहुंचते थे।

दो कथित संचालक गिरफ्तार, तीसरे की तलाश

पुलिस की कार्रवाई में जुआ खिलाने के कथित मास्टरमाइंड रोशन और रफीक को भी पकड़ा गया। पुलिस के अनुसार, दोनों के साथ विजय नामक व्यक्ति भी इस गतिविधि से जुड़ा था, लेकिन वह कार्रवाई के दौरान पुलिस के हाथ नहीं लगा। उसकी तलाश जारी बताई गई है।

जांच में यह भी सामने आया कि जिस मकान में जुआ चल रहा था, उसे विशाल सिंह नामक व्यक्ति ने लीज पर लिया था। पुलिस अब पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों और उनकी भूमिका की पड़ताल कर रही है।

वाराणसी में बड़े जुआ अड्डे पर छापा, 47 जुआरी गिरफ्तार; कोर्ट से 20-20 हजार के बंधपत्र पर रिहाई

सार्वजनिक जुआ अधिनियम के तहत मुकदमा

पुलिस ने मामले में सार्वजनिक जुआ अधिनियम की धारा 3/4 के तहत मुकदमा दर्ज किया। बुधवार रात पकड़े गए आरोपियों का गुरुवार को मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उन्हें एसीजेएम-4 की अदालत में पेश किया गया।

पुलिस की ओर से आरोपियों को जेल भेजने की तैयारी की गई थी, लेकिन अदालत ने सभी 47 आरोपियों को 20-20 हजार रुपये के बंधपत्र पर रिहा कर दिया। इसके साथ ही जुआ संचालन के आरोप में पकड़े गए रोशन और रफीक को भी अदालत से राहत मिल गई।

संगठित अपराध की कार्रवाई की बात कही गई थी

गिरफ्तारी के बाद डीसीपी क्राइम नीतू कादयान ने कहा था कि जुए के इस नेटवर्क के खिलाफ सामान्य जुआ अधिनियम से आगे बढ़कर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने संगठित अपराध से संबंधित प्रावधानों और गैंगस्टर एक्ट के इस्तेमाल की बात कही थी।

डीसीपी के मुताबिक, जुए के मामलों में अपेक्षाकृत कम सजा होने के कारण आरोपियों को जल्द जमानत मिलने की स्थिति बनती है। इसी वजह से नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई के लिए भारतीय न्याय संहिता के संबंधित प्रावधानों के साथ संपत्ति कुर्की जैसी कार्रवाई किए जाने की बात कही गई थी।

कार्रवाई और दर्ज मुकदमे में अंतर पर उठे सवाल

पुलिस अधिकारियों की ओर से संगठित अपराध के प्रावधानों के तहत कार्रवाई के संकेत दिए जाने के बावजूद इस मामले में सिगरा थाने में फिलहाल सार्वजनिक जुआ अधिनियम की धारा 3/4 के तहत ही मुकदमा दर्ज किया गया। इसी आधार पर आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें बंधपत्र पर रिहा कर दिया गया।

मामले ने पुलिस की कार्रवाई और मुकदमे में लगाई गई धाराओं के बीच अंतर को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब पुलिस की आगे की जांच और फरार बताए जा रहे विजय की गिरफ्तारी के बाद इस नेटवर्क पर क्या कार्रवाई होती है, यह देखने वाली बात होगी।

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