शिव की काशी में शक्तिपर्व की धूम

वाराणसी (रणभेरी सं.)। शिव की नगरी काशी शारदीय नवरात्र की प्रतिपदा से शक्ति की आराधना में लीन हो जाएगी। हर-हर महादेव के जयघोष के साथ ही जय मां दुर्गे के जयकारे भी सुनाई देंगे। पहली बार श्री काशी विश्वनाथ धाम के प्रांगण में कलश स्थापना होगी और नौ दिनों तक सप्तशती के ओजस मंत्र से धाम गुंजायमान होगा। इसके साथ ही शहर के पांच स्थानों पर मां दुर्गा की प्राण प्रतिष्ठा होगी। तीन से 11 अक्तूबर तक मां दुर्गा की आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्र मनाया जाएगा। अश्विन शुक्ल प्रतिपदा तीन अक्तूबर से नवरात्र शुरू होगा। इस बार नवरात्र में चतुर्थी तिथि की बढ़ोत्तरी और नवमी तिथि का क्षय है। इसलिए 11 अक्तूबर को ही महाष्टमी व महानवमी व्रत रखा जाएगा। तीन अक्तूबर को कलश स्थापना का मुहूर्त सुबह 6:07 बजे से सुबह 9:30 बजे तक रहेगा। इसके बाद अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:37 बजे से 12:23 बजे तक रहेगा। हालांकि सुबह से शाम तक घट स्थापना कभी भी की जा सकती है। शास्त्रानुसार सुबह घट स्थापना का विशेष महत्व है। नवरात्र के पहले दिन नवापुरा, दारानगर, सुड़िया, गायघाट और टाउनहॉल के पंडाल में प्रतिमाएं स्थापित हो जाएंगी। कलश स्थापना के साथ ही नौ दिवसीय अनुष्ठान भी शुरू हो जाएंगे। शहर के दूसरे पंडालों को भी अंतिम स्वरूप देने के साथ षष्ठी तिथि से पंडालों में प्रतिमाएं पहुंचने लगेंगी। 12 अक्तूबर को विजयदशमी का महापर्व मनाया जाएगा और प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ रावण दहन होगा।
कलश स्थापना की विधि
ज्योतिषाचार्य के अनुसार - एक दिन पहले जौ को पानी में भिगो कर रख लें और अंकुरित होने दें। उसके बाद अगले दिन यानी कलश स्थापना के समय पूजा घर को गंगाजल छिड़कर शुद्ध कर लें। फिर माता दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा लगाएं. बालू में पानी डालें और जौ को रख दें। जौ के ऊपर कलश में पानी भरकर स्थापित करें। कलश के ऊपर नारियल अवश्य रखें। साथ ही धूप और दीप अवश्य जलाएं। बाएं तरफ धूप और दाहिने तरफ दीप जलाएं। उसके बाद कलश में आम्र पल्लव रखें। साथ ही हर रोज पुष्प, नैवेद्य अर्पण करें। कलश स्थापना के बाद पूरे 9 दिन तक पाठ अवश्य करें।
नवरात्रि की पूजन सामग्री
मां दुर्गा की पूजा के लिए तस्वीर, लाल रंग का कपड़ा, फल, फूल, माला, आम का पत्ता, लौंग, सुपारी, इलायची, बंदनवार, हल्दी की गांठ, रोली, मौली, कमल गट्टा, सूखा नारियल, नैवेध, शहद, घी, शक्कर, पंचमेवा, जावित्री, गंगाजल, दूध, दही, नवग्रह पूजन के लिए रंग-बिरंगे चावल, धूप-दीप, वस्त्र और पूजा की थाली समेत सभी सामग्री एकत्रित कर लें।
मां दुर्गा को श्रृंगार सामग्री अर्पित करने के लिए लाल चुनरी, लाल चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी, काजल, मेहंदी, शीशा, बिछिया, इत्र, मंगलसूत्र, लिपस्टिक, नथ, गजरा, कंघी, कान की बली समेत 16 श्रृंगार की सामग्री रख लें
जिले भर में 648 स्थानों पर स्थापित होंगे पूजा पंडाल
दुर्गा पूजा के लिए जिले भर में 648 स्थानों पर पूजा पंडाल स्थापित किए जाएंगे। कहीं सौ फीट का पंडाल तो कहीं 70 फीट का पंडाल आकर्षण का केंद्र होगा। किसी पूजा पंडाल में मां न्यायाधीश के रूप में तो कहीं झूले पर, कहीं सिंहासन पर विराजमान होकर दर्शन देंगी।
पहले दिन अलईपुर में शैलपुत्री का दर्शन
नवरात्र के पहले दिन मुख निर्मालिका गौरी माता शैलपुत्री का दर्शन पूजन होगा। वरुणा नदी के किनारे अलईपुर स्थित इस मंदिर में माता दुर्गा के हिमालय पुत्री के रूप के दर्शन होंगे।
मां शैलपुत्री को प्रिय सफेद कनेर और लाल फूल चढ़ाए जाएंगे। यह भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां पर शैलपुत्री विराजमान हैं। यहां पर मंदिर और मूर्ति कब से स्थापित है इसकी कोई जानकारी नहीं