काव्य-रचना

काव्य-रचना

   बेटी की किलकारी...    

बेटी ने किलकारी ली
माँ का जन्म सफल हो गया
फिर
बेटी ने कहा कि सिर भारी
माँ दौड़ी बाम लगाने को
बेटी ने कहा
मन भारी
माँ का ह्दय कराह उठा
बेटी बोली
तबियत भारी
माँ मंदिर में बैठ गयी
शायद माँ तब खुश होती
जब बेटी कहती
पांव हैं भारी

प्रो विभा त्रिपाठी
विधि संकाय बीएचयू