काव्य रचना

काव्य रचना

   ..... जाम शहर ...    

घूमने निकलिए जरा शाम में शहर
शहर में जाम है या जाम में शहर !

सड़क का कलेजा फटा जा रहा है
इ रिक्शा में रिक्शा सटा जा रहा है 
चौराहे का सिग्नल पसीने पसीना
ट्रैफिक सिपाही का दूभर है जीना
ठेले और खोमचे के झाम में शहर
शहर में जाम है या जाम में शहर !

स्कूली बसों में जो बच्चे फंसे हैं
भीतर ही भीतर वो मन से कसे हैं
किसी को कराना है रूटीन चेकअप
ऑटो में मैडम का बिगड़ा है मेकअप
बेचा है सूकून सस्ते दाम में शहर
शहर में जाम है या जाम में शहर !

पैदल भी चलकर छला जा रहा है
कोई उल्टा उधर से चला आ रहा है
है जो कार महंगी तो हालत बुरी है
खरोंचे न कोई यहां छप्पन छुरी है 
कभी रहता नहीं है आराम में शहर
शहर में जाम है या जाम में शहर !


       -  रत्नेश चंचल