अति का अंत : साइबर क्रिमिनल ने टेके घुटने !

अति का अंत : साइबर क्रिमिनल ने टेके घुटने !

 साइबर सुरक्षा को लेकर चलाया गया डायल टोन साइबर क्राइम को कम करने में निभाई अहम भूमिका

पढ़े लिखे लोगों से लेकर गांव, कस्बों तक में रहने वाले लोग इस साइबर फ्रॉड के जाल में फंसे

वाराणसी (रणभेरी सं.)। देश का सबसे बड़ा मुद्दा साइबर क्राइम ने लोगों को बहुत बुरे दिन दिखाए। पढ़े लिखे लोगों से लेकर गांव, कस्बों तक में रहने वाले लोग इस साइबर फ्रॉड के जाल में फंस गए, ऐसी-ऐसी ठगी के केस बनारस में सुनने को मिले, जिसने हमें सोचने पर मजबूर कर दिया कि, अकाउंट में पैसे रखे भी या नहीं। पर वो कहते है न कि लोहे को लोहा ही काटता है, ये कहावत आज एक बार फिर सच हुई। दरअसल सरकार द्वारा साइबर सुरक्षा को लेकर चलाया गया डायल टोन, ने आज साइबर क्राइम को कम करने में अपनी अहम भूमिका निभाई है। दरअसल पिछले तीन सालों के मुकाबले ये जनवरी, फरवरी और मार्च का ऐसा महीना है, जिसमें वाराणसी में साइबर क्राइम में कमी आई है। इसमें साइबर पुलिस का भी अहम रोल है, साइबर क्राइम के प्रति अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया। आईये जानते है कि कैसे कम हुए साइबर फ्रॉड के मामले।

एक मामला पांच दिन पहले का है जब साइबर पुलिस के पास आया, जिसमें पांडेयपुर निवासी अनुज ने पुलिस को सूचना दी कि उसके पास कई दिन से साइबर फ्रॉड के फोन आ रहे हैैं। पहले तो वह कॉल इग्नोर कर रहा था, फिर उसके पास अलग-अलग नंबर से मैसेज आने लगे। जिसके बाद वह शिकायत करने पहुंचा। साइबर पुलिस ने उसकी तारीफ की। दरअसल अनुज अखबार और न्यूज के जरिए साइबर की घटनाओं को देखता रहता था। जिससे उसे पता था कि इस तरह की कॉल फेक होती है। बुधवार के अवेयरनेस शो में एक स्कूल में इस केस को बताते हुए, लोगों से अपील की, की वह भी अनुज की तरह कोई घटना होने के पहले शिकायत दर्ज कराएं। दूसरा मामला  विनय सिंह जो कि भोजूबीर निवासी है उनका है। उन्होंने 2 दिन पहले ही साइबर पुलिस स्टेशन में अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। दरअसल, उनको बार बार एक साइबर क्रिमनल डिजिटल अरेस्ट करके डराने की कोशिश कर रहा था। जिसपे विनय ने कहा कि वह उसको घर से अरेस्ट कर ले, वह जेल जाने के लिए तैयार है। इसके बाद साइबर पुलिस स्टेशन जाकर उन्होंने शिकायत दर्ज कराकर पुलिस को परेशान करने वाले का नंबर दिया।

 विनय को पहले भी इस तरह की कॉल आ चुकी है। पर उस समय उसने पुलिस को सूचना नहीं दी। लेकिन पुलिस के एक अवेयरनेस प्रोग्राम के दौरान उसे डिजिटल अरेस्ट की जानकारी मिली थी। जिसमें पुलिस ने कहा था कि वह इस तरह के कॉल की शिकायत जरूर दर्ज कराए। पुलिस ने इस केस अवेयरनेस प्रोग्राम के दौरान बताया, कि अगर उन्हें भी डिजिटल अरेस्ट करने की धमकी मिलती है, तो बिना घबराए, पुलिस को सूचना दें।

कम हुई साइबर क्राइम की घटनाएं

दरअसल अति का अंत होना तय है। साइबर क्राइम तो खूब सुनने में आ रहा था, लेकिन अब आप आकड़ें देखकर तो समझ ही गए होंगे, कि पिछले तीन सालों के मुकाबले जनवरी, फरवरी और मार्च मंथ में साइबर फ्रॉड की घटनाएं कम हुई है। साइबर पुलिस का मानना है, कि इसमें अवेयरनेस प्रोग्राम और डायल टोन ने अहम रोल दिखाया है।

साइबर पुलिस ने खूब चलाए अभियान

पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने 17 नंवबर 2024 को कमिश्नरेट में साइबर सिक्योरिटी अवेयरनेस सेल के गठन का आदेश दिया। इसके लिए साइबर क्राइम थाने में अतिरिक्त पुलिसकर्मियों के तौर पर पांच इंस्पेक्टर, पांच सब इंस्पेक्टर और 10 कांस्टेबल को तैनात किया गया। यह टीम प्रत्येक दिन एक स्कूल जाकर छात्र-छात्राओं को साइबर फ्रॉड से बचने के उपायों के बारे में जागरूक करती है। 20 नंवबर 2024 को वाराणसी पुलिस संचार सारथी पोर्टल को लेकर जागरूकता अभियान चलाया। साइबर अपराध जिसमें डिजिटल अरेस्टिंग जैसे गंभीर अपराधों के अलावा आर्थिक अपराध किया जाता है, उसको रोकने के लिए भारत सरकार द्वारा संचार सारथी पोर्टल को लांच किया गया था। इसमें किसी भी अनजान नंबर जो कि आपको संदेहास्पद लगते हैं उसकी रिपोर्ट करने के लिए इसमें प्रावधान किया गया है आप इसमें नंबर डालते ही उसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं इसके अलावा आप खुद के मोबाइल नंबर से किसी अन्य का मोबाइल नंबर जुड़ा है कि नहीं इसको भी संचार सारथी पोर्टल से जांच सकते हैं। इस एप के जरिए भी लोगों ने साइबर क्राइम को जाना और समझा। इस एप के बारे में लोगों को बताने के लिए साइबर पुलिस ने अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया था।