सावधान! मिलावटी मिठाईयों की सजने लगीं दुकानें

- थोक मिठाई की खपत में लगा रहा जीएसटी की चपत, वल्क में मिठाई बेच टैक्स में भी लगाते हैं चूना
- खाद्य विभाग की मिलीभगत से चलता है टैक्स चोरी से लेकर मिलावटखोरी तक का खेल, शहर के
- नामचीन दुकानों पर कार्रवाई करने से डरते है खाद्य विभाग के अधिकारी !
वाराणसी (रणभेरी सं.)। दिवाली का त्यौहार ज्यों -ज्यों नजदीक आ रहा है। त्यों -त्यों मिठाईयों की दुकानें सजने लगी है। ऐसे में संभले नहीं तो यह बाजार की मिठाईयां आपको तकलीफ भी पहुंचा सकती हैं। मुनाफे के लालच में मिलावटखोर खेल कर देते हैं। मिठाईयों का स्वाद बढ़ाने वाले खोवा में मिलावट कर दिया जाता है। बाजारों में मानकविहीन व मिलावटी मिठाईयों की दुकानें लगना खाद्य सुरक्षा विभाग के ऊपर सवालिया निशान उठा रहे हैं। लोगों की मानें तो त्योहारों के मद्देनजर खान-पान की तमाम दुकानों में मानकविहीन तरीके से खाने के समान बाजरो में धड़ल्ले से बिक रहे हैं तो वहीं दीवाली का सीजन होने से मिलावटी मिठाई की दुकानें भी सजने लगी हैं।
दीपावली और अन्य त्योहारों के समय मिठाईयों की मांग बहुत होती है। इसी का फायदा उठाकर मिलावटखोर, मावे व मिठाईयों में मिलावट करके उसकी मात्रा तो बढ़ा देते हैं, लेकिन उसकी गुणवत्ता पूरी तरह से खत्म हो जाती है। इसका नतीजा कई बार लोगों के बीमार होने, उल्टी, दस्त, घबराहट मौत के रूप में भी सामने आता है। दरअसल मिठाईयां बनाने के लिए दूध, मावे और घी की आवश्यकता होती है, जिसकी मांग सबसे ज्यादा होती है। लेकिन खपत बढ़ाने के लिए मिलावटखोर इन उत्पादों को सोडा, डिटरजेंट, कास्टिक सोडा, यूरिया और चरबी के प्रयोग से तैयार करके बाजार में बेचते हैं, जिसके दुष्परिणाम मनुष्य की स्वास्थ्य समस्याओं के रूप में सामने आते हैं। त्योहार के समय यह मिलावट चरम पर होती है, क्योंकि दूध, मावे की मांग काफी होती है और इससे व्यापारियों को मुनाफा होता है। यही कारण है कि मिलावटखोरों द्वारा सिंथेटिक दूध, मावा और अन्य सामान धड़ल्ले से तैयार किया जाता है। इसमें प्रयोग की जाने वाली चीजें इतनी घातक होती हैं, कि कल्पना भी नहीं की जा सकती।
नहीं है कोई मानक
प्रतिष्ठानों पर सजने वाली मिठाई पर रेट के टैग तो लगे हैं लेकिन एक्सपायरी डेट के टैग नहीं लगे हैं। ऐसे दिन है और कितने दिन तक रखकर खा सकते हैं। इसके बारे में कोई भी बताने वाला नहीं है। लिहाजा दीपावली के पर्व पर मिठाई खाने जा रहे हैं या फिर खिलाने तो संभलकर खाइए, क्योंकि किसी भी मिठाई का न तो मैन्युफैक्चरिंग डेट है और न ही एक्सपायरी डेट।
काजू बर्फी का दाम दोगुना
काजू टुकड़ा 600 रुपए किलो और मार्केट में काजू बर्फी का रेट 1100 रुपए किलो से लेकर 1200 रुपए किलो की दर से बिक रहा है। इन मिठाई विक्रेताओं की मनमानी पर कोई भी डिपार्टमेंट अंकुश लगाने वाला नहीं है। यही वजह है कि फेस्टिव सीजन शुरू होते ही मिठाई पर मनमाना रेट का टैग लगाकर बेचना शुरू कर दिए हैं।
विभाग काम में व्यस्त, दुकानदार मस्त
त्योहार पर मिलावटी मिठाई बिकने का भी अंदेशा रहता है। ऐसे समय में खाद्य सुरक्षा विभाग दूसरे जागरूकता कार्यक्रम में व्यस्त है, जबकि उसे गंभीर होने की जरूरत है। त्योहार के नजदीक होने के बावजूद औचक निरीक्षण नहीं किया जा रहा है।
कैसे करें पहचान
- खोये की मिठाई लेते समय उसमें थोडी सी चीनी मिलाये अगर वह पानी छोड़ती है तो नकली है
- शुद्ध खोये की मिठाई होगी तो मुंह में चिपकेगी नहीं इसलिए खरीदने से पहले टेस्ट करें
- खोये को रगड़ कर देखे यदि असली होगा तो खूशबू ज्यादा देर तक आएगी
खोवा में शकरकंद, आलू के अलावा दूध पाउडर की मिलावट जानकार बताते हैं कि खोवा में उबले शकरकंद, आलू के अलावा दूध पाउडर की मिलावट की जाती है। इससे जो खोवा तैयार होता है, उसकी लागत काफी कम हो जाती है। खराब दूध पाउडर से भी खोवा बना लिया जाता है, इसका स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। बताते हैं कि दूध की कमी होने से खोवा दीपावली से काफी दिन पहले से बनाकर स्टॉक किया जाता है। स्टॉक किया यह खोवा सड़ न जाए, इसलिए इसमें फार्मोलिन मिलाया जाता है। बता दें कि फार्मोलिन का इस्तेमाल शवों को सडने से बचाने में भी किया जाता है।
थोक मिठाई की बिक्री पर जीएसटी की चपत
शहर के छोटे मिठाई दुकानदारों से लेकर नामचीन मिठाई दुकान वाले सिर्फ मिलावटखोरी का खेल खेलकर लोगों के सेहत से ही खेलवाड़ नहीं करते बल्कि सरकारी राजस्व को भी चुना लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ते है। ये नामचीन मिठाई दुकानदार एक-दो पिस मिठाई या आधा-एक किलो मिठाई की खरीदारी पर बिल तो थमाते है लेकिन जब बात थोक मिठाई खरीदने की आती तो सादा कागज पर बिल बनाकर थमा देते हैं। दिवाली के त्योहार नकदीक होने के कारण सभी दुकानदारों ने ग्राहकों का थोक आॅर्डर ले लिया है और तैयारियां जोरो पर है। ऐसे में अब ये मिठाई दुकानदार थोक खरीदारी पर सरकार के जीएसटी में चुना लगाने की भी पूरी तैयारी कर ली है। ऐसा नहीं है संबंधित विभाग को इस बात की जानकारी नहीं है। यह सारा खेल खाद्य विभाग के अधिकारियों के मिलीभगत से ही होता है, पर जिम्मेदारान सब जान कर भी आंख मूंदे रहते है और मिठाई दुकानदार जीएसटी की चोरी कर मलाई काटते हैं