(रणभेरी): स्टूडेंट प्रोटेस्ट को लेकर दिए गए बयानों के बाद एक्ट्रेस और सांसद कंगना रनोट एक बार फिर चर्चा में हैं। उनके विरोधी बयान पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास ने निशाना साधा, जिसके बाद कंगना ने भी सोशल मीडिया के जरिए पलटवार किया। दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है।
सौरव दास ने कंगना के बयान पर उठाए सवाल
कंगना रनोट के प्रोटेस्ट विरोधी रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए सौरव दास ने कहा कि कंगना को उनकी ही पार्टी में गंभीरता से नहीं लिया जाता, इसलिए युवाओं को भी उनके बयानों को ज्यादा महत्व नहीं देना चाहिए।
सौरव ने कहा कि मौजूदा युवा पीढ़ी और खासकर जेन जी के बीच कंगना के बयानों का ज्यादा प्रभाव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि एक जनप्रतिनिधि के तौर पर नेताओं को अपनी भाषा और जिम्मेदारियों का ध्यान रखना चाहिए।
उन्होंने कंगना के पुराने एक बयान का जिक्र करते हुए कहा कि सांसद बनने के बाद काम की जिम्मेदारियों को लेकर की गई उनकी टिप्पणी से उनकी राजनीतिक गंभीरता पर सवाल खड़े होते हैं। सौरव ने दावा किया कि युवाओं ने लोकतंत्र और देश के मुद्दों पर अपनी भागीदारी दिखाई है और उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कंगना रनोट ने सोशल मीडिया पर दिया जवाब
सौरव दास के बयान के बाद कंगना रनोट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सौरव की उम्र और उनकी पहचान पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह लंबे समय से सार्वजनिक जीवन का हिस्सा रही हैं।
कंगना ने लिखा कि वह भले ही कुछ समय पहले राजनीति में आई हैं, लेकिन पिछले कई वर्षों से फिल्म इंडस्ट्री और सार्वजनिक क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि सांसद बनने के बाद जिम्मेदारियों का बढ़ना स्वाभाविक है, क्योंकि वह अभिनय के साथ-साथ फिल्म निर्माण, लेखन और अन्य क्षेत्रों से भी जुड़ी रही हैं।
कंगना ने अपने जवाब में सौरव दास पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए कहा कि जो व्यक्ति लगातार व्यस्त और जिम्मेदारियों से घिरा नहीं रहा हो, वह किसी की मेहनत और दबाव को समझ नहीं सकता। उन्होंने उन्हें अपनी क्षमताओं को विकसित करने और काम सीखने की सलाह भी दी।
प्रोटेस्ट को लेकर पहले भी बयान दे चुकी हैं कंगना
दरअसल, शिक्षा मंत्रालय से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बाद कंगना रनोट लगातार स्टूडेंट प्रोटेस्ट और प्रदर्शनकारियों को लेकर सोशल मीडिया पर अपनी राय रख रही थीं।
हाल ही में उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि अगर कोई सार्वजनिक मंच पर नेताओं और सरकार के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करता है, तो उसे जवाब सुनने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि लोकतंत्र में हर पक्ष को अपनी बात रखने का अधिकार है।
कंगना के इस बयान पर विपक्षी दलों और कई लोगों ने प्रतिक्रिया दी, जिसके बाद सौरव दास ने उन पर निशाना साधा। अब दोनों पक्षों के बीच हुई बयानबाजी राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गई है।
सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस
कंगना के जवाब के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग कंगना के समर्थन में नजर आए, जबकि कुछ यूजर्स ने सौरव दास के बयान को सही ठहराया। फिलहाल यह विवाद स्टूडेंट प्रोटेस्ट, नेताओं की भाषा और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी जैसे मुद्दों को लेकर जारी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।
