(रणभेरी): जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के तीन सदस्यों के मामले में बुधवार को अदालत में सुनवाई हुई। स्पेशल कोर्ट ने आशुतोष रांका और सौरव दास को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया, जबकि अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया।
जानकारी के मुताबिक, तीनों को मंगलवार सुबह जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने हिरासत में लिया था। इसके बाद रात करीब तीन बजे उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। बुधवार सुबह तीनों को स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया।
CJP की लीगल टीम की प्रमुख रत्ना सिंह के अनुसार, प्रदर्शनकारियों पर बिना अनुमति निर्धारित क्षेत्र में प्रवेश करने, बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने और सरकारी कामकाज में बाधा डालने जैसे आरोप लगाए गए हैं। इससे पहले 10 अक्टूबर को भी आशुतोष रांका और सौरव दास को फ्लाइट से हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई थी।
राहुल गांधी ने उठाए कार्रवाई पर सवाल
इस मामले को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने युवाओं की गिरफ्तारी पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान तिरंगा फहराना कोई अपराध नहीं है। ऐसा करने वाले युवाओं को जेल भेजना कायरता है। राहुल गांधी ने कहा कि छात्र, युवा और पत्रकार अलग-अलग मंचों से आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उनका उद्देश्य एक है। उन्होंने जंतर-मंतर को जनता के विरोध प्रदर्शन का स्थान बताते हुए कहा कि इसे लोगों के लिए फिर से उपलब्ध कराया जाएगा।
CJP संस्थापक ने हिरासत पर जताई नाराजगी
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे अघोषित आपातकाल जैसा बताया। उनका आरोप है कि सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को लंबे समय तक हिरासत में रखा गया और उन्हें अपने वकीलों से मिलने का अवसर भी नहीं दिया गया।
उन्होंने सरकार से पूछा कि शांतिपूर्ण विरोध करने वालों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई क्यों की जा रही है। हालांकि, हिरासत और कानूनी प्रक्रिया से जुड़े इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
खड़गे ने सरकार पर लगाया विरोध के अधिकार को सीमित करने का आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने SIR प्रक्रिया और जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए। खड़गे के मुताबिक, पहले चुनावी प्रक्रिया को लेकर विवाद और अब विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर पाबंदियां लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय हैं। उन्होंने सरकार पर विपक्ष और प्रदर्शनकारियों की आवाज सीमित करने का आरोप लगाया।
12 अक्टूबर को बदले गए प्रदर्शन स्थलों के नियम
दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों को लेकर 12 अक्टूबर को एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया। खबर के मुताबिक, केंद्र सरकार ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया। यह स्थान पिछले करीब 33 वर्षों से विरोध प्रदर्शनों के प्रमुख केंद्रों में शामिल रहा है। जंतर-मंतर पर पहले अन्ना हजारे के आंदोलन, पहलवानों के विरोध प्रदर्शन और CJP के धरने जैसे कई आंदोलन हो चुके हैं। गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों के रूप में शामिल किया गया है।
CJP ने चुनाव आयोग से जुड़ी मांगों को लेकर मांगी थी अनुमति
CJP ने 12 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग के साथ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति मांगी थी। खबर के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद प्रदर्शन और गिरफ्तारियों को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। एक ओर विपक्षी नेताओं ने कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया है .
