काशी से चुनार तक गंगा की लहरों पर होगा तीन दिवसीय सफर, पहली बार गंगोत्री क्रूज लेकर जाएगा पर्यटकों को

काशी से चुनार तक गंगा की लहरों पर होगा तीन दिवसीय सफर, पहली बार गंगोत्री क्रूज लेकर जाएगा पर्यटकों को

वाराणसी (रणभेरी): गंगा की लहरों के बीच काशी की आध्यात्मिकता और चुनार की ऐतिहासिक विरासत को एक साथ महसूस करने का नया अवसर पर्यटकों को मिलने जा रहा है। वाराणसी से चुनार के बीच पहली बार गंगोत्री क्रूज तीन दिन की विशेष यात्रा पर रवाना होगा। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार यह यात्रा 4 से 6 सितंबर तक आयोजित की जाएगी। इसमें अधिकतम 60 पर्यटक शामिल हो सकेंगे। यात्रा के लिए ऑनलाइन बुकिंग भी शुरू कर दी गई है।

अब तक गंगोत्री क्रूज का संचालन मुख्य रूप से वाराणसी में रविदास घाट से नमो घाट के बीच पर्यटकों के लिए किया जाता रहा है। पहली बार इसके संचालन का दायरा बढ़ाकर चुनार तक किया जा रहा है। क्रूज की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें यात्रियों के रुकने की सुविधा भी उपलब्ध है। इसी कारण इसे लंबी दूरी के नदी पर्यटन के लिए दूसरे पर्यटक क्रूज से अलग माना जा रहा है।

गंगा के साथ विरासत और संस्कृति का अनुभव

इस विशेष यात्रा को ‘द गंगा हेरिटेज वॉयज’ नाम दिया गया है। तीन दिनों के इस सफर में यात्रियों को सिर्फ गंगा की सैर नहीं कराई जाएगी, बल्कि काशी और चुनार की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से भी रूबरू कराया जाएगा।

यात्रा के दौरान धार्मिक स्थलों के दर्शन, प्राकृतिक पर्यटन, स्थानीय खानपान और संगीत को कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। आयोजकों का प्रयास है कि पर्यटकों को इस यात्रा में काशी के आध्यात्मिक वातावरण के साथ गंगा और चुनार के प्राकृतिक एवं ऐतिहासिक पक्ष को भी करीब से देखने का मौका मिले।

पहले दिन गंगा आरती से होगी शुरुआत

तीन दिवसीय यात्रा का पहला दिन काशी के धार्मिक और सांस्कृतिक रंग में रंगा रहेगा। यात्रियों के लिए गंगा आरती का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ बनारसी चाय और नाश्ते की व्यवस्था रहेगी।

शाम को शास्त्रीय संगीत का कार्यक्रम होगा और यात्रियों के लिए रात्रिभोज की व्यवस्था भी की जाएगी। इस तरह यात्रा की शुरुआत काशी की परंपरा, संगीत और आध्यात्मिक माहौल के साथ होगी।

दूसरे दिन सूर्योदय के साथ चुनार की ओर रवाना होंगे पर्यटक

यात्रा के दूसरे दिन सुबह सूर्योदय के समय क्रूज चुनार की दिशा में रवाना होगा। गंगा के शांत जल और उगते सूरज के बीच यह सफर पर्यटकों के लिए खास अनुभव होगा।

चुनार पहुंचने के बाद नाश्ता कराया जाएगा। इसके बाद स्थानीय पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा। कार्यक्रम में सिद्धनाथ दरी और जलप्रपात का गाइडेड टूर भी शामिल किया गया है। पर्यटक यहां प्राकृतिक वातावरण का आनंद लेने के साथ क्षेत्र की भौगोलिक विशेषताओं को भी करीब से देख सकेंगे।

इसके बाद चुनार के ऐतिहासिक और विरासत स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा। यात्रियों के लिए दोपहर के भोजन की व्यवस्था क्रूज पर ही रहेगी।

दिन के कार्यक्रम में शूलटंकेश्वर मंदिर के दर्शन भी शामिल किए गए हैं। शाम को काशी लौटने के बाद क्रूज पर मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा और इसके बाद रात्रिभोज होगा।

तीसरे दिन योग और काशी के घाटों का दीदार

यात्रा के अंतिम दिन की शुरुआत भी गंगा के किनारे सूर्योदय के साथ होगी। यात्रियों के लिए क्रूज पर योग सत्र आयोजित किया जाएगा। इसके बाद सुबह के समय काशी के ऐतिहासिक घाटों का नदी से भ्रमण कराया जाएगा।

सुबह के शांत वातावरण में गंगा के बीच से काशी के घाटों को देखना इस यात्रा का प्रमुख आकर्षण होगा। घाटों और शहर की ऐतिहासिक विरासत का भ्रमण पूरा होने के बाद यात्रियों को नाश्ता कराया जाएगा। इसके साथ तीन दिवसीय ‘गंगा हेरिटेज वॉयज’ का समापन होगा।

सफर से ज्यादा अनुभव पर जोर

आयोजकों के अनुसार इस यात्रा की अवधारणा केवल वाराणसी से चुनार तक यात्रियों को पहुंचाने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य नदी पर्यटन को विरासत और संस्कृति से जोड़ना है।

यात्रियों को एक ही यात्रा में काशी की आध्यात्मिक पहचान, गंगा की प्राकृतिक सुंदरता और चुनार की ऐतिहासिक विरासत का अनुभव कराने की कोशिश की गई है। धार्मिक स्थलों के दर्शन से लेकर संगीत, स्थानीय खानपान, प्राकृतिक स्थलों और घाटों के भ्रमण तक कई गतिविधियों को कार्यक्रम में शामिल किया गया है।

वाराणसी में कई क्रूज दे रहे नदी पर्यटन को बढ़ावा

वाराणसी में गंगा के जरिए पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई क्रूज और पर्यटक नौकाओं का संचालन किया जा रहा है। इनमें अलकनंदा, भगीरथी, स्वामी विवेकानंद और सैम मानिकशॉ प्रमुख नाम हैं।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार अलकनंदा क्रूज में लगभग 60 यात्रियों के बैठने की क्षमता है। भगीरथी में करीब 80 यात्री सफर कर सकते हैं। वहीं स्वामी विवेकानंद और सैम मानिकशॉ क्रूज में लगभग 100-100 यात्रियों के लिए व्यवस्था बताई गई है।

गंगोत्री क्रूज की सामान्य यात्री क्षमता करीब 200 बताई जाती है। इसकी खासियत यह है कि इसमें यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था भी है। क्रूज में करीब 48 यात्रियों के रहने की सुविधा उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है। इसी सुविधा के कारण इसे बहुदिवसीय नदी पर्यटन के लिए उपयोगी माना जा रहा है।

तीन मंजिला क्रूज में होटल जैसी सुविधाएं

गंगोत्री क्रूज को पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसकी लंबाई करीब 52 मीटर और चौड़ाई लगभग 12 मीटर है। नदी में यह लगभग 1.45 मीटर ड्राफ्ट के साथ संचालित हो सकता है।

क्रूज में तीन मंजिलें और कुल 24 कमरे बताए गए हैं। कमरों को वातानुकूलित रखा गया है और बड़ी खिड़कियों की व्यवस्था की गई है। इन खिड़कियों से यात्रियों को सफर के दौरान गंगा, घाटों और आसपास के प्राकृतिक दृश्यों को देखने का अवसर मिलेगा।

क्रूज में भोजन और लंच के लिए अलग व्यवस्था के साथ डायनिंग एरिया भी बनाया गया है। यात्रा के दौरान पर्यटक गंगा में दिखाई देने वाली डॉल्फिन और नदी के आसपास के प्राकृतिक नजारों का आनंद भी ले सकेंगे।

बढ़ता गंगा जलस्तर जल परिवहन के लिए राहत

इस समय गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है। सामान्य तौर पर जलस्तर बढ़ना कई परिस्थितियों में चुनौती बन सकता है, लेकिन जलमार्ग परिवहन की दृष्टि से पर्याप्त पानी को अनुकूल माना जाता है।

नदी में पर्याप्त जल उपलब्ध होने पर क्रूज के साथ बड़े मालवाहक जहाजों के संचालन में भी सुविधा होती है। आने वाले समय में गंगा के जलमार्ग के जरिए माल परिवहन को बढ़ाने की संभावनाओं को भी इससे बल मिल सकता है।

जलमार्ग के जरिए मालवाहक जहाजों को पटना और हल्दिया जैसे प्रमुख स्थानों तक ले जाने की योजना और संभावनाओं के बीच गंगा का पर्याप्त जलस्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

60 यात्रियों के लिए होगी विशेष यात्रा

अलकनंदा क्रूजलाइन के निदेशक विकास मालवीय के मुताबिक वाराणसी से चुनार के लिए प्रस्तावित विशेष यात्रा की ऑनलाइन बुकिंग शुरू कर दी गई है। 4, 5 और 6 सितंबर को आयोजित होने वाली इस तीन दिवसीय यात्रा में कुल 60 यात्रियों को शामिल किया जाएगा।

यह यात्रा उन पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बन सकती है, जो सामान्य पर्यटन के बजाय गंगा के रास्ते काशी और चुनार की विरासत को देखने का अनुभव लेना चाहते हैं।

गंगोत्री क्रूज के जरिए शुरू की जा रही यह पहल वाराणसी में नदी पर्यटन को एक नए स्वरूप में आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अगर यह प्रयोग सफल रहता है तो भविष्य में गंगा के रास्ते वाराणसी से आसपास के अन्य ऐतिहासिक और पर्यटन स्थलों को जोड़ने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

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